बांग्लादेश के खिलाफ US ने लगाया वीजा प्रतिबंध, भारत के पड़ोस में कट्टर इस्लामिक शासन लाकर रहेंगे बाइडेन?

US Visa Ban on Bangladesh Analysis: संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है, कि वह उन बांग्लादेशी नागरिकों पर वीज़ा प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठा रहा है, जो इस दक्षिण एशियाई राष्ट्र में आगामी लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं या उसे "कमजोर" कर रहे हैं।

बांग्लादेश में इस साल दिसंबर के अंत या अगले साल जनवरी में आम चुनाव होने की उम्मीद है।

शुक्रवार को की गई अमेरिकी घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, बांग्लादेश ने कहा है, कि वो अमेरिका के इस फैसले से हालांकि खुश नहीं है, लेकिन ढाका को कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह कुछ भी गलत नहीं कर रहा है।

US Visa Ban on Bangladesh Analysis

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने एक बयान में कहा है, कि "आज, (अमेरिकी) विदेश विभाग, बांग्लादेश में लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार या इसमें शामिल बांग्लादेशी व्यक्तियों पर वीजा प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठा रहा है।"

बयान में कहा गया है, कि "ये व्यक्ति और उनके तत्काल परिवार के सदस्य, संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश के लिए अयोग्य किए जा सकते हैं।"

अमेरिका के इस फैसले के बाद बांग्लादेश के कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सदस्य, सत्तारूढ़ अवामी लीग के नेता इस घेरे में आ सकते हैं। अमेरिका ने कहा है, कि वो बांग्लादेश में शांतिपूर्ण तरीके से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका की ये कोशिश बांग्लादेश को एक कट्टर इस्लामिक देश बनाकर रख देगा।

मिलर ने कहा, कि अमेरिकी कार्रवाई बांग्लादेश के शांतिपूर्ण ढंग से स्वतंत्र और निष्पक्ष राष्ट्रीय चुनाव कराने के लक्ष्य का समर्थन करने और वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के इच्छुक लोगों का समर्थन करने की अमेरिका की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नागरिक सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार के लिए अमेरिका की अवर सचिव उज़रा ज़ेया ने बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना से मुलाकात की और इस मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद एक्स, (पूर्व में ट्विटर) पर उन्होंने वीजा प्रतिबंधों की घोषणा की। शेख हसीना इस वक्त न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक में शामिल होने के लिए गई हैं।

ढाका में अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ब्रायन शिलर ने कहा, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अब तक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कुछ सदस्यों, सत्तारूढ़ पार्टी के अधिकारियों और विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ वीजा प्रतिबंध लागू कर दिया है।

उन्होंने कहा, कि अमेरिका द्वारा व्यक्तियों के खिलाफ सबूतों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने के बाद प्रतिबंध लगाए गए है।

हालांकि, इस लिस्ट में कौन कौन अधिकारी या नेता हैं, फिलहाल अमेरिका की तरफ से इसकी घोषणा नहीं की गई है।

बांग्लादेश ने कहा- नहीं पड़ेगा कोई फर्क

अमेरिकी वीजा प्रतिबंधों की घोषणा के कुछ घंटों बाद, एक मीडिया ब्रीफिंग में बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री शहरयार आलम ने कहा, कि उनके देश के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा, "हमारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है, हमें इसकी चिंता नहीं है, क्योंकि हम कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, ये डेवलपमेंट "सुखद अनुभव नहीं है" लेकिन "हमें इससे गुजरना होगा"। उन्होंने कहा, कि उन्हें उम्मीद है, कि अमेरिकी सरकार तथ्यों और आंकड़ों की निष्पक्ष तरीके से समीक्षा करने के बाद नई वीजा प्रतिबंध नीति लागू करेगी।

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री ने कहा, कि वाशिंगटन ने ढाका को उन व्यक्तियों की संख्या का अंदाजा दिया है जिन्हें वीजा प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, "मैं आपको जो बता सकता हूं वह यह है कि संख्या कम है।"

आलम ने कहा, कि बांग्लादेश सरकार का मानना है, कि बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके कट्टरपंथी सहयोगी जमात-ए-इस्लामी, अमेरिकी वीजा प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं, क्योंकि वे अगले चुनाव को विफल करने के उद्देश्य से किए गए कृत्यों में शामिल थे।

दूसरी तरफ, पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), चुनाव होने तक बांग्लादेश में एक कार्यवाहक सरकार बहाल करने के लिए अभियान चला रही है। बीएनपी का दावा है, कि शेख हसीना जब तक प्रधानमंत्री रहेंगी, बांग्लादेश में स्वतंत्र चुनाव नहीं हो सकते हैं।

बीएनपी और अन्य विपक्षी समूह, सत्तारूढ़ अवामी लीग पर हत्याओं और नेताओं को जबरन गायब करने और भ्रष्टाचार जैसे घोर अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हैं। हालांकि, सरकार ने बार-बार आरोपों से इनकार किया है।

अमेरिका ने पहले बांग्लादेश की मानवाधिकार स्थिति और राजनीतिक समावेशन पर सवाल उठाया था। पिछले साल, अमेरिका ने कथित न्यायेतर हत्याओं के आरोप में विशिष्ट अपराध विरोधी रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगा दिया था।

प्रधानमंत्री हसीना ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था, कि उनका मानना है कि अमेरिका नहीं चाहता कि उनकी सरकार सत्ता में बनी रहे।

उन्होंने यह भी संकेत दिया था, कि अमेरिका बंगाल की खाड़ी में सेंट मार्टिन द्वीप तक सैन्य पहुंच चाहता है, जिससे अमेरिकी विदेश विभाग ने इनकार किया है।

इस्लामिक कट्टरपंथ चाहता है अमेरिका?

भारतीय विदेश मामलों के जानकारों का कहना है, कि शेख हसीना सरकार ने कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी की नाक में नकेल कसकर रखा है और अगर शेख हसीना सत्ता से हटती हैं, तो बांग्लादेश चीन और पाकिस्तान के खेमे में चला जाएगा, जो भारत नहीं चाहता है।

भारत ने बांग्लादेश को लेकर अमेरिका से कई बार बातचीत की है, लेकिन ऐसा लगता है, कि बाइडेन प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा हुआ है।

दूसरी तरफ भारत सरकार, हर मंच पर शेख हसीना सरकार को आगे बढ़ा रही है। जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी भारत ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को आमंत्रित किया था और समिट के पहले ही दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।

साउथ ब्लॉक (भारत के विदेश मंत्रालय की सीट) का मानना है, कि अगर बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी को 'राजनीतिक रियायत' दी गई, तो निकट भविष्य में ढाका पर कट्टरवाद का कब्जा हो जाएगा। नई दिल्ली को लगता है, कि अगर बांग्लादेश में हसीना की सरकार कमजोर हुई, तो ये न तो भारत के लिए अच्छा होगा और न ही अमेरिका के लिए।

माना जाता है, कि अमेरिका हमेशा जमात को इस्लामिक राजनीतिक संगठन दिखाने की कोशिश करता रहा है। अमेरिका ने जमात की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की है, लेकिन हकीकत में, रिपोर्ट में कहा गया है, नई दिल्ली को इसमें कोई संदेह नहीं है, कि जमात कट्टरपंथी कट्टरपंथी संगठनों और पाकिस्तान के हाथों में है।

लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि बाइडेन प्रशासन की ये हरकत बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार को अस्थिर करने के लिए है और उसकी कोशिश, भारत के पड़ोस में एक और इस्लामिक कट्टरपंथी शासन स्थापित करने की है।

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