ममता बनर्जी अब कहां से लाएंगी पैसा? TMC के 1000 करोड़ वाले 12 बैंक अकाउंट फ्रीज, क्या है पूरा मामला?
TMC Bank Accounts Freeze: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ आ गया है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 12 और बैंक खातों को पश्चिम बंगाल पुलिस ने फ्रीज कर दिया है। इसके साथ ही अब तक पार्टी के कुल 15 बैंक खातों पर रोक लग चुकी है, जिनमें करीब 1000 करोड़ रुपये जमा होने का दावा किया जा रहा है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब एक दिन पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने तीन खातों से सीमित लेनदेन की इजाजत दी थी। दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उन्हीं खातों को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत फ्रीज कर रखा है।

क्यों बढ़ा TMC का बैंक अकाउंट विवाद?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिन 12 नए खातों पर रोक लगी है, वे अलग-अलग सरकारी और निजी बैंकों में हैं। जांच एजेंसियां अब खाताधारकों (अकाउंट होल्डर) की जानकारी और इन खातों में हुए वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इन खातों में जमा रकम का सोर्स क्या है और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
हाई कोर्ट ने तीन खातों पर क्या राहत दी?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC को HDFC बैंक के तीन खातों का सीमित इस्तेमाल करने की अंतरिम अनुमति दी। अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया है, जिनकी निगरानी में 30 सितंबर तक इन खातों से केवल रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्च, कर्मचारियों के वेतन और कानूनी खर्च का भुगतान किया जा सकेगा।
हर चेक पर विशेष अधिकारी के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। अदालत ने उनके लिए हर महीने 1.25 लाख रुपये मानदेय भी तय किया है, जिसका भुगतान पार्टी फंड से होगा।
ED की एंट्री: ₹440 करोड़ पर डबल लॉक क्यों लगा?
हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी ममता बनर्जी की पार्टी इन पैसों को छू नहीं पा रही है। इसकी वजह यह है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उन्हीं तीन HDFC खातों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत रोक लगा रखी है, जिनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं।
ईडी का यह एक्शन एक प्राइवेट एविएशन कंपनी से जुड़े 160 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग केस को लेकर है। यह मामला एक एम्ब्रेयर बिजनेस जेट और अगस्ता हेलीकॉप्टर की खरीद से जुड़ा हुआ है।
पार्टी के भीतर विवाद से कैसे शुरू हुआ मामला?
विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद टीएमसी के ही बागी विधायकों और नेताओं के एक गुट ने मोर्चा खोल दिया था। इस बागी गुट ने बैंकों से शिकायत की कि संगठन के भीतर गंभीर विवाद चल रहा है, इसलिए पार्टी के खातों से लेन-देन पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सिर्फ इतना ही नहीं बागियों ने बिधाननगर पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट में जाकर इन पैसों के सोर्स पर भी सवाल उठाए और जांच की मांग की। इसी शिकायत के अगले ही दिन पुलिस ने FIR दर्ज करके खातों को फ्रीज करने का सिलसिला शुरू कर दिया।
अब हाई कोर्ट में क्या होगा?
ED की कार्रवाई को चुनौती देते हुए TMC ने शुक्रवार (10 जुलाई) को फिर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने जस्टिस कृष्णा राव के सामने जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि पहले का आदेश केवल पुलिस की कार्रवाई से जुड़ा था, जबकि नई याचिका ED की कार्रवाई को चुनौती देती है। अदालत इस मामले पर सोमवार को सुनवाई करेगी।
फिलहाल राजनीतिक लड़ाई अब अदालत और जांच एजेंसियों के बीच कानूनी मोड़ ले चुकी है। एक तरफ पुलिस और ED फंड के सोर्स की जांच कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर TMC अदालत से अपने खातों तक पूरी पहुंच हासिल करने की कोशिश में जुटी है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट की सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।














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