रूस नहीं देगा सस्ता तेल फिर भी भारत को नहीं पड़ेगा फर्क, अब इस देश ने दिया भारी छूट का ऑफर
नई दिल्ली, 13 जुलाईः बीते कुछ समय से भारत और ईरान के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लगातार चल रही बातचीत अब किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने वाली है। ईरान की लंबे समय से चल रही मांग को भारत स्वीकार कर सकता है। भारत ने 2019 के मध्य में ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था लेकिन अब जल्द ही अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद रूस की तरह तेहरान से तेल खरीद सकता है।

RBI का नया फैसला
इस बात पर बल इसलिए भी मिल रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इंटरनेशनल ट्रेड के लिए बड़ा फैसला कर लिया है। सोमवार को आरबीआई ने रूपये में इंटरनेशनल ट्रेड की अनुमति दे दी है। इसका अर्थ हुआ कि अब दो देश आपस में रूपये के जरिए आयात-निर्यात कर सकेंगे। अब भारत को किसी और देश के संग व्यापार करने के लिए डॉलर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं रह गई है। इस कदम से भारत का न केवल व्यापार घाटा कम होगा, बल्कि रूपये में भी मजबूती आ सकती है।

काफी समय से हो रही थी मांग
आरबीआई ने जो कदम अब जाकर उठाया है, उसकी मांग भारतीय अर्थशास्त्री पिछले कई सालों से कर रहे थे और भारत के इस कदम से देश को बंपर फायदा होने की संभावना है। पिछले हफ्ते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से रुपये को इंटरनेशनल करने की अपील की थी और ये मांग पिछले कई सालों से की जा रही थी, लेकिन पूरा मामला यहां आकर अटक जाता था, कि इंटरनेशनल ट्रेड सेटलमेंट के केन्द्र में भारतीय रुपये की स्वीकार्यता कहां तक होगी।

रूस ने दिया था ऑफर
यूक्रेन संकट के दौरान खुद रूस ने भारत को स्थानीय करेंसी में व्यापार करने का ऑफर दिया था और भारत और रूस के बीच अभी जो पेट्रोलियम का व्यापार हो रहा है, वो चीन की करेंसी युआन के जरिए हो रही है। लेकिन, अब भारत खुद अपनी करेंसी के जरिए ना सिर्फ व्यापार कर सकता है, बल्कि अपने मित्र देशों को भी रुपये के जरिए व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

ईरान से साथ फिर शुरू होगा व्यापार
रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह से पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाया है और ईरान पर पहले से ही प्रतिबंध जारी है। उसे देखते हुए आरबीआई का यह कदम रूस के बाद ईरान के साथ कच्चे तेल के आयात का रास्ता खोल सकता है। भारत और ईरान के बीच बातचीत बीते महीने तब परवान पर चढ़ी जब 8 जून को भारत की यात्रा पर आए ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन भारत आए। यह वह दौर था जब नूपुर शर्मा विवाद को लेकर अरब देशों में भारत विरोधी भावनाएं उफान पर थीं। इस विवाद के बीच पहली बार अरब देशों से कोई नेता भारत दौरे पर आया था। भारत दौरे पर ईरानी विदेश मंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की।

भारत दौरे पर आए ईरानी मंत्री
इस दौरान दोनों देशों ने लंबे समय से चली आ रही सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के अलावा करोबार, सम्पर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों पर चर्चा की। इसके ठीक बाद ईरान के उप विदेश मंत्री मेहदी सफारी ने भारत का दौरा किया और फिर पिछले हफ्ते विदेश सचिव विनय क्वात्रा की ईरान के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री डा. अली बाघेरी कानी से बात हुई है। जाहिर है नेताओं का बार-बार मिलना आने वाले समय में किसी अहम फैसले के ऐलान के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि ईरान के साथ किसी तरह के कारोबार में सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी प्रतिबंध हैं।

भारत ने 2019 में आयात बंद किया
पिछली बार भारत ने अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था लेकिन जब यूक्रेन पर संकट आया और फिर से अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए तब भारत पर भी दबाव बनाया जाने लगा कि वह पुतिन के देश से अपने व्यापारिक संबंध तोड़ दे। लेकिन भारत ने बेहद समझदारी का परिचय देते हुए दोनों विपरीत शक्तियों संग अपने संबंध बरकरार रखे। वहीं, समय के साथ ईरान के साथ अमेरिका की तल्खी में भी कमी आयी है। ऐसे में अब यही उम्मीद जताई जा रही है कि ईरान से तेल खरीदने के लिए भारत जल्द ही विचार कर सकता है।

रूस से भारी मात्रा में खरीदा तेल
इस बीच रूस, यूक्रेन युद्ध के बाद भारत को तेल निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। रूस द्वारा मिल रही भारी छूट का भारत ने खूब फायदा उठाया और मात्र तीन महीने में 5.3 अरब डॉलर का तेल खरीद डाला। हालांकि रूस द्वारा तेल पर मिल रही छूट अब कम होती जा रही है लेकिन ईरान से तेल खरीद कर भारत उसकी पूर्ति कर सकता है। ईरान भी भारत को कच्चा तेल आयात करना चाहता है। और वह रूस की तरह, सस्ते दर पर कच्चा तेल सप्लाई करने को तैयार है।

खुला नया व्यापारिक ट्रेड रूट
ईरान के तेल आयात करने में सबसे बड़ा फायदा ये ही कि इसकी दूरी रूस की तुलना में अपेक्षाकृत बेहद कम है। ऐसे भारतीय कंपनियों को परिवहन शुल्क भी कम देना पड़ेगा। इसके अलावा ईरान, भारत और रूस के बीच व्यापार के लिए नया वैकल्पिक रूट भी खोल दिया है। हाल ही में ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी ने रूस से भारत तक ट्रेड करने के लिए अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) का इस्तेमाल किया। 7200 किलोमीटर लंबे इस ट्रेड रूट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रास्ते ट्रेड की जरूरत नहीं पड़ी । अगर यही सामान रूस से स्वेज नहर के जरिए भारत पहुंचता तो इसे 16112 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती। ऐसे में अगर यह ट्रेड रूट ऐक्टिव हो जाता है तो न सिर्फ भारत और रूस के बीच ट्रेड में जबरदस्त इजाफा होगा, बल्कि ईरान और कजाकिस्तान के साथ भी ट्रेड बढ़ जाएगा
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