#Women'sDaySpecial: पहली महिला फाइटर पायलट अवनि चतुर्वेदी ने वन इंडिया के साथ बातचीत में देश की बाकी लड़कियों से क्या कहा है!
अवनि पहली महिला फाइटर हैं और जब वह मिग-21 के साथ उड़ती हैं तो उनके नाम से आसमान गूंजने लगता है। अवनि ने अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर वनइंडिया के साथ कुछ बातचीत की। उन्होंने इस दौरान अपने सपनों और चुनौतियों के बारे में तो बताया।
नई दिल्ली। (ऋचा बाजपेई) अवनि, जिसका अर्थ होता धरा, यानी पृथ्वी यानी जमीन। यूं तो अक्सर आपने सुना है कि धरती और आकाश का कभी कोई मेल नहीं हो सकता लेकिन कोई है जिसकी वजह से आज ये दोनों एक दूसरे से बात करते हैं। हम बात कर रहे हैं देश की पहली महिला फाइटर पायलट फ्लाइंग ऑफिसर अवनि चतुर्वेदी की जिनका नाम आज से कुछ समय पहले तक शायद आपने नहीं सुना था। आज वह हर घर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं और लोग खासकर लड़कियां उनसे प्रेरणा लेती हैं। अवनि ने इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के उस सिलसिले में एक सुनहरा अध्याय जोड़ा है जिसकी शुरुआत आज से 25 वर्ष पहले हुई थी। आईएएफ ने सबसे पहले महिलाओं को कमीशन देना शुरू किया था और हेलीकॉप्टर ब्रांच में महिला ऑफिसर्स की तैनाती शुरू हुई। अब अवनि जब पहली महिला फाइटर हैं और जब वह मिग-21 के साथ उड़ती हैं तो उनके नाम से आसमान गूंजने लगता है। अवनि ने अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन तमाम लड़कियों को मैसेज दिया है जिन्होंने कुछ सपने देखे हैं और उन्हें पूरा करने के लिए वे दिन-रात मेहनत कर रही हैं।

ऋचा: एक लड़की होने के नाते फाइटर पायलट बनना आपके लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण था या ज्यादा कठिन था?
अवनि: फाइटर पायलट बनना अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप लड़की हैं या लड़का। बिल्कुल एक जैसी ट्रेनिंग होती है और इसमें कोई अंतर नहीं होता है। कठिन नहीं था लेकिन चुनौतीपूर्ण था और मैंने हर चुनौती को पूरा किया। हर चुनौती को पूरा करने के बाद आज मैं इस मुकाम पर हूं और मुझे काफी खुशी होती है।

ऋचा: फाइटर पायलट बनना और फाइटर जेट उड़ाना आपका सपना था, अब जबकि आपका यह सपना पूरा हो गया है तो आगे क्या ?
अवनि: फाइटर पायलट होना मतलब हर दिन चलने वाली प्रक्रिया। कई वर्षों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद आप एक कुशल फाइटर पायलट बनते हैं। मैं आज भी एक ट्रेनी हूं और अभी भी रोजाना मैं ट्रेनिंग से गुजरती हूं। मिग-21 बाइसन जो मेरे लिए एक नया एयरक्राफ्ट है, मैं हर दिन उसकी फ्लाइंग के लिए ट्रेनिंग करती हूं। मैं अभी अपना सोलो मिशन पूरा किया है और अभी काफी कुछ सीखना बाकी है। अभी मेरा पूरा ध्यान मिग-21 को फ्लाइ करने पर है और आगे एयरफोर्स को मेरे लिए जो भी एयरक्राफ्ट ठीक लगेगा मैं उसके साथ फ्लाइंग के लिए ट्रेनिंग करूंगी।

ऋचा: क्या आपको लगता है कि भारत महिलाओं को कॉम्बेट रोल में पूरी तरह से शामिल करने के लिए तैयार है?
अवनि: मेरा मानना है कि महिलाओं को आगे आकर पहल करनी होगी हर उस क्षेत्र में जाने के लिए जो उन्होंने अपने लिए सोचा है। उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी होगी और अपने विरोधियों को जवाब देना होगा। बाकी चीजें हासिल करने में फिर उन्हें कोई रोक नहीं सकता है। लेकिन उन्हें मेहनत करनी होगी क्योंकि अगर कोई सपना देखा है तो फिर उसे पूरा करने में कुछ चैलेंजस भी होंगे और बिना घबराए ही उन्हें पूरा करना होगा। अगर एक फाइटर पायलट के तौर पर आप मुझसे पूछेंगे तो मैं कहूंगी कि अभी मेरा पूरा ध्यान सिर्फ मेरे मिशन पर है। अगर एयरफोर्स को लगेगा कि मेरे लिए कोई मिशन है और मुझे पूरा करने के लिए कहा जाएगा तो मैं जरूर उसे पूरा करुंगी।

ऋचा: मिग के बारे में काफी कुछ कहा जा चुका है लेकिन आपने इसके साथ इतिहास रचा है। तो क्या आप थोड़ा नर्वस थीं फ्लाइंग के समय?
अवनि: मिग दुनिया का बेस्ट फाइटर जेट है और मैं खुद को काफी लकी मानती हूं कि मैंने इसे फ्लाई किया है। मैं बिल्कुल भी नर्वस नहीं थी बल्कि यह मेरे लिए एक गौरवशाली पल था कि मैंने मिग-21 बाइसन को उड़ाया है।

ऋचा: खुद को मानसिक तौर पर फिट रखने के लिए आप क्या करती हैं?
अवनि: जैसा कि मैंने कहा कि फाइटर पायलट होने का इस बात से कोई मतलब नहीं है कि आप लड़का हैं या लड़की। हम एक ही जैसी प्रक्रिया के तहत ट्रेनिंग से गुजरते हैं और एक ही जैसे नियमों का पालन करते हैं। हमें ट्रेनिंग के जरिए हर चुनौती और हर तरह की स्थिति का सामना करना सीखाया जाता है ताकि हम कॉकपिट में बैठकर अपने मिशन को पूरा कर सकें।

ऋचा: क्या आप फिल्में देखना पसंद करती हैं? अगर हां तो किस तरह की फिल्में आपको पसंद हैं?
अवनि: मैं हर तरह की फिल्में देखना पसंद करती हूं। इसके अलावा खाली समय में मुझे रनिंग करना काफी अच्छा लगता है, बैडमिंटन खेलती हूं और नॉवेल पढ़ने का भी शौक है।

ऋचा: वीमेंस डे पर आप वन इंडिया की रीडर्स और उन तमाम लड़कियों को क्या मैसेज देंगी जिनके लिए अब आप प्रेरणा बन चुकी हैं?
अवनि: मैं बस यही कहना चाहूंगी आप सपने जरूर देखिए और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करिए। कुछ भी असंभव नहीं है। साहसी बनें और ऑउट ऑफ द बॉक्स जाकर कुछ करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करिए।
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