Lok Sabha Election: इंदौर के किसानों ने बयां किए हाल, लोकसभा चुनाव में किसकी चुनेंगे सरकार, बताया
Loksabha Election अब नजदीक हैं, जहां लोकसभा चुनाव के मद्दे नजर प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में चुनावी माहौल तैयार होने लगा है। इंदौर लोकसभा में मतदान की तारीख 13 मई की है, जहां इससे पहले अब मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
वन इंडिया हिंदी की टीम मतदाताओं का मन जानने के लिए ग्राउंड जीरो पर पहुंची, जहां सबसे पहले वन इंडिया हिंदी की टीम ने अन्नदाता किसान से बातचीत की है। इस दौरान किसानों ने अपनी बात वन इंडिया हिंदी के साथ साझा की है, जहां उन्होंने सरकार के 5 साल का रिपोर्ट कार्ड बताया, तो वहीं आने वाली सरकार के साथ अपनी मांगे साझा की है।

सांवेर के रहने वाले युवा किसान की माने तो सांसद से हम मिलते हैं। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी हैं। काफी बार उनसे मुलाकात हुई है। गांव में सांसद निधि से काफी काम हुए हैं। नालियां बनी है, बोरवेल लगाए गए हैं, सड़के बनाई गई है। गांव से गांव जोड़े जा रहे हैं। अभी नई नीति के तहत खेत से गांव को जोड़ा जा रहा है। खेत में भी पक्के रास्ते बनाए जा रहे हैं। युवा किसान बताते हैं कि, संसद के काम से संतुष्ट है।
माली बड़ोदिया के रहने वाले एक किसान बालमुकुंद बताते हैं कि, मोदी सरकार ने काम अच्छे किए हैं। 5 साल में हमें फायदा मिला है। गांव में सड़क बनी है। बिजली की सुविधा है, और अन्य सुविधा भी है, बतौर किसान हमें बहुत फायदे मिले हैं। हमें खाद में दिक्कत नहीं आती है। बिजली भी अच्छी मिली, और इसी के साथ बहुत सारे फायदे मिले हैं। किसान बताते हैं कि, राम मंदिर अच्छा बना इसका भी प्रभाव दिखेगा। किसान बताते हैं की, फसलों के दाम भी बराबर से मिल जाते हैं।
किसान कपिल बताते हैं कि, वह रेवती के रहने वाले हैं। अभी तक कुछ भी नहीं मिला है। किसान परेशान है, गेहूं के भाव जो बोले गए हैं। वह नहीं मिल रहे, सभी अपनी-अपनी रोटी सेक रहे हैं, कोई भी विकास कार्य गांव में नहीं दिखे, एक अन्य किसान ने बताया कि, पुराना जो काम है, गांव में वही हुआ है। नया काम कुछ नहीं हुआ। राम मंदिर तो बनना ही था। सरकार ने गेहूं के लिए 2700 का वादा किया था, लेकिन अब 2400 में खरीद रही है, किसान मिट गया है, किसान से जो वादा किया गया, उसे उतना पैसा मिलना चाहिए। किसान पवन सिंह ने बताया कि, सांसद निधि से गांव में थोड़ा बहुत कम हुआ है।
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