Russia: चेचन्या से लेकर विरोधियों के सफाये तक.. व्लादिमीर पुतिन ने कैसे रूस में कायम किया निरंकुश शासन?

Vladimir Putin: रूस अपनी इसी रहस्यमयी राजनीति के लिए जाना जाता है, जहां अदृश्य निगाहें हर वक्त क्रेमलिन के दुश्मनों के खिलाफ मंडराती रहती हैं। पिछले साल अगस्त में वैगनर चीफ येवगेनि प्रिगोजिन की मौत और अब एलेक्सी नवलनी की मौत के बाद राष्ट्रपति पुतिन सवालों के घेरे में हैं।

आइये जानते हैं, कि राष्ट्रपति बनने और शासन चलाने के लिए पुतिन पर कितनी बेरहमी करने के आरोप लगे हैं।

Vladimir Putin

रहस्यमयी राष्ट्रपति हैं व्लादिमीर पुतिन

पुतिन अपनी जिंदगी को काफी ज्यादा रहस्यमयी रखते हैं। आजतक उनकी पत्नी, गर्लफ्रेंड या फिर बच्चों के बारे में किसी को ठीक-ठीक जानकारी नहीं है।

यही वजह है, कि पुतिन के बारे में जानने की दिलचस्पी हमेशा से लोगों को बनी रहती है। अब जब एलेक्सी नवलनी की भी रहस्यमयी मौत हो गई है, तो एक बार फिर पुतिन की कहानी याद आने लगी है, कि रूस का यह 'राजा' कैसे अपने विरोधियों और बगावत करने वालों को कुचलने के लिए कुख्यात रहा है।

रूस की जासूसी एजेंसी केजीबी, जो अपने सीक्रेट ऑपरेशंस की वजह से कुख्यात रही है, व्लादिमीर पुतिन उसके बॉस रह चुके हैं। लिहाजा, केजीबी के बॉस रहने से लेकर क्रेमलिन में उदय, यूक्रेन पर आक्रमण और एक एक कर तमाम विरोधियों को कुचलने के लिए व्लादिमीर पुतिन हमेशा से पश्चिमी देशों के निशाने पर रहे हैं।

अगस्त 1999 में, सोवियत संघ के पतन के बाद रूस के पहले राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने एफएसबी सुरक्षा सेवा (पूर्व नाम- केजीबी) के पूर्व प्रमुख व्लादिमीर पुतिन को अपना प्रधानमंत्री बना लिया।

पांच महीने से भी कम समय के बाद, राष्ट्रपति येल्तसिन ने शराब की लत और बीमारी की वजह से रूस की सत्ता को संभालने लायक नहीं रहे और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। जिसके बाद उनके उत्तराधिकारी बने व्लादिमीर पुतिन।

येल्तसिन के इस्तीफा देने के बाद पुतिन को रूस का कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया और उसके बाद उन्होंने मार्च 2000 के चुनाव में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर लोगों की मतों के आधार पर देश के राष्ट्रपति बने। जब साल 2000 में पुतिन, पहली बार राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे थे, उस वक्त उनके सबसे बड़े विरोधी और विपक्ष के उम्मीदवार जनरल अलेक्जेंडर लेबेड की चुनाव से ठीक पहले एक प्लेन दुर्घटना में मौत हो जाती है, जिससे पुतिन के सामने आने वाला एक दमदार राजनीतिक आवाज हमेशा के लिए खत्म हो जाता है और इस तरह से पुतिन, राष्ट्रपति बन जाते हैं।

चेचन्या में लगाया लाशों का ढेर

राष्ट्रपति बनने के शुरूआती समय में ही अगस्त 2000 में पहली बार पुतिन की परीक्षा आ गई, जब परमाणु ऊर्जा से चलने वाली रूस की एक पनडुब्बी कुर्स्क 118 चालक दल के सदस्यों के साथ बैरेंट्स सागर में डूब गई। इस आपदा पर पुतिन की मौन प्रतिक्रिया की भारी आलोचना की गई।

