मैरीलैंड में लेफ्टिनेंट गवर्नर बनकर इतिहास रचने वाली अरुणा मिलर कौन हैं? गीता पर हाथ रखकर ली शपथ
अरुणा पेशे से कैरियर ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियर हैं। उन्होंने 25 साल तक मैरीलैंड के ट्रांसपोर्टेशन डिपार्टमेंट में काम किया है। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक उनके पिता भी एक मैकेनिकल इंजीनियर थे।

File Image: PTI
भारतवंशी अरुणा मिलर ने अमेरिका में इतिहास रच दिया है। वे अमेरिका के मैरीलैंड राज्य की पहली भारतीय-अमेरिकन लेफ्टिनेंट गवर्नर बन गई हैं। मिलर ने भगवत गीता पर हाथ रखकर राज्य के 10वें लेफ्टिनेंट गर्वनर के रूप में शपथ ली और पद संभाला। 58 वर्षीय अरुणा का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। वे सात साल की उम्र में 1972 में अपने परिवार के साथ अमेरिका गई थीं। उन्हें साल 2000 में अमेरिका की नागरिकता मिली थी।
अरुणा पेशे से कैरियर ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियर हैं। उन्होंने 25 साल तक मैरीलैंड के ट्रांसपोर्टेशन डिपार्टमेंट में काम किया है। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक उनके पिता भी एक मैकेनिकल इंजीनियर थे और 1960 के दशक में अमेरिका गए थे। 1972 में वे अपनी पत्नी और 3 बच्चों को भी अमेरिका ले गए थे। उस समय अरुणा 7 साल की थीं। मिलर 2010 से 2018 तक मैरीलैंड हाउस ऑफ डेलिगेट्स में रही हैं। यहां उन्होंने अपने 2 कार्यकाल पूरे किए हैं।
अपने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भावुक मिलर ने भारत से अपने आगमन की कहानी साझा की और अपने स्कूल के अविस्मरणीय पहले दिन का विशेष उल्लेख किया। मिलन ने कहा कि उनमें से कोई भी मेरे जैसा नहीं दिखता था। इसके साथ ही मैं अंग्रेजी का एक शब्द तक नहीं बोल पाती थी। लेकिन मैं फिट होना चाहती थी। इसलिए मैंने सोचा कि जैसा बाकी बच्चे करेंगे, मैं भी ठीक वैसा ही करुंगी।
अरुणा ने आगे बताया मैंने उस दिन कैंटीन में पहली बार अमेरिकी खाना खाया और ठंडा दूध पीया। पहले मुझे सब ठीक लग रहा था लेकिन क्लास में पहुंचते ही मुझे उल्टी हो गई। इसके बाद मेरी मां मुझे स्कूल से घर ले गईं। मैंने अपनी मां से कहा कि मुझे वापस अपनी दादी के पास भारत जाना है। बड़े होने पर मुझे समझ आया कि दूसरों के बनाए स्पेस में मुझे फिट होने की कोई जरूरत नहीं है। बल्कि जरूरी यह है कि मैं हर जगह वैसी ही रहूं जैसी सच में मैं हूं। अरुणा ने शपथ के बाद स्पीच में सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया। मिलर की जीत मैरीलैंड राज्य में भारतीय अमेरिकियों के बीच उनकी लोकप्रियता के कारण भी है। उन्होंने कई रिपब्लिकन, समर्थक-ट्रम्प समर्थन में आगे आए।












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