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अल्बर्ट आइंस्टीन की प्रसिद्ध थ्योरी E=mc2 वाली चिट्ठी की नीलामी, एक चैलेंज का आइंस्टीन ने दिया था जवाब

E=mc2 गणित और विज्ञान जगत में सबसे प्रसिद्ध और चर्चित थ्योरी माना जाता है। इस थ्योरी के जरिए आइंस्टीन ने पहली बार दुनिया को ऊर्जा और द्रव्यमान के संबंध को समझाया था।

वॉशिंगटन, मई 22: दुनिया के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और E=mc2 थ्योरी का आविष्कार करने वाले अल्बर्ट आइंस्टीन की चिट्ठी की नीलामी की गई है। अल्बर्ट आइंस्टीन की ये वो चिट्ठी है, जिसपर उन्होंने E=mc2 लिखा था। थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के जन्मदाता और विश्व के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी जिंदगी में सिर्फ चार बार ही E=mc2 लिखा था, जिनमें से एक चिट्ठी को कुछ दिन पहले सार्वजनिक किया गया था और अब उसे नीलाम किया गया है।

1.3 मिलियन में नीलाम चिट्ठी

1.3 मिलियन में नीलाम चिट्ठी

E=mc2 गणित और विज्ञान जगत में सबसे प्रसिद्ध और चर्चित थ्योरी माना जाता है। इस थ्योरी के जरिए आइंस्टीन ने पहली बार दुनिया को ऊर्जा और द्रव्यमान के संबंध को समझाया था। आइंस्टीन ने अपने जीवन में सिर्फ चार बार ही इस थ्योरी को कागज पर लिखा था और इस बात का दावा किया है आइंस्टाइन पेपर प्रोजेक्ट कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ येरूशलम ने और जिस पेपर की नीलामी की गई है, वो उन चारों पेपर में से एक है। आइंस्टीन का ये लेटर कुछ समय पहले तक उनके प्राइवेट कलेक्शन में रखा हुआ था और कुछ दिन पहले ही इसे सार्वजनिक किया गया था। उम्मीद लगाई गई थी कि आइंस्टीन के इस ऐतिहासिक चिट्ठी की कीमत करीब 4 लाख डॉलर यानि करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपये तक गाई जा सकती है, लेकिन ऑक्सन के दौरान आइंस्टीन की चिट्ठी की बोली अनुमान से तीगुना ज्यादा यानि 13 लाख डॉलर यानि करीब 9 करोड़ लगाई गई है।

5 लोगों ने लगाई बोली

5 लोगों ने लगाई बोली

13 मई को आइंस्टीन की चिट्ठी को खरीदने के लिए 5 लोगों ने बोली लगानी शुरू की थी और 7 लाख डॉलर तक इसकी कीमत जाने तक बोली लगाई जाती रही। जब चिट्ठी की बोली 7 लाख डॉलर पर पहुंची तो तीन लोगों ने नीलामी से बाहर निकलने के फैसला किया और फिर इस हफ्ते तक बाकी बचे दो लोगों ने आइंस्टीन की चिट्ठी के लिए नीलामी की बोली जारी रखी और फिर अंत में 1.3 मिलियन डॉलर में आइंस्टीन की चिट्ठी की आखिरी बोली लगाई गई।

ऐतिहासिक है आइंस्टीन की चिट्ठी

ऐतिहासिक है आइंस्टीन की चिट्ठी

अल्बर्ट आइंस्टीन की ये चिट्ठी काफी ऐतिहासिक है और इसे उन्होंने 26 अक्टूबर 1946 को लिखा अमेरिकी वैज्ञानिक लुडविक सिलबरस्टीन को लिखा था। लुडविक सिलबरस्टीन एक प्रसिद्ध भौतिकविद थे, जिन्होंने आइंस्टीन के थ्योरी को चैलेंज किया था। ये चिट्ठी आइंस्टीन ने जर्मन भाषा में लिखी थी। अल्बर्ट आइंस्टीन ने जर्मन भाषा में लिखी इस चिट्ठी में अमेरिकन भौतिकविद सिलबरस्टीन को कहा था कि 'आपने मुझसे जो सवाल पूछा है, उसका उत्तर भी ई=एमसी 2 थ्योरी से ही मिल सकता है।' आइंस्टीन की इस चिट्ठी को अमेरिकन वैज्ञानिक सिलबरस्टीन ने संभालकर रखा था लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनके वंशजों ने उस चिट्ठी को बेच दिया था और अब जाकर आइंस्टीन की इस चिट्ठी को नीलाम किया गया है।

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