पटना के अभय सिंह फिर बने रूस में सांसद, पुतिन की पार्टी से जीतकर बनाया रिकॉर्ड
रूस में भारतीय मूल के अभय कुमार सिंह ने विधानसभा चुनाव जीतकर एक बार फिर से अपना परचम लहरा दिया है। अभय कुमार सिंह ने रूस के ऐतिहासिक शहर कुर्स्क विधानसभा सीट से 70 फीसदी से ज्यादा मत पाकर जीत हासिल की है।
मास्को, 13 सितंबरः रूस में भारतीय मूल के अभय कुमार सिंह ने विधानसभा चुनाव जीतकर एक बार फिर से अपना परचम लहरा दिया है। पेशे से डॉक्टर रह चुके अभय कुमार सिंह ने रूस के ऐतिहासिक शहर कुर्स्क विधानसभा सीट से 70 फीसदी से ज्यादा मत पाकर जीत हासिल की। कुर्स्क सीट से ही अभय कुमार सिंह ने पहली बार 2017 में विधानसभा चुनाव जीता था। यह दूसरी बार है जब वह यहां से विधानसभा से विजयी हुए हैं।

कुर्स्क शहर से विधायक हैं अभय कुमार सिंह
बता दें कि अभय कुमार सिंह जिस कुर्स्क शहर से विधायक हैं, उसका रूस ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास में भी अहम स्थान है। इसी शहर में 1943 में हिटलर की सेनाओं को हार का सामना करना पड़ा था। हाल में हुए असेंबली चुनाव में अभय कुमार सिंह को सर्वाधिक वोट हासिल हुए हैं। उन्होंने यूनाइटेड रशिया पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ा और कुर्स्क क्षेत्र में रिकॉर्ड 70 फीसदी वोट प्राप्त किए। 'यूनाइटेड रशा' रूस की सत्ताधारी पार्टी है जिसने हाल के आम चुनावों में देश की संसद (दूमा) में 75 फीसदी सांसद भेजे हैं, पिछले 22 वर्षों से पुतिन सत्ता में हैं।

पुतिन की पार्टी से चुनाव जीते हैं अभय कुमार सिंह
यूनाइटेड रशिया पार्टी व्लादिमीर पुतिन से संबंध रखती है। इस बार अभय सिंह के नाम पर कुछ स्थानीय लोगों और संस्थाओं को आपत्ति थी क्योंकि वह भारतीय मूल के हैं और बाहरी हैं। फिर भी अंत में उनके समर्थन में लोगों ने वोट दिया और बड़ी जीत दिलाई। अभय कुमार सिंह को 2010 में रूस की नागरिकता मिली थी। रूस में अपनी काबिलियत और मेहनत के बूते पहचान बनाने वाले अभय कुमार बीते 3 दशकों से रूस में रह रहे हैं।

1990 में रूस पहुंचे थे अभय सिंह
अभय सिंह पटना के रहने वाले हैं और मेडिकल की पढ़ाई के लिए 1990 में रूस पहुंचे थे। लेकिन वह वापस नहीं लौटे और वहीं के होकर रह गए। अभय कुमार सिंह को व्लादिमीर पुतिन के कट्टर समर्थकों में गिना जाता है। यूक्रेन पर हमले को लेकर भी उन्होंने व्लादिमीर पुतिन का ही बचाव किया था। अभय कुमार सिंह ने कहा था कि अमेरिका समेत पश्चिमी देश यूक्रेन को नाटो का हिस्सा बनाकर रूस को घेरना चाहते हैं। ऐसे में रूस के लिए अपनी रक्षा करने के लिए ऐक्शन लेना जरूरी हो गया था।

पटना के लोयोला स्कूल से की थी पढ़ाई
अभय कुमार सिंह ने पटना के लोयोला हाई स्कूल से पढ़ाई की थी। इसके बाद वह कुर्स्क चले गए थे। यहां उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की थी और पटना भी लौटे थे। अभय़ कुमार सिंह ने पटना में रजिस्टर्ड डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस शुरू कर दी थी, लेकिन उनका मन रमा नहीं। इसके बाद वह एक बार फिर से कुर्स्क शहर चले गए और वहां फार्मास्युटिकल का बिजनेस शुरू किया। इसके बाद अभय कुमार सिंह ने रियल एस्टेट सेक्टर में भी अपना काम शुरू किया था।

रूस में शॉपिंग मॉल के भी मालिक हैं अभय
अभय सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'शुरुआत में बिजनेस करने में खासी मुश्किल होती थी क्योंकि मैं गोरा भी नहीं था, लेकिन हमने भी तय कर रखा था और कड़ी मेहनत के साथ अड़े रहेंगे।' जैसे-जैसे अभय के पैर रूस में जमते गए व्यापार में भी बढ़ोत्तरी हुई। फार्मा के बाद अभय ने रियल एस्टेट में हाथ आजमाया और उनके मुताबिक 'आज हमारे पास कुछ शॉपिंग मॉल भी हैं।'
Koo AppPatna’s Abhay Singh again became an MP in Russia, made a record by winning from Putin’s party. Abhay Kumar Singh, a doctor by profession, won the Kursk assembly seat in Russia’s historic city by securing more than 70 percent of the vote. The city of Kursk, from where Abhay Kumar Singh is an MLA, has an important place not only in Russia but also in world history. This is not your only achievement, This is the proud moment for Bihar. we are proud of you Abhay Singh. #Patna #mlaofkursk #Russia - Chandan Kumar (@chandankumarjarvis1) 13 Sep 2022
पुतिन से बेहद प्रभावित हैं अभय
उनके जीवन का एक दुखद पहलू ये भी है कि सिर्फ 13 साल की उम्र में अभय ने अपने पिता को खो दिया। वह एक डॉक्टर बनना चाहते थे लेकिन उनकी किस्मत उन्हें कुर्स्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी ले गई और फिर वहां से उन्होंने राजनीति का रूख कर लिया। रूसी राष्ट्रपति पुतिन से प्रभावित अभय को इस बात पर 'गर्व है कि भारतीय होने के बावजूद वे रूस में रम गए और आज वहां पर चुनाव भी जीत चुके हैं।' उन्होंने बताया कि आज भी कोशिश रहती है कि जब समय मिले तो बिहार जरूर आएं क्योंकि 'सभी मित्र और रिश्तेदार पटना में ही हैं।












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