MP Election: सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार पड़ सकता है भारी, क्या है मामला, जानिए?
MP Assembly Election 2023 के दौरान अभ्यर्थियों पर चुनावी समय में सोशल मीडिया पर भी आचार संहिता लागू होगी। ट्विटर, फेसबुक, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम, विकिपीडिया जैसे सोशल मीडिया पर प्रचार सामग्री पोस्ट करने पर अभ्यर्थियों को इसका खर्च भी व्यय लेखा में जुड़वाना पड़ेगा। इस संबंध में चुनाव आयोग ने भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आयोग ने माना है कि, सोशल मीडिया और वेबसाइट भी रेडियो-केबल टीवी की तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया है। जिस पर किए जाने वाले चुनाव प्रचार को कानूनी रूप दिया जाना चाहिए। इसके अलावा राजनैतिक दलों के उम्मीदवारों से भी कहा गया है कि बगैर अनुमति के सोशल मीडिया का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए न करें।

कुछ ऐसा है मामला
निर्वाचन आयोग द्वारा इस संबंध में जारी दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि सोशल मीडिया मसलन ट्विटर, फेसबुक, यू-ट्यूब विकिपीडिया और एप्स पर कोई भी विज्ञापन या एप्लीकेशन देने से पहले इसका प्रमाणीकरण कराकर अनुमति ली जाए। यह अनुमति मीडिया सर्टिफिकेशन ऑफ मॉनिटरिंग कमेटी देगी। वहीं सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन पर इंटरनेट कंपनी को किया गया भुगतान, प्रचार कार्य संचालन के लिए ऑपरेशन व्यय, कंटेंट के क्रिएटिव डेवलपमेंट के लिए किया गया व्यय। इस कार्य में लगे वर्कर और कार्यकर्ताओं की मजदूरी एवं वेतन पर होने वाले व्यय भी एम.सी.एम.सी कमेटी में जाकर जुड़वाना होंगे।
इनके खर्चे शामिल होंगे
चुनावी खर्चे में उन व्यक्तियों एवं टीम के वेतन व भत्ते भी शामिल होंगे, जो उम्मीदवार या राजनैतिक दल का सोशल मीडिया एकाउण्ट या वेबसाइट संचालित करने का काम करते हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि, सोशल मीडिया पर भी आचार संहिता पूरी तरह से लागू रहेगी। साथ ही वेबसाइट और सोशल मीडिया एकाउण्ट पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री इसके अधीन रहेगी। कुलमिलाकर, देखा जाए तो सोशल मीडिया और वेबसाइट पर चुनावी प्रचार के लिये भी अनुमति लेनी होगी। भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
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