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Bihar News: बिजली विभाग के 65 कार्यालयों में जीविका दीदियों ने संभाली स्वच्छता की जिम्मेदारी, 7000 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार

जीविका दीदियों ने 65 बिहार बिजली दफ्तरों में स्वच्छता की जिम्मेदारी संभाली है, और यह मॉडल एसबीपीडीसीएल (SBPDCL) और एनबीपीडीसीएल (NBPDCL) में भी अपनाया जा रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा संस्थानों में पहले से चल रही इस पहल से 7,000 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है, जिनकी मासिक आय 8,000 से 12,000 रुपये के बीच है। इससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया गया है।

राज्य में महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जीविका दीदियों ने अब बिजली विभाग के कार्यालयों में स्वच्छता की जिम्मेदारी संभाल ली है। ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) के बीच हुए समझौते के बाद राज्य के 65 बिजली कार्यालयों में सफाई व्यवस्था की कमान जीविका समूहों को सौंप दी गई है।

Women Cleanliness Crews Boost Bihar Power Offices

इस पहल के तहत हजारों महिलाएं स्वच्छता दूत के रूप में अपनी भूमिका निभा रही हैं। इससे न केवल सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। इस समझौते के जरिए 7000 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है, जिससे उनके आर्थिक सशक्तिकरण को भी मजबूती मिल रही है।

जीविका दीदियां पहले से ही विभिन्न सरकारी संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ समझौते के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अनुमंडल अस्पतालों में साफ-सफाई का कार्य वे पहले से कर रही हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में भी स्वच्छता की जिम्मेदारी जीविका समूहों द्वारा निभाई जा रही है।

अब इस पहल को आगे बढ़ाते हुए नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कार्यालयों में भी सफाई सेवाएं जीविका दीदियों को सौंपी गई हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

राज्यभर में वर्तमान में 700 से अधिक इकाइयों में जीविका दीदियां स्वच्छता सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इससे 7000 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है और उनकी मासिक आय 8,000 से 12,000 रुपये के बीच है, जो उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस पहल को महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और सेवा गुणवत्ता में सुधार का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस मॉडल को भविष्य में अन्य विभागों और संस्थानों में भी लागू करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ा जा सके।

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