अक्टूबर 2002 में, चेचन विद्रोहियों ने मॉस्को में एक थियेटर पर हमला किया और उस वक्त फिल्म देख रहे 800 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया। इस घटना में 130 लोग मारे गये थे। इस घटना के ठीक दो साल बाद, उत्तरी ओसेशिया के उत्तरी काकेशस गणराज्य में बेसलान के एक स्कूल में बंदूकधारियों ने 1,000 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया। सुरक्षा बलों ने इमारत पर धावा बोल दिया, जिससे लड़ाई शुरू हो गई जिसमें 186 बच्चों सहित 330 लोग मारे गए थे।

जिसके बाद पुतिन ने चेतन्या विरोधियों को कुचलने का काम शुरू कर दिया।

थियेटर में खूनी खेल खेलने वाले चेचन्या विरोधियों को कुचलने के लिए पुतिन के आदेश पर रूसी सुरक्षा बल थियेटर के अंदर घुसे थे और सभी आतंकवादियों को मार गिराया था। हालांकि, इसमें 130 आम लोग मारे गये थे। इसके लिए पुतिन का भारी आलोचना की गई थी, लेकिन उन्होंने आतंकवादियों से कोई बात नहीं की।

रूस के उत्तरी काकेशस गणराज्य को चेचन्या कहा जाता है, जो मुस्लिम बहुल इलाका है और रूस 1994 से 96 के बीच यहां लड़ाई लड़ चुका है। जिसके बाद रूसी राष्ट्रपति ने चेचन्या के विद्रोहियों को कुचलने के लिए ऑपरेशन चलाया और साल 2009 तक चले दूसरे चेचन युद्ध में हजारों लोग मारे गये। रूस ने चेचन्या की राजधानी ग्रोज़नी को पूरी तरह से तबाह कर दिया। फिर पुतिन ने चेचन्या में एक कठपुतली सरकार की स्थापना की, जो आज तक उनका 'गुलाम' है।

रूस में पुतिन का क्रूर शासन

साल 2004 में दोबारा चुने जाने के बाद पुतिन ने सत्ता पर अपनी पकड़ पूरी तरह से मजबूत कर ली और सुरक्षा सेवाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुतिन ने रूसी मीडिया पर नकेल कस दिया। पुतिन अपने पहले कार्यकाल में ही सत्ता कैसे चलाना है, इसकी बारीकियां सीख गये थे।

दूसरी बार सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपने विरोधियों का सफाया करना शुरू कर दिया। उन्होंने रूस के सबसे अमीर शख्स मिखाइल खोदोरकोव्स्की जैसे कुलीन वर्गों को सत्ता से हमेशा के लिए हटा दिया गया। खोदोरकोव्स्की को तेल की दिग्गज कंपनी युकोस के सीईओ पद से हटा दिया गया और टैक्स धोखाधड़ी सहित कई आरोपों में 2005 में जेल में डाल दिया गया।

साल 2006 में, पत्रकार और शासन के प्रबल आलोचक अन्ना पोलितकोवस्काया की हत्या कर दी गई और लंदन में पूर्व रूसी जासूस अलेक्जेंडर लिट्विनेंको को घातक जहर देकर मार दिया गया। हालांकि, पुतिन ने इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जारी रखा, लिहाजा देश के अंदर जनता उनके शासन से खुश थी। आर्थिक मोर्च पर रूस अच्छा कर रहा था और इसकी सबसे बड़ी वजह तेल था।

विरोधियों पर लेस मात्र भी नरमी नहीं

साल 2015 में पुतिन के प्रमुख आलोचक और देश के पूर्व उप प्रधान मंत्री बोरिस नेमत्सोव को क्रेमलिन के बाहर गोली मार दी गई। वहीं, साल 2018 में, रूस के पूर्व डबल एजेंट सर्गेई स्क्रीपाल को इंग्लैंड में जहर देकर मार दिया गया।

Vladimir Putin

साल 2020 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने वाले रूस के विपक्षी नेता, एलेक्सी नवलनी को भी एक फ्लाइट में जहर दे दिया गया। वो फ्लाइट सरबिया से मॉस्को जा रही थी और बाद में जर्मनी के अस्पताल में नवेलनी को भर्ती कराया गया। हालांकि, नवेलनी करीब 6 महीने की इलाज के बाद ठीक हो गये और 2021 में वो वापस रूस लौट आए, लेकिन मॉस्को एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर उन्हें जेल में डाल दिया गया। इसके बाद से वो जेल में ही बंद थे और अब उनकी मौत हो गई है।

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