अफगानिस्तान की पहली महिला मेयर ने तालिबान को ललकारा, कहा- मुझे मारकर दिखाओ
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी तालिबान के डर से अपना देश छोड़ चुके हैं। ऐसे में अफगानिस्तान की एक महिला ने तालिबान को खुली चुनौती दी है।
काबुल, 17 अगस्त। तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में खौफनाक माहौल पैदा कर दिया है। लोग अपनी जान बचाकर दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हैं। खुद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी तालिबान के डर से अपना देश छोड़ चुके हैं। ऐसे में अफगानिस्तान की एक महिला ने तालिबान को खुली चुनौती दी है। ये हैं पाकिस्तान की पहली और सबसे युवा महिला मेयर जरीफा गफारी। उन्होंने कहा कि तालिबान आए और मुझे मारकर दिखाए।
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आओ और मुझे मारकर दिखाओ
जरीफा गफारी ने तालिबान को खुला चेलैंज देते हुए कहा कि, 'मैं यहां उनके आने का इंतजार कर रही हूं। मेरी या मेरे परिवार की मदद करने वाला यहां कोई नहीं है। मैं बस उनके (परिवार) और अपने पति के साथ बैठी हूं और वे(तालिबान) मेरे जैसे लोगों के लिए आएंगे और मुझे मार देंगे।' पूरे देश पर तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने ये बात कही।

आखिर में कहां जाऊं
जरीफा गफारी ने कहा कि अशरफ गनी के नेतृत्व वाली सरका के वरिष्ठ सदस्य भागने में सफल रहे। मैं कहां जाऊं। तालिबान के कब्जे से पहले जरीफा गफारी ने इंटरनेशनल डेली से बातचीत की थी और अफगानिस्तान के बेहतर भविष्य की कामना की थी। लेकिन तालिबान के कब्जे के साथ ही उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
जरीफा गफारी ने साल 2018 में मैदान वरदाक प्रांत की पहली और सबसे कम उम्र की महिला मेयर बनकर सुर्खियां बटोरी थीं। गफारी अब अपने और अपने जैसे अन्य लोगों तक तालिबान के पहुंचने का इंतजार कर रही हैं।

पहले मिल चुकी हैं तालिबान से मौत की धमकियां
गफारी को पहले भी तालिबान से मौत की धमकियां मिल चुकी हैं। मेयर गफारी को तीसरी बार मारने में विफल होने के बाद उनके पिता जनरल अब्दुल वासी गफारी की आतंकवादियों ने पिछले साल 15 नवंबर को गोली मारकर हत्या कर दी थी।
बता दें कि गफारी को उस समय काबुल में आतंकी हमलों में घायल हुए सैनिकों और नागरिकों के कल्याण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जब तालिबान ने काबुल पर अपना अधिकार जमाना शुरू कर दिया था।
तीन हफ्ते पहले दिए एक साक्षात्कार में गफारी ने कहा था कि युवा जानते हैं कि क्या हो रहा है। उनके पास सोशल मीडिया है। वे वहां संवाद करते हैं। मुझे लगता है कि वे तरक्की और हमारे अधिकारों के लिए लड़ना जारी रखेंगे। मुझे लगता है कि इस देश का भविष्य है। लेकिल आज में असहाय महसूस कर रही हूं और अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद थी कि काबुल पर तालिबान का कब्जा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि हालांकि तालिबान ने कहा है कि वह पिछली सरकार के साथ काम करने वालों से बदला नहीं लेंगे, लेकिन उनके इतिहास को देकते हुए उनपर भरोसा करना कठिन है।

महिलाएं सबसे ज्यादा डरी हुई हैं
गफारी ने कहा की तालिबान के कब्जे से सबसे ज्यादा महिलाएं डरी हुई हैं, क्योंकि अतीत में तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा बंद कर दी थी, उन्हें काम करने से रोक दिया था और न्याय की आड़ में उन्हें यातनाएं दीं।












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