दलाई लामा के प्रतिनिधि से अमेरिकी विदेश मंत्री ने की मुलाकात, नई दिल्ली में बैठक से भड़का चीन
अमेरिका के विदेश मंत्री ने दलाई लामा के प्रतिनिधि से नई दिल्ली में अहम मुलाकात की है, जिससे चीन का भड़कना तय माना जा रहा है।
नई दिल्ली, जुलाई 28: अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भारत के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने दलाई लामा के प्रतिनिधि से मुलाकात की है, जिसके बाद चीन का भड़कना तय माना जा रहा है। बुधवार को नई दिल्ली में तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के एक प्रतिनिधि से अमेरिकी विदेश मंत्री ने मुलाकात की है। नई दिल्ली में दलाई लामा के प्रतिनिधि के साथ सिविल सोसाइटी के भी कुछ सदस्य शामिल थे।

दलाई लामा के प्रतिनिधि से मुलाकात
दलाई लामा के प्रतिनिधि से मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के ट्विटर पेज पर मुलाकात की कई तस्वीरों को साझा किया गया है। जिससे पता चला है कि उनसे दलाई लामा के प्रतिनिधि न्गोडुप डोंगचुंग ने मुलाकात की है, जो केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं, और जिन्हें निर्वासित तिब्बत सरकार माना जाता है। उनके प्रवक्ता ने मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने सेन्ट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन यानि सीटीए, जिसे तिब्बत की निर्वासित सरकार के तौर पर भी जाना जाता है, उनसे मुलाकात की है।

1950 में तिब्बत पर कब्जा
आपको बता दें कि 1950 में चीनी सैनिकों ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था, जिसे वो बीजिंग "शांतिपूर्ण मुक्ति" कहता है। 1959 में चीनी शासन के खिलाफ एक असफल विद्रोह के बाद दलाई लामा भारत में आ गये और तिब्बत की निर्वासित सरकार भारत से ही चलने लगी। वहीं, पिछले कुछ सालों से तिब्बत की निर्वासित सरकार को वैश्विक समर्थन में इजाफा मिला है और चीन के द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को लेकर उसकी काफी आलोचना की जाती है। खासकर चीन ने अब खुलकर तिब्बत की निर्वासित सरकार और सीटीए का समर्थन करना शुरू कर दिया है और उसी का एक हिस्सा एंटनी ब्लिंकन का तिब्बती प्रतिनिधि से मुलाकात है।

अमेरिका का मिला साथ
आपको बता दें कि नवंबर में तिब्बत की निर्वासित सरकार के पूर्व प्रमुख लोबसंग सांगे ने व्हाइट हाउस का दौरा किया था, जो छह दशकों में इस तरह की पहली यात्रा थी। इसके एक महीने बाद ही अमेरिकी कांग्रेस ने ''तिब्बत नीति और समर्थन अधिनियम'' पारित कर दिया था। जो दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुनने के लिए तिब्बतियों के अधिकार और तिब्बत की राजधानी ल्हासा में एक अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की स्थापना की मांग करता है। अमेरिका के इस घोषणा के बाद चीन काफी भड़क गया था और चेतावनी देते हुए उसे तिब्बत से दूर रहने के लिए कहा था।

गुस्से में भड़केगा चीन
वहीं, दलाई लामा की 2016 में वाशिंगटन में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात के बाद से डोंगचुंग के साथ एंटनी ब्लिंकन की मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने फिलहाल प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। बीजिंग का कहना है कि तिब्बत चीन का हिस्सा है और उसने दलाई लामा को खतरनाक अलगाववादी करार दिया है।












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