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Asim Munir Speech: 'हम हिन्दुओं से अलग, कलमे की बुनियाद पर बना पाकिस्तान': पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर

Asim Munir Speech: अपनी ठोकर से सबक न सीखना यूं तो एक मुहावरा है लेकिन इसके उदाहरणों की लिस्ट बनाई जाए तो पाकिस्तान उसमें टॉप पर रहेगा। आतंकवाद को सालों-साल पालने और उसी आग में कई बार झुलसने के बाद भी जब पाकिस्तान का मन नहीं भरा तो वह नए किस्म का जहर लेकर एक बार फिर दुनिया के सामने पेश हुआ है। ये वही पाकिस्तान है जब 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के लौटने पर उसे गुड तालिबान (Good Taliban) बताया था और जब उसी तालिबान ने पाकिस्तान पर हमले करना शुरू किए तो फिर उसे ही बैड तालिबान (Bad Taliban)कहने लगा। खैर, अब पाकिस्तान एक नई बीमारी के साथ कमबैक करना चाहता है। ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ आसिम मुनीर (Chief of Army Staff Pakistan Major General Asim Munir) का बयान कह रहा है।


ओछी सोच से उठने के बजाय नीचे लुढ़कता पाक

भारत के प्रति दुश्मनी इतनी बढ़ गई है कि यह भावी पीढ़ियों में भी फैल रही है, और उनमें धार्मिक जहर घोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। यह चिंता पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की हालिया टिप्पणियों से और बढ़ गई है, जिन्होंने एक बार फिर अपनी जुबान से ज़हर उगला है, जिससे पाकिस्तान के भविष्य के वैचारिक रुख में बदलाव की उम्मीदें और कम हो गई हैं।

Asim Munir Speech

हम हर पहलुओं में हिन्दुओं से अलग- पाक आर्मी चीफ

इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन में पाकिस्तानियों की एक सभा को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर ने बच्चों को पाकिस्तान की कहानी सुनाने के महत्व पर जोर दिया ताकि वे अपनी विरासत को कभी न भूलें। उन्होंने स्पष्ट किया, "हमारे पूर्वजों ने सोचा था कि हम जीवन के हर पहलू में हिंदुओं से अलग हैं। हमारे धर्म, रीति-रिवाज, परंपराएं, सोच और महत्वाकांक्षाएं सभी अलग हैं। यह दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव थी (Two Nation Theory)।" उनके भाषण ने एक अलग पाकिस्तानी पहचान बनाए रखने की कथित आवश्यकता को अंडरलाइन कर बता दिया कि इस्लामिक देश होने के बावजूद जिन्ना के जिस पाकिस्तान में सभी धर्मों के लोगों के लिए जगह थी वह जिन्ना के गुजरने के साथ ही गुजर चुकी है।

पाकिस्तान की मदीना से तुलना

जनरल मुनीर का ये बयान, जिसमें कहा गया, "आज तक, मानव जाति के इतिहास में केवल दो राज्य धर्म के आधार पर स्थापित किए गए थे। पहला मदीना था, और 1300 वर्षों के बाद, दूसरा हमारा देश (पाकिस्तान) है।" यह तुलना पाकिस्तान के निर्माण को ऐतिहासिक रूप से बेहद जरूरी मजहबी आधार के रूप में पेश करती है, जो पाकिस्तान और भारत के बीच वैचारिक विभाजन को और मजबूत करती है।


तानाशाही के ऊपर लोकतंत्र का घूंघट

जनरल मुनीर द्वारा अपनी बयानबाजी में सीमाओं को लांघने का यह पहला मामला नहीं है। उनकी भाषा मानवाधिकारों और लोकतंत्र आए दिन धज्जियां उड़ाती रहती है, जो पाकिस्तान की बर्बाद होती संस्कृति में भी आपको दिख सकती है, जहां सेना ने बार-बार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ कर सत्ता की कमान अपने हाथ में रखी है। अंदर भले ही तानाशाही भरी हो लेकिन घूंघट लोकतंत्र के दिखावे का ही ओड़ रखा है।


आतंकवाद बहाना- बलूचियों पर निशाना

इससे ठीक एक महीने पहले, 18 मार्च को, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने पाकिस्तान को एक "कठोर राज्य" में बदलने की जरूरत बताने के साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को देश के "अस्तित्व" की लड़ाई घोषित किया। यह बयान बलूच विद्रोहियों द्वारा एक यात्री ट्रेन को अपहरण करने के तुरंत बाद आया, जिसमें 25 लोग मारे गए थे। यह घटना पाकिस्तान के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों और उनसे निपटने में सेना के रोल को उजागर करती है।


अतीत की रेत में पाकिस्तान का सिर

आसान भाषा में समझें तो पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व दुश्मनी और विभाजन से भरी कहानी का प्रचार करता रहा है, जो वहां की आवाम में शांति और समझ को बढ़ावा देने के बजाय धार्मिक उन्माद की ओर धकेलता है। जनरल मुनीर के इस तरह के बयान न केवल एक पुरानी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पाकिस्तान में भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक निराशाजनक सवेरे को जन्म देते हैं, जो अधिक आगे बढ़ने के बजाय अतीत के रेत में सिर धंसा कर रहता है। पाकिस्तान के मामले में ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि ठोकर खाने के बाद ठोकर ही सुधर जाए तो ठीक है क्योंकि पाकिस्तान तो सुधरने से रहा।

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