आंध्र प्रदेश में YS शर्मिला के इन पैतरों की बदौलत क्या कांग्रेस राज्य में पैर जमा पाएगी?
आंध प्रदेश में देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले अपने पैर जमाने की कोशिश में जुटी हुई है। 2014 और 2019 के राज्य में विधानसभा और आम चुनाव में बुरी तरह असफल रही कांग्रेस राज्य में पुनरुद्धार की तलाश में है। विश्लेषकों के अनुसार राज्य का विभाजन आंध्र की आबादी की भावनाओं के खिलाफ गया, जिससे कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा कम हो गई।

बता दें जनवरी माह में कांग्रेस पार्टी ने संयुक्त आंध्र प्रदेश के दो बार के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिवंगत वाईएस राजशेखर रेड्डी की बेटी वाईएस शर्मिला रेड्डी से हाथ मिला लिया है, जिसके बल पर कांग्रेस की आंध्र प्रदेश में पुनरुद्धार की एक झलक नजर आई लेकिन कांग्रेस का लगभग पूरा कैडर और वरिष्ठ नेता अब उनके भाई आंध्र प्रदेश की सत्ता पर काबिज वाईएस जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी के साथ जुड़े हुए हैं।
21 जनवरी को आंध्र प्रदेश की राज्य इकाई प्रमुख की कुर्सी संभालने के बाद वाईएस शर्मिला दो प्रमुख मुद्दों की वकालत कर रही हैं जिसमें शुरुआती अक्षर "वाईएस" पर उनका अधिकार और आंध्र प्रदेश के लिए "विशेष दर्जा" दिलाने की लड़ाई शामिल है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस इन मुद्दों के साथ आगे बढ़ सकती है?
बता दें वाईएसआरसीपी शर्मिला के "वाईएस विरासत" पर उनके किसी भी दावे को नकारने का लगातार प्रयास कर रही है हालांकि अपने सगे भाई से बगावत कर अलग हुई शर्मिला दृढ़ता से अपने अधिकार का दावा कर रही हैं। इतना ही नहीं अपने भाई के साथ साझा रक्त संबंधों पर जोर देती है, कहती हैं नाम में क्या रखा है? वाईएसआरसीपी और आंध्र प्रदेश कांग्रेस की "वाईएस विरासत" की लड़ाई में, यही सब कुछ है!
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के दो बड़े राजनीतिक परिवारों के बीच टूट के बाद से उनके बीच ही राजनीतिक लड़ाई चल रही है।
जहां एक ओर राज्य में टीडीपी का नेतृत्व अभिनेता से नेता बने एनटी रामाराव के दामाद चंद्रबाबू नायडू कर रहे हैं और राज्य भाजपा प्रमुख एनटीआर की बेटी दग्गुबाती पुरंदेश्वरी हैं।
वहीं वाईएसआरसीपी का नेतृत्व दिवंगत राजशेखर रेड्डी के बेटे वाईएस जगन मोहन रेड्डी कर रहे हैं और कांग्रेस का नेतृत्व अब उनकी बेटी वाईएस शर्मिला कर रही हैं।
राज्य के दो दिवंगत नेताओं की बेटियां वाईएसआर और एनटीआर की विरासत के लिए संघर्ष कर रही हैं, जबकि जगन और नायडू महत्वपूर्ण नियंत्रण बनाए हुए हैं।
इस बारे में हैदराबाद विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ई वेंकटसु और सीएसडीएस लोकनीति के सदस्य ने कहा वाईएसआरसीपी द्वारा "वाईएसआर शासन" का वादा - 2019 चुनाव जीतने के लिए महत्वपूर्ण था।
उन्होंने कहा दिवंगत वाईएसआर को आंध्र प्रदेश में लोगों के कल्याण के लिए एक लोकप्रिय व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, और उनके परिवार के सदस्य मतदान व्यवहार को प्रभावित करने के लिए उनकी विरासत पर भरोसा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा राज्य के ध्रुवीकृत राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए - एक तरफ टीडीपी और उसकी सहयोगी जन सेना पार्टी और दूसरी तरफ वाईएसआरसीपी - आंध्र में राष्ट्रीय दलों की भूमिका न्यूनतम है।
प्रोफेसर वेंकटसु ने कहा शर्मिला के प्रयासों को वाईएसआरसीपी वोटों को विभाजित करने की संभावना के साथ, कुछ जगह हासिल करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें वाईएसआर सहानुभूति रखने वाले शामिल हैं। हालांकि कांग्रेस राज्य में कितना अच्छा प्रदर्शन करेगी यह अभी देखा जाना बाकी है, क्योंकि वह केवल दो सप्ताह के लिए पद पर हैं।आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वाईएसआरसीपी नेता क्यों अनिच्छुक हैं, जानें वजह?












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