45 करोड़ साल पुराना यह समुद्री जीव दे सकता है भविष्य के ओमिक्रॉन से सुरक्षा, वैज्ञानिकों को मिला अहम सुराग
लंदन, 6 जनवरी: शार्क पांच-पांच बार बड़े पैमाने पर ऐस्टरॉइड के आघातों के बावजूद आज भी समुद्र का सबसे घातक शिकारी है। जबकि, इस दौराना डायनासोर ही नहीं, अनेकों-अनेक प्रजातियों का अस्तित्व मिट चुका है। हम आमतौर पर शार्क को एक बेहतरीन शिकारी के रूप में ही जानते रहे हैं। लेकिन, हो सकता है कि आने वाले दिनों में वह कोरोना वायरस का शिकारी बनकर हमारी रक्षा करे। शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने अपने परीक्षणों में इसका सुराग पाया है। उनके शुरुआती नतीजे बेहद सफल लग रहे हैं और हो सकता है कि आने वाले दिनों में वैक्सीन की जरूरत भी खत्म हो जाए।

शार्क ही करेगा कोरोना वायरस का शिकार!
वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्री जीव शार्क में कोरोना वायरस का इलाज छिपा हो सकता है। मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार शार्क में ऐसे छोटे-छोटे एंटीबॉडीज मौजूद हैं, जिन्हें इंसान के शरीर में डालकर भविष्य में किसी भी कोरोना वायरस या ओमिक्रॉन की तरह इसके वेरिएंट की रोकथाम की जा सकती है। इसके बाद वैक्सीन की जरूरत भी खत्म हो सकती है। शोधकर्ताओं को इस समुद्री शिकारी के खून में ऐसे सूक्ष्म प्रोटीन मिले हैं, जो कोरोना या इसके किसी भी रूप को मनुष्य की कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोक दे सकता है।

हमेशा के लिए खत्म हो सकती है ये महामारी-शोध
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एंटीबॉडी भविष्य में इस महामारी के प्रकोप को हमेशा-हमेशा के लिए मिटा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रोटीन को वैरिएबल एंटीजेन रिसेप्टर्स (वीएनएआर) के नाम से जानते हैं और जो शार्क में जो पाया जाता है वह मानव के प्रोटीन के 10वें हिस्से के आकार का होता है। इस स्टडी के ऑथर ऐरोन लेबीयू जो कि यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कोसिन-मैडिसन में पैथोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने अपने बयान में कहा है- 'बड़ी बात यह है कि ऐसे कई कोरोना वायरस हैं, जो इंसान में घुसने के लिए तैयार बैठे हैं।' उनके अनुसार, 'हम ये कर रहे हैं कि शार्क के वीएनएआर से एक हथियारघर तैयार करें, जो भविष्य में एसएआरएस (कोरोना वायरस) प्रकोप को कम कर सकता है।'

शुरुआती शोध का परिणाम सफल-शोधकर्ता
वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे कुछ और भी जानकारी हाथ लगेगी। अभी पहला ही शोध पत्र है, जिसमें एक संक्रामक रोग के खिलाफ यह प्रभाव दिखा रहा है। उन्होंने कहा है कि 'ये छोटे एंटीबॉडी की तरह के प्रोटीन कोने-कोने में घुस सकते हैं, जहां तक इंसान की एंटीबॉडी नहीं जा सकती।..........अनोखे जियोमेटरी तैयार कर सकते हैं। इससे यह प्रोटीन की संरचनाओं को पहचानने में सक्षम हो जाते हैं, जो कि हम मनुष्यों की एंटीबॉडी से नहीं हो सकता।' शोधकर्ताओं का कहना है कि शार्क के वीएनएआर से एक ऐसे कोरोना वायरस को रोकने में कामयाबी मिली है, जो मानव की कोशिकाओं को संक्रमित करने में सक्षम है, लेकिन अभी वह चमगादड़ों में ही पाया जाता है। गौरतलब है कि वुहान से फैला कोरोना भी चमगादड़ में ही मौजूद बताया जाता है।

वैक्सीन की भी जरूरत हो सकती है खत्म- रिसर्च
इसे पहले एसएआरएस के खिलाफ भी कारगर पाया गया है, जो 2003 की महामारी के लिए जिम्मेदार था। सबसे बड़ी बात है कि शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि उन्हें इसके जरिए कोरोना वायरस के खिलाफ एक ऐसी इम्यूनिटी विकसित करने का रास्ता मिल सकता है, जिससे करोड़ों लोगों को वैक्सीन लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इसके लिए यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा और स्कॉटिश बायोमेडिकल कंपनी एलास्मोगेन के साथ भी काम किया है। एलास्मोगेन के सीईओ कैरोलिन बेरेले भी इस संभावित नई दवा को लेकर बहुत ही उत्साहित हैं।

पेड़ों से भी पुराना है शार्क का अस्तित्व
माना जाता है कि शार्क महासागरों में 45 करोड़ वर्षों से हैं। यह अवधि पेड़ों से भी पुरानी है। यह शिकारी पांच बार बड़े पैमाने पर विलुप्त होने से बच चुके हैं। जबकि जीवाश्म गवाह हैं कि कैसे ऐस्टरॉइड डायनासोर समेत कई प्रजातियों के बड़े पैमाने पर मिट जाने के कारण बने हैं। लेकिन,शार्क ने खरबों साल में जो शक्ति पाई है उसने मानव की रक्षा के लिए एक नई उम्मीद पैदा कर दी है।












Click it and Unblock the Notifications