पुरुष संतों से अलग होकर अपना अखाड़ा बनायेंगी महिला संत

दरअसल पुरूष वर्चस्व से स्वतंत्रत होने की महिला संतों की चाहत पुरानी है, जिसे वह अब अमली जामा पहनाने की कोशिश कर रही है। इससे पहले भी पांच बरस पूर्व महिला संतों के लिए शंकराचार्य पीठ की तर्ज पर पर्वत्याचार्य पद औा पीठ बनाने का प्रयास हुआ था, जिसका तब बहुत विरोध हुआ था। नागा संन्यासियों का विरोध इतना प्रबल था कि मायोतशक्ति और माँ ज्योतिषानंद को देश छोड़ के जाना पड़ा था। वे अमेरिका चली गयी थीं।
इस घटना से महिला संतों के इरादे मजबुत हुए हैं। उन्होने पांच बरस बाद अपने स्वतंत्र असितत्व के लिए कोशिश की है। महिला संतो की शिकायह है कि अखाड़ों में उनकी पहचान नहीं है जबकि उन्हें पुरूष संतो से अधिक का करना पड़ता है। उधर अखाड़ा परिषद और संत समाज ने महिला अखाड़ा बनाने का प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया है। महिलस संतों ने कहा है कि महिला अखाड़े में दीक्षित संत की अलग पहचान होगी। उसे साधना के लिए सुरक्षित वातावरण दिया जायेंगा। उन्होंने ने कहा है कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपराओं का बदलाव का अधिकार किसी को नहीं है। सभी अखाड़ो में महिला संतों को सम्मान मिला हुआ है।
जमकर हो रहा है महिला संतों का विरोध
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री मंहत ज्ञानदास ने कहा है कि तेरह अखाड़े है। इन सभी में अलग महिला बाड़े है। महिला संतों को अखाड़ों में न केवल सम्मान मिला हुआ है बलिक उन्हें महामंलेस्वर जैसे पदों पर आसीन किया हुआ है। इसके अलावा निरंजनी अखाड़े के सचिव नरेन्द्र गिरि, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता का के सचिव हठयोगी दिगम्बर, शंकराचार्य, स्वरूपानंद सरस्वती, ज्योतिष एवं द्वारिकापीठाधिस्वर, शंकराचार्य, वासुदेवनंद सरस्वती ने भी महिला अखाड़े का विरोध किया है। निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर संतोषी माता, आत्मशकित पीठ की परमाध्यक्ष माँ ज्ञानमयी विज्ञानानंद, महानिर्माणी के सचिव श्री मंहत रविन्द्रपुरी भी महिला अखाड़े के विरोध में खड़े है।
इन तमाम विरोध के बावजूद महिला शंकराचार्च त्रिकाल भंवता ने साफ कर दिया है चाहे विरोध हो और चाहे मान्यता न मिले या नहीं अब महिला अखाड़ा बनकर रहेगा। उन्होंने यह भी खुलासा किया इसमें शामिल होने के लिये कर्इ महिला संतो ने बात की है। इसेक अलावा धार्मिक क्षेत्र से जुड़ने की इच्छुक पचास युवतियां ने मुझसे सम्पर्क साधा हैं। वैसे महिला जगत गुरू अप्रणाम भारती ने महिला अखाड़ा देने की बात कही है। दशनामी संन्यासियों अखाड़ो की अध्यक्ष देव्यागिरि ने महिला अखाड़ा बनाने के प्रयास की सराहना की है। लखनऊ महिला संतों ने एक नर्इ परंपरा कायम करने की कोशिश के तहत अपना अलग अखाड़ा बनाने का फैसला किया है।












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