कयासों पर विराम, टला खतरा, पृथ्वी के पास से गुजरा विशालकाय Asteroid, जानिए अब कब आएगा वापस?
नई दिल्ली। आखिरकार अंतरिक्ष से आ रहा एस्टेरॉयड 1998 OR2 धरती के बगल से गुजर गया, जिससे हमारी पृथ्वी को कोई नुकसान नहीं हुआ और इसके साथ ही उन सारे कयासों पर पानी फिर गया जिसमें ये कहा जा रहा था कि यह उल्का पिंड तबाही लेकर आएगा,आपको बता दे ये एस्टेरॉयड बुधवार को भारतीय समयानुसार 3 बजकर 26 मिनट पर पृथ्वी से करीब 63 लाख किलोमीटर दूर से गुजरा है, दक्षिण अफ्रीका की ऑब्जर्वेटरी की ओर से इस खगोलीय घटना की पुष्टि भी की गई है। ऑब्जर्वेटरी की ओर से किए गए ट्वीट में बताया गया है कि यह विनाशकारी उल्कापिंडों में से एक है, उसने इस बारे में एक वीडियो भी पोस्ट किया है।
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धरती के पास से गुजरा विशालकाय Asteroid
यहां आपको ये भी बता देते हैं कि अब यह Asteroid धरती से 1.8 मिलियन किलो मीटर की दूर चला गया है, हालांकि नासा समेत विश्व के सारे वैज्ञानिक इस उल्कापिंड के अध्ययन में जुट गए हैं, इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने ये भी जानकारी दी है कि अब 11 साल बाद यानी कि साल 2031 में एस्टेरॉयड 1998 OR2 धरती के करीब से गुजरेगा लेकिन उसकी दूरी 1.90 करोड़ किलोमीटर होगी।
11 साल बाद फिर लौटेगा एस्टेरॉयड
दरअसल एस्टेरॉयड 11 साल बाद ही धरती के आसपास गुजरता है, मालूम हो कि आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए या पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का यानी कि meteor कहा जाता है और उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुंचता है उसे उल्कापिंड यानी कि meteorite कहा जाता है।

एस्ट्रॉयड को देख पाना काफी मुश्किल
वैज्ञानिकों का कहना है कार्बन की मोटी परतों और चट्टानों से बने इन एस्ट्रॉयड को देख पाना काफी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि ये ग्रहों की तुलना में बहुत छोटे, और बिल्कुल काले होते हैं। इस कारण इन पर पड़ने वाली कोई रोशनी आसानी से रिफ्लेक्ट नहीं होती।

'डबल एस्ट्रॉयड रीडारेक्शन टेस्ट'
दरअसल अंतरिक्ष में उड़ते असंख्य एस्ट्रॉयड पृथ्वी के लिए हमेशा से एक बड़ा खतरा बने रहे हैं, एस्ट्रॉयड की टक्कर पृथ्वी पर मानव जाति के सर्वनाश का कारण बन सकती है। भविष्य में इस तरह की आकाशीय दुर्घटनाओं से निपटने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक एक खास मिशन पर काम कर रहे हैं, जिसे कि 'डबल एस्ट्रॉयड रीडारेक्शन टेस्ट' (डीएआरटी) नाम दिया गया है, जिसमें क्षुद्रग्रहों पर स्पेसक्राफ्ट के जरिए जोरदार प्रहार किया जाएगा,जिससे पृथ्वी की ओर आ रहे क्षुद्रग्रह (एस्ट्रॉयड) का दिशा परिवर्तन हो जाए, डीएआरटी मिशन पर नासा के साथ-साथ यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) और ऑब्जर्वेटरी ऑफ द फ्रेंच रेविएरा भी काम कर रहे हैं।

अंतरिक्ष से जुड़ी कुछ बेहद खास बातें
- अंतरिक्ष के सूट की कीमत लगभग 12 मिलियन डॉलर होती है मतलब की भारतीय मुद्रा में 75,24,05,400 रुपये के बराबर होती है।
- अंतरिक्ष यात्रियों के अनुसार अंतरिक्ष से सीयर्ड स्टेक, गर्म धातु और वेल्डिंग फ्यूम की तरह महक आती है।
- 1963 में अमेरिका ने अंतरिक्ष में एक हाइड्रोजन बम फेंका था जो कि हिरोशिमा में फेंके बम की अपेक्षा 100 गुणा ज्यादा शक्तिशाली था।
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्रों पर प्रतिदिन 15 बार सूर्यास्त और सूर्योदय होता है। इसके गवाह स्वयं अंतरिक्ष यात्री हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र सबसे कीमती चीज है, इसकी कीमत 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर होते हैं।
At least weve avoided another bullet! At 10.56 this morning (Weds) a giant asteroid 2.5 miles wide called 52768 1998 OR passed us within 3.9 million miles. That counts as a near miss.
— John Simpson (@JohnSimpsonNews) April 29, 2020












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