6 महीने की बेहोशी,छलनी फेफड़े-हार्ट अटैक, फिर UAE में एक भारतीय फ्रंटलाइन वर्कर के साथ हुआ चमत्कार

अबू धाबी, 28 जनवरी: संयुक्त अरब अमीरात में एक भारतीय फ्रंटलाइन वर्कर 6 महीने तक कोविड की वजह से जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। इतने दिनों तक उसे कुछ होश नहीं था कि उसके साथ क्यो हो रहा है। कोविड का इंफेक्शन ऐसा हुआ था कि शुरू में ही फेफड़े पूरी तरह से खराब हो चुके थे। मशीन से सांसे चल रही थीं। डॉक्टर भी उम्मीद छोड़ते जा रहे थे। कार्डियक अरेस्ट भी हुआ। कई और सारी तकलीफें हुईं। लेकिन, 118 दिन बाद डॉक्टरों को लगा कि चमत्कार हो गया है। गुरुवार को ही उसे डिस्चार्ज किया गया है। इतने दिनों तक उसका इलाज उसी अस्पताल में चलता रहा, जहां वह ओटी टेक्नीशियन के तौर पर कोविड टास्क फोर्स की ड्यूटी दे रहा था। अब वह स्वस्थ हो रहा है और पत्नी-बच्चे के साथ माता-पिता से मिलने भारत आने की तैयारी कर रहा है।

6 महीने तक बेहोशी की हालत में कोरोना से लड़ता रहा

6 महीने तक बेहोशी की हालत में कोरोना से लड़ता रहा

संयुक्त अरब अमीरात में गुरुवार को 38 साल के एक भारतीय फ्रंटलाइन वर्कर को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है। वह पिछले 6 महीनों से बेहोश था, गंभीर कोविड-19 की वजह से उसके फेफड़े बुरी तरह खराब हो गए थे। लेकिन, उसके साथ चमत्कार हुआ है और वह आज जीवित होकर अपनों के बीच लौट चुका है। केरल के रहने वाले अरुण कुमार एम नायर अबू धाबी के ही एक बड़े अस्पताल में ओटी टेक्नीशियन हैं और महामारी के दौरान लगातार अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लेकिन, जब वह खुद कोविड संक्रमित हुए तो उनके फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया और वह कृत्रिम फेफड़े (ईसीएमओ मशीन) के सहयोग 6 महीनों तक जिंदगी की जंग लड़ते रहे।

हेल्थकेयर ग्रुप वीपीएस ने दी 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता

हेल्थकेयर ग्रुप वीपीएस ने दी 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता

भले ही अरुण को यह इल्म नहीं हो कि उनके साथ इतने महीनों में क्या कुछ गुजरा है। लेकिन, डॉक्टर बताते हैं कि किस तरह से उसकी सेहत में एक के बाद एक रुकावटें आती जा रही थीं। यहां तक कि एक बार तो कार्डियक अरेस्ट तक हुआ। बेहोशी की हालत में ही उन्हें कई तरह के मेडिकल प्रोसेड्योर से भी गुजरना पड़ा, जिसमें ट्रेकियोस्टोमी और ब्रोंकोस्कोपी शामिल हैं। जाहिर है कि उनका परिवार भारत में था और वह अकेले जिंदगी की जंग लड़ रहे थे। लेकिन, मल्टीनेशनल हेल्थकेयर ग्रुप वीपीएस हेल्थकेयर ने उनकी सेवा और जिंदगी के लिए लड़ने की भावना को देखते हुए उन्हें करीब 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कर्रवाई है। उनके अमीराती सहयोगियों ने अबू धाबी के बुर्जील अस्पताल में गुरुवार को उनके चमत्कारिक तौर पर स्वस्थ होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह वित्तीय सहायता उन्हें सौंपा है।

