Albinder Dhindsa Net Worth: Zomato के नए CEO अल्बिंदर कितने करोड़ के मालिक? किस कॉलेज से की पढ़ाई?
Albinder Dhindsa Net Worth: जोमैटो की मूल कंपनी ईटर्नल को नया CEO मिल गया है। अल्बिंदर ढिंडसा ने अब आधिकारिक तौर पर यह जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने यह पद दीपेंद्र गोयल के CEO पद से हटने के बाद ग्रहण किया है। अल्बिंदर ढिंडसा को खास तौर पर ब्लिंकिट (पहले ग्रोफर्स) के सह-संस्थापक और CEO के रूप में जाना जाता है, जिसे उन्होंने भारत का एक बड़ा क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बना दिया।
कंपनी के लिए क्यों अहम है यह बदलाव
अल्बिंदर ढिंडसा की नियुक्ति भारत के सबसे बड़े कंज्यूमर टेक समूहों में से एक के लिए बड़ा नेतृत्व परिवर्तन मानी जा रही है। यह बदलाव अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक योजना का हिस्सा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम ईटर्नल के क्विक कॉमर्स और बेहतर एग्जीक्यूशन पर बढ़ते फोकस को दिखाता है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम के मजबूत लीडर
अल्बिंदर ढिंडसा भारत के जाने-माने उद्यमियों में गिने जाते हैं। उन्होंने ब्लिंकिट के फास्ट डिलीवरी मॉडल को मजबूत किया, जिसने भारत में इंस्टेंट किराना डिलीवरी का पूरा गेम बदल दिया। वे अपने सख्त ऑपरेशनल डिसिप्लिन, तेज फैसलों और रिज़ल्ट-ओरिएंटेड अप्रोच के लिए जाने जाते हैं।
ईटर्नल की इन-हाउस सक्सेशन प्लानिंग
ढिंडसा की पदोन्नति यह दिखाती है कि ईटर्नल ने इन-हाउस उत्तराधिकार योजना पर भरोसा किया है। वे पहले से ही जोमैटो इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हैं और ब्लिंकिट को वहीं से आगे बढ़ाया है। उनकी नियुक्ति यह संकेत देती है कि कंपनी कंटिन्यूटी के साथ ग्रोथ चाहती है, खासकर कॉमर्स-ड्रिवन बिजनेस में।
अब किन बिजनेस की होगी जिम्मेदारी
ईटर्नल के CEO के रूप में अल्बिंदर ढिंडसा अब जोमैटो और उससे जुड़े सभी बिजनेस की निगरानी करेंगे। इसमें फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स, और B2B सेवाएं शामिल हैं। वे अब कंपनी के रणनीतिक और परिचालन फैसलों के केंद्र में होंगे। बोर्ड को उनसे इन सभी सेक्टर्स में तेज़ और टिकाऊ ग्रोथ की उम्मीद है।
एक ब्रांड से ग्रुप-लेवल लीडर तक
फिलहाल ईटर्नल के तहत जोमैटो, ब्लिंकिट (क्विक कॉमर्स), हाइपरप्योर (B2B सप्लाई) और डिस्ट्रिक्ट (इवेंट्स प्लेटफॉर्म) जैसे बिजनेस आते हैं। अल्बिंदर ढिंडसा की भूमिका अब एक ब्रांड लीडर से बढ़कर पूरे ग्रुप की निगरानी तक पहुंच गई है। हालांकि, वे ब्लिंकिट में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
कितनी है अल्बिंदर ढिंडसा की संपत्ति?
