‘इंसानी सभ्यता बर्बाद करने वाला राक्षस हो रहा तैयार’, 1000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने AI को लेकर दी चेतावनी

सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उनका लक्ष्य मानव स्तर की बुद्धि जैसा सेल्फ अवेयर रोबोट बनाना है लेकिन इसे लेकर हमें सावधान रहना होगा। इससे पहले एलन मस्क एआई को लेकर चेतावनी दे चुके हैं।

ai is dangerous

Image: File

ChatGPT को आए बहुत दिन नहीं हुए हैं लेकिन लोकप्रियता के मामले में इसके सबको पीछे छोड़ दिया है। इससे उत्साहित होकर इसकी पैरेंट कंपनी ओपेन एआई ने 3 महीने के बाद ही एक और नया चैटबॉट ChatGPT 4 पेश कर दिया। इसे टक्कर देने के लिए गूगल ने भी अपना एआई चैटबॉट बार्ड मार्केट में लांच कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को लेकर बड़ी टेक कंपनियों की होड़ ने दुनिया को दो भागों में बांट दिया है। कई लोग इसे आने वाला कल बता रहे हैं तो कईयों का ये भी मानना है कि एआई का विकास मानवता के लिए खतरनाक होता जा रहा है।

मनुष्यों पर कर लेगा नियंत्रण

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होने वाले खतरे को लेकर टेक कम्युनिटी में एक लंबी बहस चल रही है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि हम एक ऐसा राक्षस बना रहे हैं जो हमारी सेवा करने के बजाय हमें ही गुलाम बना लेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया की लत और गलत सूचना की तुलना में एआई से खतरा, कहीं अधिक गंभीर है। उनका कहना है कि अगर मशीनों को मनुष्यों की तुलना में अधिक बुद्धिमान और इतना अधिक शक्तिशाली बनने की अनुमति दी जाती है, तो कौन नियंत्रण में होगा- हम या वे?

इंसानों पर हावी हो जाएगा एआई

एआई के बढ़ते प्रयोग को लेकर एलन मस्क खुद कई बार चेतावनी दे चुके हैं। मस्क का मानना है कि एक समय के बाद एआई इंसानों पर हावी हो सकता है। ChatGPT को लेकर एलन मस्क ने अपने एक ट्वीट में कहा था कि हम एक खतरनाक और मजबूत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कुछ ही दूर हैं। GPT-4 के हालिया रिलीज को लेकर एक ओपन लेटर पर अब तक एलन मस्क और ऐपल के को-फाउंडर स्टीव वोज्नियाक सहित 1000 से अधिक लोग साइन कर चुके हैं। इन्होंने एआई अनुसंधान के कम से कम छह महीने के लिए निलंबन की मांग की है।

सैम ऑल्टमैन ने भी चेताया

ऐसा नहीं है कि सिर्फ अंधाधुंध तकनीक के बढ़ते प्रयोग को लेकर विरोधी ही चेतावनी दे रही हैं। स्वंय ChatGPT के निर्माता, ओपनएआई के बॉस सैम ऑल्टमैन ने भी टेक्नोलॉजी के नकारात्मक परिणामों से बचाव की आवश्यकता के बारे में चेतावनी दी है। अल्टमैन ने कहा है कि टेक्नोलॉजी कुछ वास्तविक खतरों के साथ आती है इसके लिए समाज को बहुत सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इसे लेकर विशेष चिंतित हैं क्योंकि इसका उपयोग बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार के लिए किया जा सकता है। ये तकनीक के रूप में कंप्यूटर कोड लिखने में और बेहतर हुए हैं इसे आक्रामक साइबर हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

फायदे कम नुकसान अधिक

सिलिकॉन वैली के भी अधिकांश लोगों का ऐसा मानना है कि एआई के फायदे नुकसान अधिक होंगे। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में एक ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक प्रोफेसर स्टुअर्ट रसेल ने कहा कि आने वाले वक्त में मशीन, मानव से अधिक काबिल हो जाएगा। इसके बाद वह हमारे लिए नहीं, खुद के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब इस तकनीक की वजह से मानव जाति विलुप्त हो जाएगी।

वामपंथी दुष्प्रचार को बढ़ावा

इतना ही नहीं पिछले सप्ताहांत, द मेल ऑन संडे ने खुलासा किया कि कैसे Google बार्ड वामपंथी पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे रहा है। इसमें बताया गया है कि कैसे बार्ड ने ब्रेग्जिट को एक गलत फैसला बताया। न सिर्फ बार्ड बल्कि माइक्रोसॉफ्ट द्वारा फंडेड ChatGPT भी वामपंथी दुष्प्रचार को बढ़ावा देने में सहायक है। ChatGPT ने बाइडेन के प्रशंसा गीत तो लिखे मगर जब यही चीज डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर उससे कही गई तो उसने साफ इनकार कर दिया।

रोजगार पर खतरा

ग्लोबल मैनेजमेंट कन्सल्टेंसी फर्म मैकिंसे एंड कंपनी के रिसर्च के मुताबिक अगले 7 सालों में एआई और ऑटोमेशन करीब चालीस से अस्सी करोड़ नौकरियां खा जाएंगा। इतना ही नहीं करीब 37 करोड़ से भी अधिक लोगों को अपने लिए दूसरा काम ढूंढ़ना होगा। गोल्डमैन सैश की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एआई से 30 करोड़ नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेनरेटिव एआई वर्तमान कार्य के एक-चौथाई भाग को खुद कर सकता है। इसका मतलब है कि इसकी जद में कई नौकरियां आ सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले कुछ सालों में हांगकांग, इजराइल, जापान, स्वीडन और अमेरिका में एआई का सबसे अधिक असर होगा, जबकि भारत, चीन, नाइजीरिया, वियतनाम और केन्या में इसका असर नौकरियों पर अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

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