'वैक्सीन की दो खुराक ले चुके लोगों को फिलहाल बूस्टर डोज की जरूरत नहीं'
अमेरिकी एजेंसियों ने कहा कि बूस्टर डोज देने का फैसला अकेले वैक्सीन निर्माता कंपनियां नहीं कर सकतीं।
वाशिंगटन, 9 जुलाई: कोरोना वायरस के खिलाफ ज्यादा प्रभावी एंटीबॉडी देने की बात कहते हुए जहां वैक्सीन निर्माता कंपनी फाइजर ने तीसरी डोज की अनुमति मांगी है, वहीं अमेरिका की दो शीर्ष फेडरल एजेंसियों ने कहा है कि फिलहाल इसकी जरूरत नहीं है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका में जो लोग कोरोना वायरस वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं, उन्हें अभी बूस्टर डोज की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही दोनों एजेंसियों ने अपने बयान में यह भी कहा कि बूस्टर डोज देने का फैसला अकेले वैक्सीन निर्माता कंपनियां नहीं कर सकतीं।

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आपको बता दें कि दवा निर्माता कंपनी फाइजर और उसकी पार्टनर बायोएनटेक ने गुरुवार को कहा कि कोरोना वायरस के अलग-अलग वेरिएंट के खिलाफ ज्यादा प्रभावी एंटीबॉडी देने के लिए वो एक तीसरी डोज तैयार करने के प्रयास में लगे हैं। कंपनी ने कहा, 'ऐसे कुछ साक्ष्य सामने आए हैं, जिनमें वैक्सीन लेने के बाद बनी एंटीबॉडी कमजोर पड़ रही है। वैक्सीन की हमारी बूस्टर डोज कोरोना वायरस के खिलाफ कितनी असरदार होगी, इस बारे में और ज्यादा आंकड़े जारी करने के बाद हम अगस्त में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से इस तीसरी डोज के इस्तेमाल की मंजूरी मांगेंगे।'
'6 महीने बाद वैक्सीन के असर में गिरावट'
सीएनएन की खबर के मुताबिक, फाइजर ने अपने बयान में कहा, 'हाल ही में इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो आंकड़े जारी किए, उनमें यह बात सामने आई कि वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के 6 महीने बाद कोरोना का संक्रमण और हल्के लक्षण वाली बीमारी रोकने में टीके के असर में गिरावट आई है, हालांकि गंभीर बीमारियों से बचाने में टीका अभी भी असरदार बना हुआ है। ऐसे में हमारा विश्वास है कि वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद 6 से 12 महीने के भीतर अगर बूस्टर डोज ली जाए, तो कोरोना से सुरक्षा का स्तर भी कई गुना बढ़ जाएगा।'












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