शी जिनपिंग की तीसरी बार ताजपोशी तय, 'संविधान' को तिलांजलि देने कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की बैठक

शी जिनपिंग का तीसरी बार चीन का राष्ट्रपति बनना करीब करीब तय हो गया है। कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की मीटिंग आज से बीजिंग में शुरू हो गई है।

हांगकांग, नवंबर 08: राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने वाले हैं और आज से चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में इस बात पर मुहर भी लगनी करीब-करीब तय मानी जा रही है। इस हफ्ते चीन के राजनीतिक अभिजात्य वर्ग कम्युनिस्ट पार्टी के 300 से ज्यादा सदस्य इकट्ठे हो चुके हैं और इस मौके पर कम्युनिस्ट पार्टी अपने 100 साल के चीनी इतिहास को लेकर अपनी उपलब्धियों पर एक प्रस्ताव पारित कर सकती है, लेकिन सबसे अहम बात ये है कि, कि अब ये साबित हो चुका है कि, शी जिनपिंग का सन्यास नहीं हो रहा है।

जिनपिंग का नहीं होगा सन्यास

जिनपिंग का नहीं होगा सन्यास

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 19वीं केंद्रीय समिति का छठा पूर्ण सत्र सोमवार को जब शुरू हुआ तो सीपीसी केंद्रीय समिति के महासचिव शी जिनपिंग ने सीपीसी केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की तरफ से अपने कामकाज को लेकर रिपोर्ट पेश कीस जिसमें कम्युनिस्टा पार्टी के पिछले 100 सालों में किए गये कामों का लेखा-जोखा लिखा हुआ था। लेकिन, 531 पन्नों वाले इस किताब में एक चौथाई से हिस्सा सिर्फ और सिर्फ शी जिनपिंग के 8 सालों के शासनकाल पर फोकस था और इसमें कहीं कोई भी संकेत नहीं है., जो इस तरफ इशारा करे, कि जिनपिंग अब जाने के बारे में सोच रहे हैं।

जिनपिंग ही एकमात्र मजबूत नेता

जिनपिंग ही एकमात्र मजबूत नेता

531 पन्नों के कन्युनिस्ट पार्टी के इस दस्वावेज में पार्टी को चीन का उद्धारक तो बताया ही गया है, इसके साथ ही साफ कर दिया गया है कि, केन्द्रीय समिति को पार्टी का पूर्ण समर्थन हासिल है और केन्द्रीय नेतृत्व के साथ पूरी पार्टी खड़ी है। चीन की समाचार एजेंसी द पीपल्स डेली ने रविवार को अपने वीचैट पब्लिक अकाउंट पर छठे पूर्ण सत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए एक पोस्टर प्रकाशित किया, और कहा कि प्रस्ताव दो प्रमुख सवालों के जवाब देने की कोशिश की जाएगी, "हम अतीत में क्यों सफल रहे? हम भविष्य में कैसे सफल होते रह सकते हैं?'' इस बैठक में शी जिनपिंग और आधुनिक चीन के निर्माता माउत्से तुंग को युगांतकारी नेता घोषित किया जा सकता है। 11 नवंबर तक चली इस बैठक को औपचारिक तौर पर यही माना जा रहा है कि, शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने के लिए ही बैठक का आयोजन किया जाएगा।

जिनपिंग के लिए बदलेगा इतिहास

जिनपिंग के लिए बदलेगा इतिहास

चायनीज कम्यूनिस्ट पार्टी के इतिहास में ये सिर्फ दूसरी बार होने वाला है कि, शी जिनपिंग इतिहास बदलने वाला हैं और माओ के बाद शी जिनपिंग को चीन के सबसे ताकतवर नेता बनने वाले हैं। न्यूजीलैंड में रहने वाले चीन के इतिहासकार गेरेमी आर बर्मे का कहना है कि, कम्युनिस्ट पार्टी की कोशिश है कि, शी जिनपिंग के इर्द-गिर्द ही नया टाइमस्केप बनाया जाए। दरअसल, 1945 में माओ के अधीन ऐसा प्रस्ताव पारित हुआ था, जिसने माओ को सत्ता पर कब्जा करने से चार साल पहले ही कम्युनिस्ट पार्टी पर अपना अधिकार मजबूत करने में मदद की। उसके बाद दूसरी बार ऐसी घटना 1981 में हुई थी, जब देंग शियाओपिंग ने भी संकल्प प्रस्ताव प्रकाशित नहीं होने दिया था और उन्होंने चीन के अर्थव्यवस्था के लिहाज से माओ की 'गलतियों' को पहचाना था और पार्टी के ऊपर अपना पूर्ण प्रभुत्व हासिल कर लिया था।

छवि सुधारने की कोशिश में जिनपिंग

छवि सुधारने की कोशिश में जिनपिंग

शी जिनपिंग को लेकर पिछले दो सालों से काफी नकारात्मक तस्वीर बनी है, लिहाजा पार्टी की कोशिश की है शी जिनपिंग की नकारात्मक छवि में सुधार लाया जाए। समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विश्लेषक एंथनी सैच मानते हैं, पिछले दो बार जैसा हुआ है, शी जिनपिंग के प्रस्ताव में उसपर ब्रेक नहीं लगेगा। चीनी राजनीति के विशेषज्ञ सैच ने कहा कि, "बल्कि, यह दिखाने का इरादा है कि शी उस पार्टी की स्थापना के बाद से एक प्रक्रिया के स्वाभाविक उत्तराधिकारी हैं जो उन्हें 'नए युग' में नेतृत्व करने के योग्य बनाती है।" उन्होंने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का जिक्र करते हुए कहा कि, "इसका उद्देश्य शी जिनपिंग को चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के 'शानदार इतिहास' के स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में मजबूत करना है।" सैच ने यह भी कहा कि, ''यह प्रस्ताव देंग के उस प्रस्ताव के मुताबिक पीछे हटने की है और 1949 से 1976 तक माओ युग की तुलना में कम आलोचनात्मक होगा।

माओ बनाम शी जनिपिंग

माओ बनाम शी जनिपिंग

सैच ने यह भी कहा कि, ''यह प्रस्ताव देंग के उस प्रस्ताव के मुताबिक पीछे हटने की है और 1949 से 1976 तक माओ युग की तुलना में कम आलोचनात्मक होगा।'' चीन में माओ के शासनकाल में लाखों लोग भूख से मर गये थे और हजारों लोगों को माओ ने विरोध करने पर मरवा दिया था। अपनी मौत से पहले चीन पर अपनी पकड़ सख्त करने के लिए माओ ने एक सांस्कृतिक क्रांति की शुरूआत कि, जिसे हिंसा का युग माना जाता है, जिसने चीन के राष्ट्रीय मानस को झकझोर दिया था।

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