अल्बिंदर ढिंडसा की कुल संपत्ति को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आते हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 500-600 करोड़ रुपये के आसपास है। वहीं, एक हालिया अनुमान इसे 9,020 करोड़ रुपये (करीब 1.1 बिलियन डॉलर) बताता है, जो ब्लिंकिट की ग्रोथ और जोमैटो द्वारा अधिग्रहण से जुड़ा है। 2022 में उनकी संपत्ति 568 मिलियन डॉलर आंकी गई थी। उनकी अधिकतर संपत्ति कैश नहीं बल्कि इक्विटी में निवेशित है।
पढ़ाई और प्रोफेशनल बैकग्राउंड
अल्बिंदर ढिंडसा ने IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने कोलंबिया बिजनेस स्कूल, न्यूयॉर्क से MBA किया। उद्यमिता में आने से पहले वे ट्रांसपोर्ट एनालिस्ट के तौर पर काम कर चुके हैं।
जोमैटो से ब्लिंकिट तक का सफर
जोमैटो में रहते हुए अल्बिंदर ढिंडसा ने कंपनी के इंटरनेशनल एक्सपेंशन का नेतृत्व किया। यहीं से उन्हें ग्रोफर्स (अब ब्लिंकिट) का आइडिया आया। उनकी पढ़ाई और प्रोफेशनल ट्रेनिंग ने उनकी एनालिटिकल और एग्जीक्यूशन-फोकस्ड लीडरशिप स्टाइल को आकार दिया।
उम्र कम, अनुभव ज्यादा
पब्लिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, अल्बिंदर ढिंडसा का जन्म लगभग 1982 में हुआ था। जनवरी 2026 तक उनकी उम्र करीब 43-44 साल मानी जाती है। कम उम्र के बावजूद उनके पास 10 साल से ज्यादा का स्टार्टअप लीडरशिप अनुभव है।
अनुभवी संस्थापकों की पीढ़ी से ताल्लुक
ढिंडसा उन भारतीय स्टार्टअप संस्थापकों की पीढ़ी से आते हैं, जिन्होंने तेजी से स्केल करने वाले बिजनेस खड़े किए। ईटर्नल के CEO के रूप में उनकी नियुक्ति उनके इसी लंबे और विविध अनुभव को दर्शाती है।
निजी जीवन और प्रोफेशनल रिश्ता
अल्बिंदर ढिंडसा की पत्नी आकृति चोपड़ा जोमैटो की सह-संस्थापक और पूर्व Chief People Officer रह चुकी हैं। उन्होंने 13 साल तक जोमैटो के निर्माण और ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। सितंबर 2024 में उन्होंने अन्य रुचियों के लिए कंपनी छोड़ी थी। यह फैसला ब्लिंकिट अधिग्रहण के बाद कुछ हितधारकों की चिंताओं के दौर में आया था।
लाइमलाइट से दूरी, काम पर फोकस
यह दंपति भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में प्रभावशाली रहा है, लेकिन दोनों ने अपने निजी जीवन को निजी ही रखा। अल्बिंदर ढिंडसा सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर बहुत कम सक्रिय रहते हैं और लाइफस्टाइल या पर्सनल अपडेट्स शेयर नहीं करते।
पर्सनल ब्रांडिंग से दूरी
अधिकतर स्टार्टअप फाउंडर्स से अलग, अल्बिंदर ढिंडसा पर्सनल ब्रांडिंग पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। वे सोशल मीडिया एंगेजमेंट की बजाय स्ट्रक्चर्ड कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन को प्राथमिकता देते हैं। उनकी पब्लिक इमेज पूरी तरह काम, लीडरशिप और रिज़ल्ट्स पर आधारित है।
ग्रोफर्स से ब्लिंकिट तक की निर्णायक यात्रा
अल्बिंदर ढिंडसा ने भारत में किराना डिलीवरी को आसान बनाने के लिए ग्रोफर्स की सह-स्थापना की थी। जैसे-जैसे उपभोक्ता व्यवहार बदला, कंपनी ने इंस्टेंट डिलीवरी मॉडल अपनाया और ग्रोफर्स ब्लिंकिट बन गया। यह बदलाव कंपनी के अस्तित्व और भविष्य के लिए निर्णायक साबित हुआ। बाद में जोमैटो ने ब्लिंकिट का अधिग्रहण किया और यह ईटर्नल समूह का अहम हिस्सा बन गया।
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