G-7 देशों ने चीन को चौतरफ़ा घेरा, चीन ने भी खुलकर किया पलटवार
ब्रिटेन के कॉर्नवॉल में चल रहे दुनिया के सात समृद्ध देशों के समूह जी-7 की बैठक के आख़िरी दिन चीन का मुद्दा छाया रहा.
शिनजियांग में वीगर मुसलमानों के मानवाधिकार हनन को लेकर जी-7 देशों के नेताओं ने चीन को फटकार लगाई.
हांगकांग के लिए ज़्यादा स्वायत्ता की मांग की गई. इसके लिए हांगकांग पर ब्रिटेन और चीन के साझा घोषणापत्र का हवाला दिया गया.
बात यहीं नहीं रुकी, चीन में कोरोना वायरस की उत्पत्ति की गहराई से जांच की भी मांग की गई.
ऐसा लगा जैसे जी-7 देशों के नेताओं चीन पर एकजुटता दिखाने की ठान ली थी. इस सिलसिले में चीन पर बयान भी जारी किया गया.
बयान में चीन के लिए कई संवेदनशील मुद्दों जैसे ताइवान जैसी दुखती नब्ज़ को लेकर भी उसे नसीहत दी गई.
चीन की जी-7 देशों को चेतावनी
चीन ने जी-7 देशों के नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे दिन कब के लद गए जब मुठ्ठी भर मुल्क दुनिया की किस्मत का फ़ैसला किया करते थे.
लंदन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, "हमने हमेशा इस बात पर यकीन किया है कि कोई भी देश चाहे वो बड़ा हो या छोटा, मजबूत हो या कमज़ोर, ग़रीब हो या अमीर, सब बराबर हैं और वैश्विक मामले सभी देशों से विचार-विमर्श के बाद ही निपटाए जाने चाहिए."
चीन का ये बयान ऐसे समय में आया है जब जी-7 देश चीन के समक्ष खुद को एकजुट दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
जी-7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल है.
ब्रिटेन के कॉर्नवॉल में हुए इस शिखर सम्मेलन में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में लोकतांत्रिक देशों और तानाशाही व्यवस्था वाले देशों के बीच संघर्ष की स्थिति बनी है.
पश्चिमी देश बनाम चीन
इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी ने कहा कि ग्रुप-7 को पश्चिमी देशों और चीन के बीच के मतभेदों पर खुलकर अपनी बात रखनी होगी.
मारियो द्रागी ने ये बात सम्मेलन के बयान को लेकर कही थी जिसमें चीन में मानवाधिकार हनन से लेकर कोरोना वायरस की उत्पत्ति जैसे मामलों का जिक्र किया गया.
रविवार को संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, "चीन में ऐसी तानाशाही है जो बहुआयामी शासन व्यवस्था में यकीन नहीं रखती है. लोकतांत्रिक देशों को दुनिया को लेकर जो नजरिया है, चीन उससे भी इत्तेफाक नहीं रखता है."
"हमें सहयोग करने की ज़रूरत है लेकिन हमें उन चीज़ों को लेकर भी स्पष्ट होने की ज़रूरत है जो हम उनसे शेयर नहीं करते हैं या फिर जिसे हम स्वीकार नहीं करते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी कहा है कि खामोश रहना अपराध में भागीदार होने जैसा है."
कैसे करेंगे चीन का मुकाबला
चीन को टक्कर देने की चाहत रखने वाले जी-7 नेताओं ने निम्न और मध्यम आय वाले देशों का समर्थन करने की योजना अपनाई है जिसके तहत जी-7 देश इन्हें बेहतर बुनियादी ढाँचा खड़ा करने में मदद करेंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि वो चाहते हैं कि अमेरिका समर्थित 'बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड' (बी3डब्ल्यू) प्लान, इसी तरह की चीनी योजना के सामने एक उच्च गुणवत्ता वाले विकल्प के तौर पर खड़ा हो.
चीन की 'बेल्ट एंड रोड परिजोयना' (बीआरआई) ने कई देशों में ट्रेनों, सड़कों और बंदरगाहों को सुधारने के लिए आर्थिक मदद की है. लेकिन इस बात को लेकर चीन की आलोचना भी होती रही है कि उसने कुछ देशों को कर्ज़ में दबाने के बाद, उन पर 'हुकूमत जमाने' की कोशिश भी की.
जी-7 नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि "वो मूल्यों द्वारा संचालित, उच्च-मानकों वाली, एक पारदर्शी साझेदारी की पेशकश करेंगे."
