भारत से किस तरह की दोस्ती निभा रहा है अमेरिका? वैक्सीन बनाने के लिए नहीं दे रहा है रॉ-मैटेरियल

भारत को कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने के लिए रॉ मैटेरियल्स की जरूरत है लेकिन अमेरिका ने वैक्सीन बनाने का कच्चा सामान भारत को देने पर बैन लगा रखा है।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, अप्रैल 20: अमेरिका आखिर भारत से किस तरह की दोस्ती निभा रहा है? क्या सिर्फ चीन को घेरने तक के लिए ही अमेरिका भारत से दोस्ती रखना चाहता है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि भारत में वैक्सीन बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई अमेरिका ने रोक रखी है और वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा सामान देने के सवाल पर बार बार अमेरिकी अधिकारी कन्नी काटते नजर आते हैं। जब व्हाइट हाउस के प्रवक्ता से भारत के सीरम इंस्टीट्यूट को वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा माल देने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जबाव देने से साफ इनकार कर दिया।

अमेरिका की ये कैसी दोस्ती?

अमेरिका की ये कैसी दोस्ती?

अमेरिका के अड़ियल रवैये पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि अमेरिका भारत को अपना रणनीतिक दोस्त कहता है लेकिन इस वक्त जब पूरी दुनिया में कोरोना महामरी काल बनकर कहर बरपा रहा है और खुद भारत की इसकी चपेट में है, उस वक्त भी अमेरिका अपना सख्त रवैया छोड़ने को तैयार नहीं है। देखा जाए तो कोरोना महामारी के नाम पर दुनिया के सभी देश अपने अपने विवाद को परे रखकर एक दूसरे की मदद कर रहे हैं लेकिन अमेरिका भारत को वैक्सी बनाने का कच्चा सामान देने को तैयार नहीं हो रहा है। अमेरिका ने भारत को वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा माल देने पर रोक लगा दी है और बार बार अनुरोध के बाद भी वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा सामान देने से इनकार कर रहा है। ऐसे में अमेरिका की नीयत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

भारत के वैक्सीन प्रोग्राम पर असर

भारत के वैक्सीन प्रोग्राम पर असर

दुनिया में वैक्सीन बनाने वाला सबसे बड़ा देश भारत है और भारत ने महामारी के इस दौर में दुनिया के 92 देशों को वैक्सीन की सप्लाई की है। लेकिन, अब भारत में इतने बड़े पैमाने पर वैक्सीन बनाने के लिए कच्चे सामान की कमी पड़ रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर अमेरिकी रोक का गंभीर असर पड़ सकता है। भारत सरकार ने ऐलान किया है कि 1 मई से भारत में 18 साल की उम्र से ऊपर के हर शख्स को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी, जिसके लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीन की जरूरत पड़ने वाली है और अगर वैक्सीन का रॉ मैटेरियल नहीं होगा तो फिर भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर असर पड़ेगा। ऐसे में सवाल अमेरिका से भारत की दोस्ती पर उठ रहे हैं।

कन्नी काटते व्हाइट हाउस के अधिकारी

कन्नी काटते व्हाइट हाउस के अधिकारी

व्हाइट हाउस में सोमवार को अमेरिकी अधिकारियों से दो बार वैक्सीन के कच्चे माल को लेकर सवाल किया गया लेकिन दोनों ही बार अमेरिकी अधिकारियों ने सवाल का जबाव नहीं दिया। अमेरिका के प्रेस सचिव जेन पास्की से सोमवार को दो बार वैक्सीन के रॉ मैटेरियल को लेकर सवाल किया गया लेकिन दोनों ही बार प्रेस सचिव जेन पास्की ने सवाल का जबाव नहीं दिया। जेन पास्की से सोमवार को एक प्रेस रिपोर्टर ने पूछा कि 'भारत की सीरम इंस्टीट्यूट बार बार जो बाइडेन से वैक्सीन बनाने के लिए कच्चे सामान के निर्यात से प्रतिबंध हटाने की अपील कर रहा है, क्या अमेरिकी प्रशासन के पास सीरम इंस्टीट्यूट की अपील को लेकर कोई जबाव है? इस सवाल का जबाव देने से अमेरिका ने इनकार कर दिया।

पाउची के पास जबाव नहीं

पाउची के पास जबाव नहीं

अमेरिका में महामारी रोगों का सबसे बड़ा विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फाउची को माना जाता है। डॉ. एंथनी फाउची ने सबसे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोरोना महामारी को लेकर आगाह करना शुरू किया था और जब उन्होंने ध्यान नहीं देने के लिए ट्रंप की आलोचना करनी शुरू की थी तो डोनाल्ड ट्रंप ने उनके पद से उन्हें हटा दिया था। डॉ. एंथनी फाउची से भी भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन के कच्चे सामान को लेकर सवाल किया गया। जिसपर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा को लेकर भारत को धमकी तक देने वाला अमेरिका आखिर भारत को वैक्सीन का रॉ मैटेरियल क्यों नहीं दे रहा है?

अमेरिका के अलग-अलग बहाने

अमेरिका के अलग-अलग बहाने

भारत को वैक्सीन बनाने का कच्चा माल देने को लेकर अमेरिका बार बार बहाने बना रहा है जबकि सीरम इंस्टीट्यूट के प्रमुख अदार पूनावाला ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को ट्वीट कर अपील की थी भारत को वैक्सीन बनाने का रॉ-मैटेरियल दिया जाए। अमेरिका के साइंटिस्ट डॉ. एंडी स्लाविट ने वैक्सीन के रॉ मैटेरियल के सवाल पर कहा कि 'हम कोरोना महामारी को काफी गंभीरता से रहे हैं और अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ के कोवैक्स प्रोग्राम को काफी मदद दी है। हमने कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर अलग अलग देशों से कई द्विपक्षीय समझौते भी किए हैं। अभी हम जटिल मामलों को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और हम आपसे इस मुद्दे को लेकर बाद में बात करेंगे'

भारत की मुश्किलें

भारत की मुश्किलें

दरअसल, भारत में इस वक्त कोरोना वायरस के मरीज पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा आ रहे हैं और भारत ही पूरी दुनिया में वैक्सीन बनाने वाला सबसे बड़ा देश है, लेकिन भारत ने इस वक्त देश की खराब स्थिति को देखते हुए कोरोना वैक्सीन के निर्यात पर रोक लगा दी है। भारत को वैक्सीन बनाने के लिए काफी ज्यादा मात्रा में रॉ-मैटेरियल की जरूरत है। इसीलिए सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से वैक्सीन बनाने का कच्चा माल देने की अपील की थी, लेकिन अभी तक अमेरिका में भारत को वैक्सीन बनाने का कच्चा माल देने को लेकर विचार भी नहीं किया जा रहा है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा बनाई गई वैक्सीन कोविशील्ड को बना रही है, इसके साथ साथ सीरम के पास अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स की वैक्सीन को बनाने का भी लाइसेंस है, लेकिन दिक्कत ये है कि जब तक रॉ-मैटेरियल नहीं होगा तब तक वैक्सीन का उत्पादन नहीं हो सकता है। इसीलिए अमेरिका की दोस्ती पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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