11 जनवरी को पृथ्वी को 'छूते' हुए गुजरेगा विशालकाय एस्टेरॉइड, नासा ने बताया धरती के लिए 'खतरा'
104 मीटर लंबा विशालकाय एस्टेरॉइड पृथ्वी के बेहद पास से 11 जनवरी को गुजरेगा, जिसे नासा ने संभावित खतरा बताते हुए चेतावनी जारी की है।
वॉशिंगटन, जनवरी 02: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि, इस साल 5 एस्टेरॉयड के धरती से 'टकराने' का खतरा है और जिनमें से एक एस्टेरॉयड 11 जनवरी को पृथ्वी के बेहद करीब से निकलेगा। नासा ने इस एस्टेरॉयड को पृथ्वी के लिए संभावित खतरे के तौर पर सूचिबद्ध किया है। नासा के मुताबिक, इस एस्टेरॉयड का आकार 100 मीटर से ज्यादा है और ये पृथ्वी के लिए 'संभावित खतरा' है। इस एस्टेरॉयड यानि क्षुद्रग्रह के अलावा, अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा कि, एक ही महीने में दो क्षुद्रग्रह पृथ्वी के पास से गुजरने वाले हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक का आकार एक बड़ी इमारत से ज्यादा बड़ा है।
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नासा ने जारी की चेतावनी
जैसे ही वर्ष 2021 खत्म हुआ है और नया साल शुरू हुआ है, कई लोग उत्सुकता से नए साल के लिए और ज्यादा सरप्राइजेज का इंतजार कर रहे हैं और सबसे बड़ा सरप्राइज जनवरी महीने के दूसरे हफ्ते में ही मिल रहा है, जब एक क्षुद्रग्रह पृथ्वी के बेहद पास से गुजरेगा। इस एस्टेरॉयड का आकार करीब 100 मीटर का है और ये विशालकाय पत्थर का टुकड़ा है और नासा ने कहा है कि, इस एस्टेरॉयड को धरती के कई हिस्सों से देखा भी जा सकता है। नासा ने इस एस्टेरॉयड का नाम 2013 YD48 रखा है। 'द मिरर' की रिपोर्ट के मुताबिक, ये एस्टेरॉयड पृथ्वी से करीब 30 लाख मील के दायरे से गुजरेगा, लिहाजा नासा ने इसे पृथ्वी के लिए 'संभावित खतरा' करार दिया है।

कौन से एस्टेरॉयड होते हैं 'संभावित खतरा'
अंतरिक्ष एजेंसी नासा पृथ्वी के 120 मिलियन मील के भीतर से गुजरने वाली किसी भी वस्तु को नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट (NEO) के रूप में वर्गीकृत करता है और ऐसे किसी ऑब्जेक्ट को पृथ्वी के लिए संभावित खतरा मानता है। इतनी कम दूरी से गुजरने वाले एस्टेरॉयड किसी भी वक्त अगर दिशा परिवर्तन करता है, तो पृथ्वी के लिए घातक साबित हो सकता है। इसीलिए नासा ने पिछले महीने एस्टेरॉयड पर हमला करने वाले स्पेसक्राफ्ट को लॉंच किया है, जो इस साल एस्टेरॉयड को अंतरिक्ष में मार गिराने की कोशिश करेगा, नासा ने इस मिशन का नाम 'डार्ट मिशन' रखा हुआ है। एस्टेरॉयड धरती के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकते हैं, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, सौ से ज्यादा वैज्ञानिक लगातार एस्टेरॉयड को ट्रैक करते रहते हैं और ऐसे चट्टानों पर अपना कीमती वक्त बर्बाद करते रहते हैं।

क्या क्षुद्रग्रह 2014 YE15 खतरनाक है?
पृथ्वी के पास खतरनाक रूप से आने वाले एस्टेरॉयड पर नासा द्वारा नजर रखी जाती है और नासा अगले 100 सालों तक पृथ्वी के पास आने वाले एस्टेरॉयड पर लगातार नजर रखता है, खासकर उन एस्टेरॉयड पर और ज्यादा गहनता से नजर रखी जाती है, जिनके पृथ्वी से टकराने की संभावना ज्यादा होती है और ऐसे एस्टेरॉयड का लगातार विश्लेषण किया जाता है। नासा के अनुसार, एक क्षुद्रग्रह जो 4.6 मिलियन मील के भीतर पहुंचता है और 150 मीटर से बड़ा होता है उसे संभावित खतरनाक वस्तु माना जाता है। और इस प्रकार के आकार के एस्टेरॉयड पृथ्वी को प्रभावित करने पर विनाशकारी तबाही मचा सकते हैं। इससे पहले साल 1908 में 120 फीट का एक बड़ा एस्टेरॉयड साइबेरिया में करीब 33 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से टकराया था और उसमें विस्फोट हुआ था, जिससे भारी तबाही मची थी।

