America Iran War: ईरान के किन पावर प्लांट को निशाना बना सकते हैं ट्रंप? 'बदले में ईरान देगा डबल झटका- एक्सपर्ट
America Iran War: ईरान में चल रही जंग के बीच अमेरिकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ने ईरान को सीधा अल्टीमेटम दिया है कि मंगलवार, 7 अप्रैल को रात 8 बजे (GMT) या 8 अप्रैल को आधी रात तक (भारतीय समय के मुताबिक 8 अप्रैल सुबह 5.30 बजे के करीब) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दिया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान के इलेक्ट्रिसिटी प्लांट और पुलों को नष्ट करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि ईरान में किन-किन जगहों को ट्रंप निशाना बना सकते हैं और किस-किस तरह की कार्रवाई कर सकते हैं।
हमला करेंगे ट्रंप या नहीं?
ये सवाल जब हमने डिफेंस एक्सपर्ट कमर आघा से पूछा तो उन्होंने बताया कि 'ये कहना मुश्किल है कि ट्रंप हमला करेंगे या नहीं, क्यों उनकी पॉलिसी अनप्रिडक्टेबल रही है। वे बातचीक के बीच अचानक हमला करने का आदेश देते हैं और फिर हमले के बीच खुद सीजफायर का ऐलान कर देते हैं लेकिन ईरान उनकी धमकी से डर कर स्ट्रेट ऑफ होर्मूज नहीं खोलेगा ये बात तय है। बर्बाद करना और लोगों को मारकर दूसरे देशों में अस्थिरता पैदा करने का अमेरिका का लंबा इतिहास है।'

ओमान के जरिए बातचीत
कमर आघा बताते हैं कि ओमान, ईरान और अमेरिका के बीच शांति कराने की कोशिश कर रहा है, अगर दोनों पक्षों में बात बन जाती है तो ये हमले टल भी सकते हैं। मगर, ट्रंप नहीं माने और हमले किए तो फिर ईरान अपने पास के खाड़ी देशों में एक भी इलेक्ट्रिसिटी प्लांट शायद न बचने दे। वह सऊदी, कतर, कुवैत, यूएई और इजरायल सभी पर हमले कर सकता है। ईरान सिर्फ इलेक्ट्रिसिटी प्लांट नहीं बल्कि वॉटर प्लांट तक को निशाना बना सकता है।
पहले भी दिया जा चुका है ऐसा अल्टीमेटम
यह धमकी नई नहीं है। इससे पहले 21 मार्च को भी ट्रंप ने ऐसा ही अल्टीमेटम दिया था, जिसमें कहा गया था कि अगर 48 घंटे के अंदर होर्मुज को नहीं खोला गया, तो ईरान के सबसे बड़े इलेक्ट्रिसिटी प्लांट्स पर हमला किया जाएगा। हालांकि, ट्रंप कई बार इस समय सीमा को बढ़ा चुके हैं। जिससे उनकी धमकियों को बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जा सकता लेकिन खतरा तो रहेगा ही।
आम लोगों पर हमला करवाएंगे ट्रंप?
एक्सपर्ट का कहना है कि नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना सामूहिक दंड के तहत आता है, जो अंतरराष्ट्रीय युद्ध कानूनों के मुताबिक क्राइम है। इसलिए ऐसे हमलों को लेकर वैश्विक स्तर पर भी बहस छिड़ गई है। वहीं पिछले सप्ताह, तेहरान के पश्चिम में स्थित काराज शहर के B1 पुल पर अमेरिकी-इजरायली हमले में भारी नुकसान हुआ था। जिसमें कुछ लोगों की मौत भी हुई थी। इसको लेकर भी ट्रंप पर अमेरिका के भीतर ही सवाल उठे हैं।
किन शहरों के प्लांट्स होंगे निशाने पर?
