इमरान खान की राजनीति को जड़ से उखाड़ देगी फौज? पंजाब के मुख्यमंत्री के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव
पंजाब प्रांत, पाकिस्तान की राजनीति में वही स्थान रखता है, जो भारत के लिए उत्तर प्रदेश। और इस वक्त पंजाब प्रांत में इमरान खान की पार्टी पीटीआई की सरकार है, जिसके मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार हैं...
इस्लामाबाद, मार्च 28: पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब की सरकार के मुख्यमंत्री के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है। जिसके बाद सवाल पूछे जा रहे हैं, कि क्या इमरान खान की पार्टी और उनकी राजनीति को जड़ से उखाड़ने की कोशिश में पाकिस्तान की आर्मी तुल गई है? आखिर पंजाब के मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का मतलब क्या है और हाथ से पंजाब निकलते ही इमरान खान की राजनीति हमेशा के लिए कैसे खत्म हो जाएगी, आइये जानते हैं।

पंजाब के सीएम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बाद, पाकिस्तान की विपक्ष पार्टियों ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार को अपना नया निशाना बनाया है और पंजाब विधानसभा में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है। वरिष्ठ विधानसभा सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब विधानसभा सचिव मुहम्मद खान भट्टी के समक्ष मुख्यमंत्री बुजदार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा सचिव ने पुष्टि की कि प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है और उन्होंने कहा कि, इसे नियमों और विनियमों के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, "अध्यक्ष चौधरी परवेज इलाही अविश्वास प्रस्ताव और मांग [नोटिस] पर संविधान और कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे।" वहीं, रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, प्रस्ताव प्रस्तुत करने के बाद मुख्यमंत्री प्रांतीय विधानसभा को भंग नहीं कर सकते हैं, जबकि स्पीकर 14 दिनों के भीतर सत्र बुलाने के लिए बाध्य है।

पंजाब में सरकार गिरने का मतलब
दरअसल, पंजाब प्रांत, पाकिस्तान की राजनीति में वही स्थान रखता है, जो भारत के लिए उत्तर प्रदेश। और इस वक्त पंजाब प्रांत में इमरान खान की पार्टी पीटीआई की सरकार है, जिसके मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार हैं, जिन्हे इमरान खान का काफी करीबी माना जाता है और पाकिस्तान में कहा जाता है, कि पंजाब की सरकार का रिमोट कंट्रोल इमरान खान के हाथ में है। पाकिस्तान की राजनीतिक इतिहास में देखा यही गया है, कि जो पंजाब का मुख्यमंत्री बनता है, वही आगे चलकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनता है, लिहाजा, इमरान खान ने पंबाज के मुख्यमंत्री के तौर पर ऐसे शख्स को चुना था, जो काफी कमजोर और राजनीतिक अकर्मण्य माना जाता है। और उस्मान बुजदार आगे जाकर भी इमरान खान के लिए सिरदर्द नहीं बनते। लेकिन, उस्मान बुजदार ने अपने शासनकाल में पंजाब प्रांत का बेड़ा गर्ग कर दिया है, और चूंकी इमरान खान को लाने का इल्जाम सेना के सिर पर है, लिहाजा अब सेना डैमेज कंट्रोल के मूड में आ चुकी है और इमरान की राजनीति को ही खत्म करने की कोशिश में जुट गई है।

क्या गिर जाएगी पंजाब की सरकार?
पंजाब प्रांतीय विधानसभा द्वारा जारी एक आधिकारिक हैंडआउट में कहा गया है कि, 127 सदस्यों ने बुजदार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि 120 सदस्यों ने विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग पर हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष ने कहा है कि, "संविधान के अनुसार, प्रांतीय विधानसभा सत्र बुलाने की मांग के लिए 74 सदस्यों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। और एक बार अविश्वास प्रस्ताव जमा करने के बाद बुजदार विधानसभा को भंग नहीं कर सकते हैं।' वहीं, इसके बाद में पंजाब विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए विपक्षी सदस्यों ने कहा कि, स्पीकर को अब 14 दिनों के भीतर प्रांतीय विधानसभा का सत्र बुलाने की आवश्यकता है। पीएमएल-एन नेता ने कहा कि, "आज सुबह 9:45 बजे मांग सौंपी गई और यह पंजाब के लोगों का फैसला है जो अब बुजदार को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते।" विपक्ष ने कहा कि, जिस दिन पंबाज विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी, उस दिन विपक्ष के पास 200 सदस्यों का समर्थन होगा और सरकार गिर जाएगी।

पाकिस्तान में अंत हो रही इमरान की राजनीति?
पाकिस्तान के राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि, इमरान खान के पास कुछ जनसमर्थन अभी भी मौजूद है, लेकिन अब उनकी राजनीति की बत्ती बुझा दी गई है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सेना ने अपना फैसला कर लिया है, क्योंकि जिस तरह से इमरान खान को सेना की तरफ से फ्री हैंड दिया गया था, उसे संभालने में वो नाकाम रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, पाकिस्तान में सेना अंपायर की भूमिका में थी और अंपायर का साथ इमरान खान को मिला हुआ था। लेकिन, इमरान खान चाह रहे थे, कि गेंद उनके बैट पर लगे या ना लगे, अंपायर हर बार छक्के के लिए ही हाथ उठाए। लेकिन, सेना ने ऐसा करना से मना कर दिया और इमरान खान को साफ साफ कह दिया, कि आपकी जिम्मेदारी छक्का मारने की है, लेकिन इमरान खान घरेलू मोर्चे के साथ साथ विदेशी मोर्चे पर भी फेल साबित होते चले गये, लिहाजा अब सेना भी अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों से घबराने लगी और इमरान खान को हटाने के अलावा सेना के पास कोई और रास्ता बचा नहीं था।

