Zydus drug Virafin:कोविड मरीजों पर कितनी जल्दी और कैसे असर करेगी ये दवा ? इसके बारे में सबकुछ जानिए
नई दिल्ली, 23 अप्रैल: देश कोविड की दूसरी लहर में भयानक संकट की दौर से गुजर रहा है। इस माहौल के बीच एक बहुत ही अच्छी खबर आई है। दवा बनाने वाली कंपनी जायडस कैडिला को उसकी एंटी-वायरल ड्रग 'विराफिन' के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) से इंरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। अभी तक की ट्रायल में इस दवा ने कुछ मरीजों पर अपना जो प्रभाव दिखा है, उससे उम्मीद है कि देश को मौजूदा संकट से उबारने में यह दवा रामबाण साबित हो सकती है। यह दवा अगर जल्दी दी जाए तो ऑक्सीजन की जरूरत भी कम पड़ जाती है और मरीज जल्दी से ठीक होने लगता है।

91.15 फीसदी मरीजों की रिपोर्ट 7 दिनों में निगेटिव
दवा कंपनी जायडस का दावा है कि जिन व्यस्क मरीजों पर 'विराफिन' इस्तेमाल की गई है, उनमें से 91.15 फीसदी मरीजों की कोविड-19 की जांच की आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट 7 दिनों में ही निगेटिव आ गई है। कोविड मरीजों को इस दवा की एक ही डोज त्वचा के नीचे दी जाती है, जिससे उसे बाहर से ऑक्सीजन देने की आवश्यकता कम हो जाती है और मॉडरेट केस में भी मरीज तेजी से ठीक होने लगते हैं। जायडस ने कहा है कि कोविड-19 मरीजों को जितनी जल्दी यह दवा दी जाती है, वह उतनी ही तेजी से ठीक होने लगते हैं और वह कई तरह की परेशानियों से भी बच जाते हैं।
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सांस लेने की दिक्कत दूर हो जाती है- जायडस
जायडस कैडिला ने कहा कि 'विराफिन' अस्पतालों/ या कोविड की इलाज के लिए बनाए गए सेटअप में मेडिकल स्पेसलिस्ट की प्रेस्क्रिप्शन पर उपलब्ध होगी। कंपनी का दावा है कि इस बात के सबूत हैं कि 'विराफिन' से सांस लेने में परेशानी की समस्या दूर होती है। 'विराफिन' का ट्रायल एकसाथ देश के 20 से 25 सेंटरों में किया गया है, जिसमें देखा गया है कि ऑक्सीजन सप्लिमेंट की आवश्यकता कम होने के साथ-साथ सांस संबंधी दिक्कतें ठीक हुई हैं, जो कि कोविड-19 के मरीजों की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस दवा ने दूसरे वायरल इंफेक्शन के खिलाफ भी अपना प्रभाव दिखाया है। कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर शर्विल पटेल ने कहा है,, 'यह मरीजों के लिए बहुत ही जरूरी वक्त में आई है और कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में गंभीर मामलों में हम इसे उपलब्ध कराएंगे।'

वायरल लोड तेजी से होता है कम- डॉक्टर पटेल
जायडस की ओर से कहा गया है, 'यह दवा तेजी से वायरल क्लियरेंस सुनिश्चित करता है और इसमें दूसरी एंटी-वायरल एजेंट्स की तुलना में कई तरह की विशेषताएं हैं।' थर्ड फेज के क्लिनिकल ट्रायल में पता चला है कि जिन मरीजों को विराफिन दी गई, उनमें मौजूदा इलाज के तरीके तुलना में 8 वें दिन काफी सुधार दिखाई पड़ा। कंपनी का कहना है कि 80.36 फीसदी संभावना है कि मरीज सातवें दिन कोरोना वायरस से ठीक हो जाएं, जो कि मौजूदा इलाज में 68.18 फीसदी संभावना रहती है। फेज 2 की ट्रायल में पाया गया था कि जिन कोविड मरीजों को विराफिन दी गई थी,उनमें वायरल लोड बहुत ही कम हो गया था। डॉक्टर पटेल ने कहा है, 'तथ्य ये है कि हम ऐसा इलाज दे पाने में सक्षम हुए हैं, जो अगर शुरू में दे दी जाए तो वायरल लोड को बहुत प्रभावी तरीके से कम कर सकता है, जिससे बीमारी को ठीक करने में बड़ी मदद मिल सकती है।'

अभी रेमडेसिविर का हो रहा है इस्तेमाल
बता दें कि भारत में इस दवा की शुरुआत में करीब 10 साल पहले लिवर की बीमारी हेपेटाइटिस सी के इलाज के लिए मंजूरी दी गई थी। अब इसकी कोविड-19 के इलाज के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी है। बता दें कि अभी कोरोना के इलाज के लिए रेमडसिविर इंजेक्शन जैसी दवा का इस्तेमाल हो रहा है, जो मूल रूप से इबोला वायरस के इलाज के लिए बनाई गई थी। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर डॉक्टर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी उसे कोविड-19 के लिए कारगर दवा नहीं माना है।
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