पाकिस्तान में 50 हिन्दुओं का धर्मांतरण, मंत्री के बेटे की मौजूदगी में 1 साल की बच्ची ने भी कबूला इस्लाम
करीब एक महीने पहले पाकिस्तान के एक हिंदू सांसद ने अपने साथी सांसदों पर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। बलूचिस्तान के नेता दानिश कुमार ने संसद में कहा था- मुझे इस्लाम के उपदेश न दिए जाएं।

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पाकिस्तान में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कोई नई बात नहीं है। इसी बीच पाकिस्तान के मीरपुरखास में 10 परिवारों के 50 हिंदुओं को मुसलमान बनाए जाने की जानकारी मिल रही है। धर्म परिवर्तन कार्यक्रम में पाकिस्तान सरकार के एक बड़े मंत्री का बेटा भी मौजूद था।
पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस मौके पर मजहबी मामलों के मंत्री मोहम्मद ताल्हा महमूद के बेटे मोहम्मद शमरोज खान भी मौजूद रहे। वो खुद भी सांसद हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मीरपुरखास डिवीजन के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले दस परिवारों के कम से कम 50 परिवार के सदस्यों ने इस्लाम कबूल किया है। इस धर्म परिवर्तन को एक स्थानीय मदरसा बैतुल इमान न्यू मुस्लिम कॉलोनी में आयोजित किया था।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बात करते हुए, संगठन के कार्यवाहकों में से एक कारी तैमूर राजपूत ने पुष्टि की है कि 10 परिवारों ने इस्लाम धर्म अपना लिया है। कारी तैमूर राजपूत ने दावा किया कि ये सभी लोग स्वेच्छा से इस्लाम में परिवर्तित हुए हैं। उन्हें किसी ने मजबूर नहीं किया है।
कारी तैमूर राजपूत ने बताया कि मंत्री के बेटे ने नए धर्मान्तरित लोगों से भी पूछताछ की कि क्या उन्होंने स्वेच्छा से धर्मांतरण समारोह में शामिल होने का फैसला किया कि किसी ने दबाव बनाया।
कारी तैमूर राजपूत ने कहा कि 50 लोगों ने धर्म परिवर्तन किया, जिनमें 23 महिलाएं और एक साल की बच्ची शामिल है। कारी के मुताबिक हिंदू से मुसलमान में धर्मांतरित लोग 2018 में धर्मान्तरित नए मुस्लिमों के लिए विशेष रूप से स्थापित एक लोकल कैंप में रहेंगे।
धर्मांतरित लोगों के लिए बनाए गए एक खास कैंप में चार महीनों तक रहने के दौरान नए धर्मान्तरित लोग अपने नए धर्म इस्लाम का अध्ययन करेंगे और धार्मिक नियम कायदों को सीखेंगे। इस दौरान धर्म परिवर्तन कराने वाला संगठन उनकी जरूरतों को पूरा करेगा, जिसमें कपड़े, भोजन और दवाएं शामिल हैं।
कारी तैमूर राजपूत ने दावा किया कि इन लोगों की जो भी जरूरत होगी, उसे वे पूरा करेंगे। राजपूत ने कहा कि सुविधा में चार महीने रहने के बाद, धर्मान्तरित लोग कहीं भी जा सकते हैं और जा सकते हैं।
पिछले पांच साल से सैकड़ों लोग इस्लाम में परिवर्तित हो चुके हैं और ऐसे कैंप में धार्मिक नियमों को सीख चुके हैं। कारी ने दावा किया कि उनका संगठन सिर्फ परिवारों का धर्मांतरण करवाता है। वे किसी एक व्यक्ति का धर्म नहीं बदलवाते क्योंकि इससे कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
दूसरी ओर इस धर्म परिवर्तन कार्यक्रम को लेकर वहां के कुछ हिंदू कार्यकर्ताओं ने दुख और गुस्सा व्यक्त किया है। धर्मांतरण के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले एक हिंदू कार्यकर्ता, फकीर शिव कुच्ची ने कहा, "ऐसा लगता है कि पाकिस्तान खुद इन धर्मांतरणों में शामिल है"।
शिव कुच्ची ने कहा कि स्थानीय समुदाय के सदस्य कई वर्षों से सरकार से इस प्रथा के खिलाफ कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन हमारी बात कोई भी नहीं सुनता।
शिव कुच्ची ने कहा कि सिंध में तो यह बहुत बड़ा मसला बन चुका है। अब तो इसे रोकने के बजाए कैबिनेट मिनिस्टर का सांसद बेटा भी इस तरह के प्रोग्राम में शामिल हो रहा है।
शिव कुच्ची ने कहा, "यह हम सभी हिंदुओं के लिए बहुत चिंता का विषय है। हम अब असहाय महसूस करते हैं।" कुच्ची ने कहा कि अधिकांश धर्मान्तरित आर्थिक रूप से वंचित थे और स्थानीय धार्मिक नेता इस तथ्य का लाभ उठाते हैं।












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