पत्नी को जॉब और बच्चे को पढ़ाई खर्च का ऑफर

पत्नी को जॉब और बच्चे को पढ़ाई खर्च का ऑफर

अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है हेल्थकेयर ग्रुप उनकी पत्नी को जॉब का ऑफर देगा और उनके बच्चे का खर्च भी उठाएगा। चंद हफ्ते पहले ही नायर को अस्पताल के जेनरल रूम में शिफ्ट किया गया था। पांच महीनों से ज्यादा वक्त से वह अस्पताल के आईसीयू में लाइफ-सपोर्ट सिस्टम पर रखे गए थे। उन्होंने कहा है, 'मुझे कुछ भी याद नहीं है। मैं जानता हूं कि मैं किसी तरह से मौत के मुंह से बचकर लौटा हूं।' उन्होंने कहा, 'यह मेरे परिवार, दोस्तों और सैकड़ों अन्य लोगों की दुआओं की ताकत है कि आज मैं जिंदा हूं।'

2013 से ही अबू धाबी में कर रहे हैं ड्यूटी

2013 से ही अबू धाबी में कर रहे हैं ड्यूटी

नायर को पिछले साल जुलाई के मध्य में कोविड का इंफेक्शन हो गया था। तब वे अबू धाबी के एलएलएच हॉस्पिटल में कोविड-19 फोर्स के तहत काम कर रहे थे। वे इस अस्पताल में ओटी टेक्नीशियन के तौर पर 2013 से ही काम कर रहे हैं। कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद अरुण को पहले तो क्वारंटाइन फैसिलिटी में रखा गया, लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और पता चला कि उनके फेफड़े तो बुरी तरह संक्रमित हो चुके हैं। 31 जुलाई, 2021 को डॉक्टरों ने उन्हें ईसीएमओ सपोर्ट दिया, क्योंकि वह खुद से सांस नहीं ले पा रहे थे। 118 दिनों बाद उनसे यह सपोर्ट हटाई गई है। शुरू में दवा का असर दिखाई पड़ा था, लेकिन जल्द ही उनकी हालत बद से बदतर होती चली गई थी।

परिवार को नहीं दी थी बीमार होने की जानकारी

परिवार को नहीं दी थी बीमार होने की जानकारी

अमेरिका के इस प्रांत में मिला ओमिक्रॉन वेरिएंट का भी नया वेरिएंट, जानिए कितना है खतरनाक?उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में खुद भारत में अपने परिवार वालों को जानकारी नहीं दी थी और सिर्फ इतना कहा था कि खास तरह की ड्यूटी की वजह से वे कोई कॉल नहीं कर सकेंगे। उनकी पत्नी जेन्नी जॉर्ज खुद भी हेल्थकेयर वर्कर हैं। उन्होंने कहा, 'हमें कुछ भी गलत संदेह नहीं हुआ, क्योंकि वह कोविड-19 टास्क फोर्स में काम कर रहे थे। लेकिन, जब अस्पताल से कॉल आया तो हमें विश्वास ही नहीं हो रहा था।' उन्होंने वीजा लिया और पति के पास अबू धाबी पहुंच गईं। उन्होंने कहा है कि, 'यह खबर अरुण के माता-पिता और मेरे लिए बहुत बड़ा झटका था। हम तो टूट ही चुके थे और सिर्फ उनके अच्छे स्वास्थ्य और जल्द ठीक होने के लिए दुआ कर रहे थे।' उनके मुताबिक वह अगस्त में घर आने की योजना बना रहे थे।

'अरुण की रिकवरी हम सबके लिए चमत्कार'

'अरुण की रिकवरी हम सबके लिए चमत्कार'

बुर्जील अस्पताल में पहले दिन से नायर का इलाज करने वाले कार्डियक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर तारिग अली मोहम्मद एल्हासन का कहना है कि उसकी स्थिति पहले दिन से ही गंभीर थी। उन्होंने कहा, 'उसका लंग्स फेल कर चुका था और वह ठीक होने लायक नहीं था। वह सिर्फ ईसीएमओ की सपोर्ट से ही सांस ले पा रहा था। और यह 118 दिनों तक चला। सामान्य मामले में रिकवरी होना असंभव था। इसलिए अरुण की रिकवरी हम सबके लिए चमत्कार है।' वह जल्दी ही अपने परिवार के साथ माता-पिता से मिलने के लिए भारत आने वाला है और फिलहाल उसकी फिजियोथेरेपी जारी रहेगी। उसे विश्वास है कि फरवरी से वह अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर लेगा। (तस्वीरें- यूट्यूब वीडियो से)

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