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Explainer: ईरान को मिल सकती है बड़ी जियो-पॉलिटिकल जीत, कई इस्लामिक देशों ने बढ़ाए दोस्ती के हाथ

Iran Diploamecy Explainer: अमेरिका से जारी तनाव के बीच ईरान ने सऊदी अरब के साथ संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाकर बाइडेन प्रशासन को हैरान कर दिया था और सऊदी से मेल- मिलाप के बाद, ईरान के लिए कई बड़े इस्लामिक देशों तक पहुंचने और रिश्तों को सामान्य करने का दरवाजा खुल गया है।

तेहरान ने कई अन्य इस्लामिक देशों के साथ संबंध सामान्य किए हैं, और इस वक्त ईरान के साथ साथ कुछ और इस्लामिक देश, मध्य-पूर्व क्षेत्र को स्थिर करने और तनाव कम करने में मदद के लिए बदलाव करने के प्रयास कर रहे हैं, जो एक बहुत बड़ी जियो-पॉलिटिकल घटना है।

Iran Diploamecy Explainer

तो, किसने हाल ही में ईरान के साथ औपचारिक संबंध फिर से स्थापित कर लिए हैं, तेहरान और रियाद के बीच बातचीत का नया दौर किस दिशा में जा रहा है और संबंधों को सुधारने दिशा में, और कौन-कौन से देश सऊदी अरब के रास्ते पर चल सकते हैं और ईरान के साथ संबंध को सामान्य कर सकते हैं? आइये जानते हैं।

कुछ देश ईरान से बात क्यों नहीं कर रहे थे?

जब ईरान और सऊदी अरब ने राजनयिक संबंध तोड़ दिए, तो इसका नतीजा इन दोनों देशों की सीमाओं से बाहर भी फैल गया। कई अरब देशों ने भी तेहरान के साथ संबंध तोड़ दिए, साथ ही कुछ अफ्रीकी राज्यों ने भी, जिन्होंने सऊदी की विदेश नीति के रास्ते पर चलने का दांव लगाया।

जिबूती, सूडान और मालदीव कुछ ऐसे देश थे, जिन्होंने रियाद के समर्थन में खुद को ईरान से दूर कर लिया।

लेकिन, अब तेहरान-रियाद के बीच फिर से संबंध बनने की वजह से, ईरान और अरब पड़ोसियों के बीच फिर से संपर्क हो गया और ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने, संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर न्यूयॉर्क में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव जसेम मोहम्मद अल्बुदैवी के साथ बैठक की।

दोनों देशों के इंगेजमेंट ने एक तरफ यमन में ईरान-गठबंधन हूती आंदोलन और दूसरी तरफ सऊदी अरब और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के बीच बातचीत को प्रेरित किया, और सीरिया को अरब लीग में फिर से शामिल होने में मदद की है।

हालांकि, मिस्र के लिए हालात अधिक जटिल थे, जिसका 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद से, जिसने आखिरी शाह को अपदस्थ कर दिया था, ईरान के साथ रिश्ते ख़राब रहे हैं।

तत्कालीन मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात ने, तेहरान से भागे शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को शरण दी थी और वह 1980 में अपनी मृत्यु तक काहिरा में रहे। वहीं, इसके बाद मिस्र ने इज़राइल को मान्यता दी, जिसकी वजह से ईरान और मिस्र के बीच के संबंध और भी ज्यादा खराब हो गये।

मोरक्को ने, अपनी ओर से, 2018 में कहा था, कि वह पोलिसारियो फ्रंट के नाम से जाने जाने वाले पश्चिमी सहारन फ्रीडम मूवमेंट के कथित समर्थन को लेकर, तेहरान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ देगा।

वहीं, साल 1980 के बंधक संकट के बाद से, संयुक्त राज्य अमेरिका के ईरान के साथ कोई औपचारिक संबंध नहीं हैं, और कनाडा ने ईरानी राज्य पर "दुनिया में वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण खतरा" होने का आरोप लगाने के बाद 2012 में ईरान से अपने संबंध तोड़ दिए।

कुल मिलाकर, ईरान दुनियाभर में अलग-थलग पड़ गया।

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ईरान के फिर से कैसे बनने लगे संबंध?