ईरान में सैकड़ों इलेक्ट्रिसिटी प्लांट्स या पावर हाउस हैं, जो मिलकर मिडिल ईस्ट में सबसे बड़े प्लांट्स में गिने जाते हैं। ये प्लांट्स करीब 9.2 करोड़ लोगों को बिजली सप्लाई करते है। जिनमें से ज्यादातर प्लांट्स बड़े शहरों और इंडस्ट्रियल इलाके में हैं, जैसे कि- तेहरान, मशहद और इस्फ़हान।
गैस आधारित प्लांट्स का दबदबा
ईरान के इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम में गैस, कोयला, जलविद्युत, न्यूक्लियर और तेल आधारित प्लांट शामिल हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी गैस बेस्ड प्लांट्स की है। ये खासकर देश के उत्तर और मध्य हिस्सों में स्थित हैं और बड़े शहरों को बिजली देते हैं। जिन्हें अमेरिका टारगेट करने की कोशिश कर सकता है। पर ये थोड़ा मुश्किल काम होगा।
खाड़ी के प्लांट, सबसे ज्यादा निशाने पर
ईरान के खाड़ी तट पर भी कई बड़े इलेक्ट्रिसिटी प्लांट मौजूद हैं। यही प्लांट अमेरिका और इजरायल के प्राइमरी टारगेट हो सकती हैं। साथ ही समुद्र किनारे स्थित ईरान का न्यूक्लियर पावर प्लांट बुशहर (1000 MW क्षमता) भी खतरे में है। ईरान की न्यूक्लियर एजेंसी AEOEI ने चेतावनी दी है कि अगर इस पर हमला हुआ, तो रेडियोएक्टिव पॉल्युशन ईरान की सीमाओं से बाहर निकलकर दूसरे देशों तक फैल सकता है। शायद इसीलिए अमेरिका इसे छोड़ दे।
गैस पर भारी निर्भरता
ईरान की बिजली व्यवस्था मुख्य रूप से नैचुरल गैस पर निर्भर है। 2025 में देश की 86% बिजली गैस से बनी थी। ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है, जो कि ईरान के एनर्जी सिस्टम की रीढ़ है। जबकि तेल आधारित प्लांट्स लगभग 7% बिजली पैदा करते हैं। जरूरत पड़ने पर, खासकर सर्दियों में 5% और न्यूक्लियर पावर के जरिए लगभग 2% बिजली मिलती है।

बांध पर भी हो सकते हैं हमले
ईरान कारुन नदी पर बने कई से भी बिजली पैदा करता है। यह बिजली नेशनल ग्रिड के जरिए पूरे देश में सप्लाई की जाती है, जिसे ईरान ग्रिड मैनेजमेंट कंपनी मैनेज करती है। अमेरिका और इजरायल इसे भी निशाने पर ले सकते हैं। इसके अलावा ईरान में 100 मेगावॉट या उससे ज्यादा क्षमता वाले कई बिजली स्टेशन हैं। एक 100 मेगावॉट प्लांट आमतौर पर 75,000 से 1,00,000 घरों को बिजली दे सकता है, जो इसकी बड़ी क्षमता को दर्शाता है।
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सबसे बड़ा पावर प्लांट: दमावंद
ईरान का सबसे बड़ा पावर प्लांट दमावंद है, जो तेहरान से करीब 50 किलोमीटर दूर पाकदश्त में स्थित है। इसकी क्षमता 2,900 MW है और यह 20 लाख से ज्यादा घरों को बिजली दे सकता है। देश के अन्य प्रमुख पावर प्लांट्स में दमावंद (2,868 MW), शहीद सलीमी (नेका, 2,215 MW) और शहीद राजावी (क़ज़्विन के पास, 2,043 MW) शामिल हैं। इसके अलावा, करुण-3 बांध (2,000 MW), केरमान पावर प्लांट (1,912 MW), रामिन (1,903 MW), बुशहर न्यूक्लियर (1,000 MW) और बंदर अब्बास (1,330 MW) जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण संयंत्र भी देश की बिजली व्यवस्था का हिस्सा हैं।
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