MP News: आजादी के बाद पहली बार इंदौर के राजवाड़ा में लगेगा 'मोहन दरबार’, पटियों-गद्दों पर बैठेगी सरकार
मध्य प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन आने वाला है। आजादी के बाद पहली बार इंदौर के भव्य राजवाड़ा महल में कैबिनेट बैठक का आयोजन होने जा रहा है। खास बात यह है कि बैठक किसी सामान्य कॉन्फ्रेंस हॉल में नहीं, बल्कि उस दरबार हॉल (गणेश हॉल) में होगी, जहां 1945 में अंतिम बार होलकर रियासत का दरबार सजा था।
राजवाड़ा के उस कक्ष में, जहां कभी अहिल्याबाई होलकर की नीतियों पर चर्चा होती थी, अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्री मंडल के सदस्य गद्दों और पटियों पर बैठकर शासन की योजनाओं पर मंथन करेंगे।

इतिहास से जुड़ती वर्तमान की नीतियां
गणेश हॉल को बिल्कुल वैसे ही सजाया जा रहा है जैसा होलकर कालीन दरबार में होता था। उस दौर में मंत्री और दरबारियों के लिए कुर्सियां नहीं होती थीं। वे पटियों और गद्दों पर बैठते थे। जमीन पर लोट (पीतल के पानी रखने के पात्र) रखे जाते थे जिन पर सिंह की आकृति बनी होती थी - अब इन्हें भी हूबहू वैसा ही तैयार कराया गया है।
ठीक 79 साल बाद, इस ऐतिहासिक स्थान पर फिर वही माहौल रचाया जा रहा है, जिसमें कभी राज्य की नीतियां तय होती थीं।
सीएम पहुंचे इंदौर, देखा अहिल्याबाई पर नाट्य मंचन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही इंदौर पहुंच चुके हैं। सोमवार शाम उन्होंने राजेंद्र नगर स्थित लता मंगेशकर सभागृह में आयोजित नाट्य मंचन में भाग लिया, जिसमें माँ अहिल्याबाई होलकर के जीवन प्रसंग को मंचित किया गया। इसके बाद उन्होंने मंत्रीगणों के साथ सराफा चौपाटी का भ्रमण भी किया।
कैबिनेट बैठक के बाद 'शाही भोज' की तैयारी
ऐतिहासिक बैठक के बाद मेहमानों के लिए इंदौर की मालवी, राजसी और पारंपरिक व्यंजनों से सजा भव्य भोज आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और इंदौर की खास पाक परंपरा झलकेगी।
नाश्ते में मिलेगा:
- पोहा, जलेबी, खमण, जोधपुरी कोफ्ता
- भुने हुए काजू-बादाम-किशमिश
- नींबू जल, छाछ, ग्रीन टी
- फल प्लेट और टॉफी वैरायटी
CM Mohan Yadav cabinet: दोपहर के भोजन में शामिल होंगे:
- झोलिया, मसाला छाछ, मालवी लड्डू
- बादाम चूरमा, आम रबड़ी, केसर श्रीखंड
- शाही दही बड़ा, इंदौरी हींग दाल कचौरी
- मुख्य व्यंजन: दाल, मालवी कढ़ी, शाही पनीर, स्टफ टिंडे, रामभाजी, भिंडी फ्राई, चावल
- रोटियां: तवा रोटी, ज्वार रोटी, टिक्कड़, नमकीन पूड़ी, बाटी
- मिठाई में: केसर पिस्ता कुल्फी और रोज फ्लेवर कुल्फी
ऐतिहासिक निर्णय, ऐतिहासिक स्थान पर
बैठक में प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है, जिसकी प्रतीक्षा पूरे प्रशासनिक तंत्र को है। लेकिन यह बैठक सिर्फ निर्णयों की नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और विरासत के सम्मान की भी एक मिसाल है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही कह चुके हैं कि, "हम नीतियों में नवाचार के साथ सांस्कृतिक चेतना को भी जोड़ना चाहते हैं। राजवाड़ा में कैबिनेट बैठक उसी विचार की एक झलक है।"
CM Mohan Yadav cabinet: राजवाड़ा, जहां इतिहास अब फिर से लिखा जाएगा
इंदौर का राजवाड़ा महल, जहां एक समय भारत की सबसे समृद्ध और न्यायप्रिय रियासतों में से एक होलकर साम्राज्य का केंद्र था, अब एक बार फिर शासन का केंद्र बन रहा है - भले ही कुछ समय के लिए।












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