Indore Temple Accident: हादसे ने दिया जीवन भर का गम, किसी ने बेटा खोया, तो किसी ने खोया पिता
इंदौर हादसे में किसी ने अपना 11 साल का बेटा खो दिया, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं अब इस दर्द से पीड़ित लोग अपने साथ हुए घटनाक्रम की बात जब भी किसी को बताते हैं तो उनकी आंखों से आंसू की धार बहने लगती है।

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Indore के पटेल नगर स्थित बलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में हुए दर्दनाक हादसे को अब 3 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके हादसे से मिले दर्द के जख्म अभी भी ताजे हैं, जहां इस हादसे में किसी ने अपना 11 साल का बेटा खो दिया, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं अब इस दर्द से पीड़ित लोग अपने साथ हुए घटनाक्रम की बात जब भी किसी को बताते हैं तो उनकी आंखों से आंसू की धार बहने लगती है। साथ ही उन्हें अपने भविष्य की चिंता सताती है, तो वहीं अपनों को खोने का गम भी उनके चेहरे पर साफ देखने मिलता है। दर्दनाक हादसे में 36 जिंदगियां खत्म हो गई, तो वहीं कई लोग अभी भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
11 साल का बेटा खोया
बावड़ी धंसने से हुए हादसे में लगभग 36 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जिसमें एक 11 साल का सोमेश भी शामिल था। सोमेश रोजाना मंदिर जाता था, और भगवान की सेवा करता था। 30 मार्च यानी रामनवमी के दिन भी सोमेश घर से भंडारे में सेवा देने के लिए निकला था, लेकिन उस दिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, जहां हवन के दौरान बावड़ी पर डला स्लैब धंस गया जिसमें सोमेश भी घटनाक्रम का शिकार हो गया। वहीं हादसे की सूचना मिलते ही सोमेश के परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, सोमेश कहीं दिखाई नहीं दे रहा था, और हर कोई बावड़ी में फंसे लोगों को बचाने के प्रयास में जुटा था। वहीं इसके बाद सोमेश समेत कई लोगों की लिस्ट प्रशासन को दी गई, जिसके बाद सेना बुलाई गई। वहीं 31 मार्च की सुबह 5:30 बजे सोमेश का शव बावड़ी से निकाला गया। इधर, अब घटनाक्रम के लगभग 3 दिन बीतने के बाद भी सोमेश की मां का रो-रो कर बुरा हाल है, जहां वह हर समय अपने बेटे को खोज रही है।
किसी के सिर से उठा पिता का साया
दर्द के सहारे दिन काटने वाले परिवारों में एक परिवार इंदर चांदकी का भी है, इंदर चांदकी के परिवार में दो बेटे और पत्नी के साथ ही पिता भी है। इंदर भी नियमित मंदिर जाते थे, और भगवान की पूजा अर्चना करते थे। रामनवमी के दिन इंदर हर दिन की तरह भगवान का पूजन अर्चन करने मंदिर पहुंचे थे, लेकिन इस दिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, जहां हवन के दौरान बावड़ी का स्लैब धंसने से इंदर भी हादसे का शिकार हो गए। वहीं जब परिजन इंदर को खोजते हुए मंदिर पहुंचे तो उन्हें मंदिर के बाहर इंदर की स्कूटर दिखाई दी, जिसके बाद उन्होंने इंदर की तलाश शुरू की, जहां रात लगभग 3 बजे इंदर की लाश बावड़ी से बाहर निकाली गई। इंदर की मौत के बाद से ही बूढ़ी मां और बहन का रो-रो कर बुरा हाल है। साथ ही अंदर के पिता और बच्चे भी इंदर को याद कर रहे हैं।
हादसे ने दिया जीवन भर का गम
इंदौर में हुए दर्दनाक हादसे ने कई लोगों को जीवन भर का गम दे दिया है, जहां कई लोगों के परिजनों का इस हादसे में दुखद निधन हो गया है, तो वहीं कई लोगों के परिजन अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं। इस हादसे में किसी का बेटा अपने माता-पिता से दूर चला गया, तो वहीं किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। हादसे के बाद नगर निगम की टीम ने निर्माणाधीन मंदिर और बावड़ी पर हुए अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया, तो वहीं आने वाले दिनों में निगम शापित बावड़ी को खत्म करने की तैयारी भी कर रहा है।
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