तटीय संसाधनों को बढ़ाने के लिए भारत को करीब 31 अरब रुपए देगा विश्व बैंक
नई दिल्ली। विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशकों ने बुधवार को भारत को अपने तटीय संसाधनों को बढ़ाने, प्रदूषण, भू-क्षरण और समुद्र के स्तर में वृद्धि से तटीय आबादी की रक्षा करने और तटीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों में सुधार करने में मदद करने के लिए कुल 400 मिलियन (करीब 30.36 अरब रुपए) देने को मंजूरी दी है।

इस बहु-चरण दृष्टिकोण (एमपीए) के पहले चरण में तटीय और महासागर संसाधन दक्षता (ENOREORE) बढ़ाने के लिए विश्व बैंक $ 180 मिलियन (लगभग 13.66 अरब रुपए) प्रदान किए जाएंगे। भारत में MPA का यह पहला प्रयोग है, यह दृष्टिकोण महत्वपूर्ण विकास एजेंडा के लिए दीर्घकालिक समर्थन प्रदान करने के उद्देश्य से अपनाया गया है।

गौरतलब है अगले दशक में भारत की तटीय और समुद्री संपत्तियों की सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकता के प्रति मल्टीयर फाइनेंशियल सपोर्ट ने इसका समर्थन किया है। यह परियोजना भारत के समुद्र तटों और मैन्ग्रोव के पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करके तटीय संसाधनों की रक्षा में मदद करेगा। इसमें प्लास्टिक सहित अनुपचारित अपशिष्ट धाराओं से प्रदूषण का पता लगाने और स्थायी पर्यटन को समर्थन देने के लिए कमजोर तटीय समुदायों बढ़ावा देना शामिल है।

पहले चरण में, ENCORE आठ तटीय राज्यों (आंध्र प्रदेश, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, और पश्चिम बंगाल) और तीन तटीय केंद्र शासित प्रदेशों (दमन और दीव, लक्षद्वीप और पुदुचेरी) को कवर करेगा, जहां तटीय संसाधन काफी दबाव में हैं।
परियोजना के प्रमुख क्षेत्र गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में चल रहे विश्व बैंक समर्थित एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन परियोजना (ICZM) में काम करने के अनुभव और परिणामों पर आधारित हैं। परियोजना ने तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता बढ़ाने और तटीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों में सुधार के लिए स्केलेबल और टिकाऊ मॉडल प्रदर्शित करने में मदद की है।

इसकी उपलब्धियों में नवीनतम जलवायु परिवर्तन अनुमानों के आधार पर भारत के संपूर्ण मुख्य भूमि के तट के लिए तटीय हजार्ड लाइन के 7,800 किलोमीटर से अधिक की मैपिंग और परिसीमन शामिल है, साथ ही साथ यह भारत के 19,500 हेक्टेयर के मैंग्रोव की बहाली का समर्थन करता है। इससे तटीय कार्बन सिंक को बढ़ाने और तटीय परिसंपत्तियों और समुदायों को जलवायु और आपदा जोखिमों से बचाने में मदद मिली है।

भारत के तटीय संसाधनों के पुनर्निर्माण और विकास (IBRD) के लिए विश्व बैंक से मिलने वाली 400 मिलियन डॉलर ( करीब 31 अरब रुपए) की ऋण की अंतिम परिपक्वता अवधि 14.5 वर्षों की है, जिसमें कुल पांच साल की रियायत अवधि शामिल है।
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