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के मौके पर, ईरानी अधिकारियों को क्षेत्र और उससे बाहर के अपने समकक्षों के साथ बैठने का एक अच्छा मौका प्रदान किया गया। इस दौरान ईरान ने कई वैश्विक खिलाड़ियों के साथ डायरेक्ट बातचीत की और उनकी ये बातचीत कामयाब होती दिख रही है और इस दौरान, ईरान के कम से कम दो देशों के साथ संबंध बहाल हुए हैं।

ईरान के विदेश मंत्री, अमीर-अब्दुल्लाहियन ने गुरुवार को जिबूती के शीर्ष राजनयिक महमूद अली यूसुफ से मुलाकात की और उन्होंने संबंधों को फिर से स्थापित करने की घोषणा की।

इसके ठीक एक दिन बाद, अमीर-अब्दुल्लाहियन ने मालदीव के विदेश मंत्री अहमद खलील के साथ बैठक की और दोनों ने घोषणा की, कि दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध फिर से शुरू होंगे।

ईरान को ये दोनों सफलताएं, इस साल चीन की मध्यस्थता में सऊदी अरब के साथ संबंधों को फिर से बहाल करने के बाद हासिल हुए हैं।

आपको बता दें, कि साल 2016 में शिया बहुल सऊदी अरब में एक प्रमुख शिया धार्मिक नेता को फांसी दिए जाने के बाद ईरान में सऊदी अरब के दूतावास पर प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया था, जिसके बाद सऊदी ने ईरान के साथ सभी तरह के संबंध तोड़ लिए थे।

सऊदी-ईरान संबंध किस दिशा में आगे बढ़ रहे?

ईरान और सऊदी अरब, जिन्होंने पहली बार 2021 में इराकी मध्यस्थता के साथ सीधे बातचीत फिर से शुरू की, दोनों ने प्रशंसा की है, कि उनका मेल-मिलाप अच्छा चल रहा है। दोनों क्षेत्रीय दिग्गजों ने, इस महीने की शुरुआत में राजदूतों का आदान-प्रदान किया और समझौते के बाद से वे लगातार नियमित संपर्क में हैं।

ईरान का कहना है कि राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने रियाद की यात्रा के लिए सऊदी नेताओं के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, जो निकट भविष्य में एक महत्वपूर्ण यात्रा होने की उम्मीद है।

तेहरान, जिसने इस सप्ताह की शुरुआत में सऊदी राजशाही को उसके राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर बधाई दी थी, उसने सऊदी नेताओं को तेहरान की यात्रा के लिए निमंत्रण भी दिया है।

दोनों देशों के विदेश मंत्री, इस सप्ताह 78वीं यूएनजीए बैठक से इतर मिले और हवाई और समुद्री परिवहन सहित द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और तेहरान द्वारा क्रिस्टियानो रोनाल्डो और अन्य फुटबॉल सितारों की मेजबानी के बाद ज्यादा से ज्यादा खेलों के आयोजनों को लेकर चर्चा की।

ईरानी विदेश मंत्री अमीर-अब्दुल्लाहियन ने सऊदी मुख्य राजनयिक प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से कहा, कि ईरान एक व्यापक द्विपक्षीय सहयोग समझौते का मसौदा तैयार करने और उस पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है, जैसा कि अगस्त में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ पूर्व की बैठक के दौरान चर्चा की गई थी।

यानि, दोनों देशों के बीच के संबंध आने वाले दिनों में और भी ज्यादा सामान्य होंगे और सालों के बाद बन रहे संबंधों में फिलहाल देखी जानी वाली हिचकिचाहट, धीरे धीरे दूर होती चली जाएगी।

अब ईरान से और कौन बात कर रहा है?

सऊदी अरब के साथ दोबारा जुड़ने के बाद ईरान और मिस्र के बीच सफल मेल-मिलाप संभवत: सबसे बड़ा राजनयिक सौदा साबित होगा।

पिछले करीब दो वर्षों से, ईरान और इराक .. ओमान की मध्यस्थता में गंभीर स्तर पर बातचीत कर रहे हैं और माना जा रहा है, कि दोनों देश जल्द राजनियक गठबंधन का ऐलान करने वाले हैं।

वहीं, मिस्र के साथ भी ईरान की बातचीत चल रही है और आने वाले महीनों में इस बातचीत के सफल रहने की संभावना है।

हाल ही में, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने न्यूयॉर्क में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, कि देशों के विदेश मंत्रियों के बीच नवीनतम बैठक से द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है और तेहरान को "मिस्र के साथ संबंध स्थापित करने में कोई बाधा नहीं दिखती"।

दूसरी तरफ, जॉर्डन और ईरान भी बात कर रहे हैं, हालांकि, उनकी बातचीत को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं है और फिलहाल ऐसा नहीं लग रहा है, कि उनकी बातचीत एडवांस फेज तक पहुंची है, क्योंकि अमेरिकी विदेशी सहायता के सबसे बड़े प्राप्तकर्ताओं में से एक, जॉर्डन का, इज़राइल और सीरिया को अपने नरम रवैये को लेकर ईरान के साथ समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

वहीं, ईरान, सूडान और मोरक्को के साथ भी अपने क्षितिज का विस्तार करना चाह रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अमीर-अब्दुल्लाहियन ने उम्मीद जताई है कि औपचारिक संबंध फिर से स्थापित हो सकते हैं।

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