22 ऐस्टरॉइड से पृथ्वी को खतरा
नासा ने अपनी रिपोर्ट में कई ऐस्टरॉइड को बेहद खतरनाक श्रेणी में रखा है और हाल के दिनों में पृथ्वीकी कक्षा में दाखिल होने वाला ये पांचवां ऐस्टरॉइड है। आपको बता दें कि ऐस्टरॉइड को क्षुद्रग्रह भीकहा जाता है। नासा ने कहा है कि वो करीब 2 हजार से ज्यादा ऐस्टरॉइड पर नजर रख रहा है, जोआने वाले वक्त में पृथ्वी के लिए खतरा बन सकते हैं। नासा ने कहा है कि आने वाले 100 सालों में 22ऐसे ऐस्टरॉइड हैं, जो पृथ्वी की कक्षा में शामिल होने के बाद पृथ्वी से टकरा सकते हैं। नासा का कहना है कि ऐसे ऐस्टरॉइड जो पृथ्वी से 46.5 मिलियन मील करीब आ जाता है, उसे वो डेंजरस कैटोगिरी मेंरखता है। नासा का सेंट्री सिस्टम इस तरह के ऐस्टरॉइड पर नजर रखता है।

क्या होते हैं ऐस्टरॉइड?
आपको बता दें कि ऐस्टरॉइड वो बड़ी बड़ी अंतरिक्ष चट्टाने होती हैं जो किसी ग्रह की तरह हीं सूर्य कापरिक्रमा करती हैं लेकिन इनका आकार काफी छोटा है। लेकिन अगर ये ऐस्टरॉइड किसी ग्रह सेटकरा जाएं तो वहां भूचाल आ जाता है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि हमारे गैलेक्सी में ज्यादातरऐस्टरॉइड मंगल और बृहस्पति की कक्षा में पाए जाते हैं, वहीं कई ऐस्टरॉइड दूसरे ग्रहों की कक्षा में भीपाए जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब साढ़े 4 अब साल पहले जब हमारे गैलेक्सी का निर्माणहुआ था तब गैस और धूल की वजह से ऐसे बादल, जो किसी कारणवस कोई ग्रह नहीं बन सके, वोकालांतर में क्षुद्रगह बन गये। ऐस्टरॉइड साधारणतया गोल नहीं होते हैं और इसका आकार किसी भी तरह का हो सकता है।

साइबेरिया में टकराया था ऐस्टरॉइड
आपको बता दें कि 30 जून 1908 में रूस के साइबेरिया में तुंगुस्का नदी के पास एक बहुत बड़ाविस्फोट था। नासा के मुताबिक, आधुनिक इतिहास में पृथ्वी के वायुमंडल में एक बड़े उल्कापिंड का पहला प्रवेश तुंगुस्का घटना के रूप में ही हुआ था। कहते हैं कि कई मील उपर हवा में जोरदार विस्फोट हुआ था और उस विस्फोट की ताकत इतनी थी, कि 2,150 वर्ग किमी के क्षेत्र में तकरीबन 8 करोड़ पेड़ खत्म हो गए थे। नासा का कहना है कि उस दिन एक उल्कापिंड साइबेरिया के एकदूरदराज के हिस्से से टकराया था, लेकिन जमीन पर नहीं पहुंचा था। बताया जाता है कि उल्का पिंड में हवा में ही विस्फोट हो गया और सैकड़ों मील चौड़े क्षेत्र में पेड़ों पर कहर बन कर टूटा। इस विस्फोट में हजारों जंगली जानवर भी मारे गए थे। वैज्ञानिकों का कहना था कि अगर वो ऐस्टरॉइड आबादी वाले इलाके में गिरता, तो हजारों लोगों की जान जा सकती थी।
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