इमरान खान की सरकार भी जाएगी
पाकिस्तान की इस वक्त की राजनीतिक स्थिति ये है, कि पीएम इमरान खान की सरकार गिरने वाली है और इमरान खान खुद को राजनीतिक शहीद बताने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। कल 'अमर बिल मरूफ' की रैली से पहले इमरान खान ने कम से कम 10 लाख लोगों के आने का दावा किया था, लेकिन रैली में एक लाख से भी कम लोग पहुंचे, लिहाजा इमरान खान का शक्ति प्रदर्शन भी फेल हो गया। ऐसे में इमरान खान ने अपनी कुर्सी के खतरे के पीछे विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहरा दिया। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इमरान खान की सत्ता काफी पहले ही जाने वाली थी, लेकिन कोविड की वजह से वो बचते रहे, लेकिन अब उन्होंने 'अति' कर दी है। इमरान खान की पहली उनकी कोशिश यह थी कि वह अपनी पार्टी के बागी सदस्यों को असेंबली में अयोग्य घोषित करा दें। जिससे अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उनके वोट की गिनती नहीं रहे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने यह कह दिया कि अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही के दौरान सदस्यों के वोटों की गिनती नहीं करना अवमानना होगा। लिहाजा, अब इमरान खान के पास अपनी सरकार बचाने का एक भी रास्ता नहीं बचा है।

इमरान से सेना का मोहभंग
पाकिस्तान के पूर्व स्विंग गेंदजाब और 1992 विश्व कप विजेता कप्तान को पाकिस्तानी डीप स्टेट और रावलपिंडी जीएचक्यू के समर्थन से और "नया पाकिस्तान" देने के वादे पर चुना गया था, लेकिन इमरान खान ने विदेश नीति पर के साथ-साथ देश को आर्थिक रसातल में धकेल दिया है। इमरान खान ने लगातार कूटनीति को भी अपने घमंडों के आधार पर ही तोलने की कोशिश की, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। इस्लामाबाद के अड़ियल रवैये के कारण बलूचिस्तान और सिंध में अलगाववादी आंदोलनों के निर्माण के साथ एक अत्यधिक कट्टरपंथी समाज के भीतर आंतरिक कलह का जन्म हुआ। यहां तक कि काबुल में एक कथित रूप से अनुकूल तालिबान शासन भी रावलपिंडी के लिए वैचारिक सहयोगी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) समूह के साथ शांति स्थापित नहीं कर पाया। बलूच और सिंध समूहों की तरह, टीटीपी भी पाकिस्तान सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हमले कर रहा है। वहीं, तालिबान के समर्थन के लिए पूरे पाकिस्तान ने अपने दिल का दरवाजा खोल दिया था, फिर भी तालिबान और पाकिस्तान सरकार के बीच रिश्ते खराब हो चुके हैं और इसके लिए भी इमरान खान के घमंड को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सेना क्यों है इमरान खान से नाराज?
पाकिस्तान की सेना के इमरान खान से नाराज होने की कई वजहें हैं। सबसे पहली वजह ये थी, कि इमरान खान ने अपनी सत्ता को सुरक्षित रखने के लिए सेना के अंदर ही फूट डालने की कोशिश की थी और सेना के कई अधिकारियों को अपने पाले में करने के लिए 'लालच' दिया था, जो सार्वजनिक हो गया। वहीं, सेना ने भारत के साथ व्यापार बहाल करने के लिए इमरान खान को कहा था, लेकिन इमरान खान ने वोट बैंक को देखते हुए भारत से व्यापारिक रिश्ते बहाल करने से इनकार कर दिया, जबकि पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के साथ सीमा पर सीजफायर का ऐलान कर दिया। वहीं, इमरान खान ने कई बार सार्वजनिक मंचों से सेना को 'भ्रष्ट' कहना शुरू कर दिया और भारतीय सेना के भ्रष्ट नहीं होने की प्रशंसा कर दी, जिससे पाकिस्तान की आर्मी भड़क गई, लेकिन फिर भी शांत रही। लेकिन, स्थिति उस वक्त पूरी तरह से बिगड़ गई, जब आईएसआई चीफ की नियुक्ति पर इमरान खान ने अपनी अकड़ दिखा थी और करीब 3 हफ्ते तक उस फाइल पर साइन नहीं किया, जिसे आर्मी चीफ ने भेजा था। वहीं, इमरान खान की सत्ता की ताबूत पर आखिरी कील उस वक्त लगी, जब आईएसआई के पूर्व चीफ फैज हमीद, जिसे सेना ने हटाया था, उसे ही अगला आर्मी चीफ बनाने निकल पड़े, जिसके बाद सेना ने इमरान खान के सिर से हाथ खींच लिया।












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