हालांकि, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि इस जी-7 योजना के तहत कैसे वित्त पोषित किया जाएगा. जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा कि जी-7 की यह योजना अभी उस चरण में नहीं है, जब वित्तपोषण के बारे में जानकारी सार्वजनिक की जा सकें.
कोरोना वैक्सीन की एक अरब डोज़ दान करेंगे
जी-7 देशों के नेताओं ने अगले साल तक कोरोना वैक्सीन की 1 अरब डोज़ दान करने का एलान किया है. यह जानकारी ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दी है. ब्रिटेन इस साल जी-7 सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है.
बोरिस जॉनसन ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसकी घोषणा करते हुए कि जी-7 देशों के नेता महामारी के दौर में 'राष्ट्रवादी' और शुरुआत के 'स्वार्थी' रुख से आगे बढ़ना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि जी-7 देशों के नेताओं ने अगले साल तक ग़रीब देशों को कोविड वैक्सीन की एक अरब डोज़ दान करने का प्रण लिया है. ये वैक्सीन या तो सीधे दी जाएंगी या फिर कोवैक्स स्कीम के तहत. इनमें से 10 करोड़ डोज़ अकेले ब्रिटेन देगा.
बोरिस जॉनसन ने कहा कि यह दुनिया भर में 'टीकाकरण के लिए एक और बड़ा कदम' है.
कॉर्नवॉल सम्मेलन की आलोचना
जी-7 देशों की ओर से चीन को बहुदलीय राजव्यवस्था की याद दिलाए जाने पर लंदन स्थित चीनी दूतावास ने कहा, "दुनिया में केवल एक ही तरह की बहुदलीय शासन व्यवस्था है और जो वास्तविक है, वो अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों पर आधारित है. इस की विशेषता सबके लिए बराबरी, सहयोग और पारस्परिक लाभ है, न कि छद्म बहुदलीय व्यवस्था जो एक छोटे से गुट या राजनीतिक वर्ग के हितों का पोषण करती हो."
दक्षिण पश्चिमी इंग्लैंड में जैसे जी-7 देशों का शिखर सम्मेलन खत्म होते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले गैरसरकारी संगठनों और वैश्विक मुद्दों पर काम करने वाले लोगों ने कोरोना महामारी और जलवायु परिवर्तन पर संगठन की घोषणाओं की आलोचना की.
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कॉर्नवॉल सम्मेलन को 'एक खोया हुआ अवसर' करार देते हुए कहा, "जब हमें वैक्सीन की 11 अरब खुराक की ज़रूरत थी तो केवल 1 अरब खुराक की योजना का एलान किया गया. हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण के लिए 50 अरब डॉलर की ज़रूरत थी लेकिन केवल 5 अरब डॉलर की घोषणा हुई. जब दुनिया के दौलतमंद देश मीटिंग कर रहे थे, उनके पास कुछ करने की शक्ति भी थी... मुझे लगता है कि ये उनके लिए नैतिक नाकामी की तरह है."
जी-7 देशों से पीएम मोदी की अपील
जी-7 सम्मेलन में शिरकत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोरोना वायरस से वैश्विक रूप से निपटने के लिए 'वन अर्थ, वन हेल्थ' की अपील की. इसके ज़रिए उन्होंने मांग की कि महामारी को देखते हुए जी-7 समूह के देश कोविड-19 वैक्सीन की पेटेंट सुरक्षाओं को हटा दे.
आधिकारिक बयान के अनुसार, पीएम मोदी ने भविष्य की महामारियों को रोकने के लिए एक वैश्विक साझेदारी, नेतृत्व और समन्वय की भी मांग की. उन्होंने कहा कि चुनौतियों से निपटने के लिए ये लोकतांत्रिक और पारदर्शी समाज की ज़िम्मेदारी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई लिखता है कि सूत्रों का कहना है कि मोदी की 'वन अर्थ, वन हेल्थ' दृष्टिकोण अपनाने की मांग का जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने समर्थन किया है.
सूत्रों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया और कई दूसरे देशों ने पीएम मोदी की कोरोना वायरस के पेटेंट में छूट देने की मांग का समर्थन किया है ताकि वैक्सीन उत्पादन में तेज़ी आए.
'बिल्डिंग बैक स्ट्रॉन्गर हेल्थ' नाम के जी-7 सत्र में बोलते हुए पीएम मोदी ने बताया कि कैसे भारत का पूरा समाज महामारी से लड़ने में लगा हुआ है और इसके लिए सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के हर स्तर पर कोशिशें हुई हैं. इस दौरान उन्होंने कोविड से संबंधित तकनीक में पेटेंट छूट के लिए जी-7 देशों का समर्थन मांगा.
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