अफ़ग़ानिस्तान: काबुल एयरपोर्ट तक पहुंचने में क्यों है जान जाने का ख़तरा?
राजधानी काबुल में तालिबान के दाख़िल होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के लिए हज़ारों अफ़ग़ान और विदेशी नागरिकों की भारी भीड़ हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर इकट्ठा हो गई थी और उनकी बेकरारी बढ़ती ही जा रही थी.
सप्ताहांत पर मुल्क की बागडोर अपने हाथ में लेने के बाद से तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलने के सभी सरहदी रास्ते बंद कर दिए हैं.
ऐसे में बहुत से लोगों के लिए देश छोड़ने का इकलौता रास्ता काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होकर जाता है.
लेकिन तालिबान का कहना है कि वे नहीं चाहते, अफ़ग़ान लोग अपना मुल्क छोड़कर जाएं.
उन्होंने हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जाने वाले मुख्य मार्ग यानी शहर के एयरपोर्ट रोड पर कई जगहों पर चेक प्वॉयंट्स (सुरक्षा चौकियां) बनाई हैं.
नीचे की तस्वीर में इन्हें पीले रंग में दिखलाया गया है. इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों पर हमले किए गए हैं.
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काबुल एयरपोर्ट के बाहर
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक अनाम सूत्र के हवाले से बताया है कि रविवार के बाद से इस इलाके में हुई हिंसा में 12 लोगों की मौत हो चुकी है.
ये लोग या तो बंदूक़ की गोली का शिकार हुए हैं या भीड़ की भगदड़ में कुचल दिए गए.
इसका मतलब ये हुआ कि काबुल एयरपोर्ट तक के सफ़र में जान का जोख़िम लगातार बढ़ रहा है.
एयरपोर्ट कम्पाउंड की चारदीवारी के भीतर 4000 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिकों का अस्थाई अड्डा है और वहां की व्यवस्था फिलहाल उनके हाथ में हैं.
इसके बाहर भारी भरकम हथियारों से लैस तालिबान लड़ाकों ने अपना सुरक्षा घेरा बना रखा है. और इसकी वजह से डर का माहौल बढ़ गया है.
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एयरपोर्ट तक पहुंचने के दौरान
ऐसी रिपोर्टें हैं कि तालिबान अफ़ग़ान लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने से रोक रहा है. और रोके जा रहे लोगों में से कुछ के पास वैध वीज़ा धारक हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एयरपोर्ट के पास पहुंचने से पहले ही लोगों पर रास्ते में हमले किए जा रहे हैं.
अख़बार 'एलए टाइम्स' के एक रिपोर्टर ने बताया कि तालिबान के लड़ाके हवाई फायरिंग कर रहे थे, उनके हथियारों का निशाना आम लोगों की भीड़ की तरफ़ था. वे भागने की कोशिश कर रहे आम लोगों पर डंडे और कोड़े बरसा रहे थे.
मार्कस याम की तस्वीरों में ये दिख रहा था कि कम से कम एक महिला घायल हो गई और एक किशोर खून से लथपथ हो गया था, उसके सिर में चोटें आई थीं.
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ऑस्ट्रेलिया की स्पेशल ब्रॉडकास्ट सर्विस (एसबीएस) ने जो तस्वीरें प्रकाशित कीं, उनमें एक अफ़ग़ान दुभाषिये की भी तस्वीर शामिल थी.
उन्हें गोली लगी थी और उनका इलाज चल रहा था.
पिछले कुछ दिनों से एयरपोर्ट की चारदीवारी के बाहर लोग इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे हैं.
नक़्शे के सहारे इसे समझा जा सकता है. बुधवार को मची भगदड़ में यहां 17 लोगों के घायल होने की रिपोर्टें मिली थीं.
कई लोग कंटीली तार लगी चारदीवारी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे और वहां पर गोलियां चलने की भी रिपोर्टें मिलीं हैं.
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ग्राउंड पर मौजूद संवाददाताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने की उम्मीद से एयरपोर्ट के बाहर इकट्ठा हुई उस भीड़ में ऐसे परिवार हैं, जिनके साथ बच्चे हैं. उनमें से बहुत से लोगों को कई दिनों से दाना-पानी तक नहीं मिला है.
सोशल मीडिया पर शेयर की जा रहे फुटेज में बच्चों को सामान की तरह दीवार के उस पार खड़े विदेशी सैनिकों को सौंपते हुए देखा जा सकता है, इस उम्मीद से कि वे शायद अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने में कामयाब हो जाएं.
पिंक जैकेट पहनी एक लड़की को दीवार के उस पार सीढ़ी के सहारे खड़े एक सैनिक की मदद लेने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है.
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एयरपोर्ट पर अफ़रातफ़री के हालात तब बने, जब यूरोपीय देशों ने अपने नागरिकों और अफ़ग़ान सहयोगियों को अफ़ग़ानिस्तान से निकालने में तेज़ी दिखानी शुरू की.
हालांकि तालिबान ने कहा है कि अफ़ग़ान नागरिकों को देश में ही रहना चाहिए. तालिबान ने ये दावा भी किया है कि वे विदेशियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित एयरपोर्ट तक पहुंचने दे रहे हैं. एक तालिबान अधिकारी ने कहा, "हम हवाई अड्डे पर अफ़ग़ानों, विदेशियों और तालिबान सदस्यों के बीच किसी भी तरह की हिंसक या मौखिक झड़प होने से रोक रहे हैं."
तालिबान की हिंसा और उत्पीड़न की ताज़ा रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के एक गोपनीय दस्तावेज के ज़रिए सामने आई है. बीबीसी ने इस रिपोर्ट को देखा है.
रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि चरमपंथी उन लोगों की तलाश तेज़ कर रहे हैं जिन्होंने नेटो और अमेरिकी सेना के लिए काम किया और उनके साथ सहयोग किया.
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हवाई अड्डे के लिए जाने वाले लोगों की भारी संख्या को इस इलाक़े की सैटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है.
इन तस्वीरों में हज़ारों लोग कई गाड़ियों में सवार एयरपोर्ट की ओर जाते दिख रहे हैं.
टरमैक पर हताश अफगानों की भगदड़
अराजकता की तस्वीरें सबसे पहले सोमवार को काबुल हवाईअड्डे से सामने आईं क्योंकि तालिबान हुकूमत की संभावना से डरे हुए अफ़गान, भारी संख्या में यहां पहुंच गए थे.
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