Winter Session: शीतकालीन सत्र में पेश होगा परमाणु ऊर्जा विधेयक, निजी निवेश के पक्ष में सरकार के हैं ये 5 मजबूत
Winter Session: संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025 भी पेश होगा। प्रस्तावित 10 बिलों में सबसे ज्यादा चर्चा इसको लेकर ही है। यह विधेयक भारत के ऊर्जा ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। बिल अगर कानून बनता है, तो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश का मार्ग खुलेगा। विपक्षी दलों के भारी विरोध के बावजूद सरकार के पास इसके पक्ष में अपने मजबूत तर्क हैं।
सरकार का मानना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। साथ ही, देश के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों, बढ़ती बिजली मांग और औद्योगिक विस्तार को भी नई गति देगा। परमाणु उर्जा का इस्तेमाल औद्योगिक विकास से लेकर नए इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी है।

Nuclear Energy Bill 2025 के पक्ष में दमदार तर्क
- भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वर्तमान ढांचा इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने में सक्षम नहीं है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी से परियोजनाओं की गति, प्रबंधन और निर्माण क्षमता में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे ऐसी परियोजनाएं, जो अभी फंडिंग या देरी से प्रभावित हैं तेजी से आगे बढ़ सकेंगी।
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- सरकार परमाणु ऊर्जा में 49% तक विदेशी और घरेलू इक्विटी निवेश की अनुमति पर विचार कर रही है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्यमों में पूंजी की बड़े पैमाने पर जरूरत होती है। निजी निवेश सरकार की निर्भरता कम करेगी।
- निजी फंडिंग मिलने से नई परियोजनाएं शुरू होंगी और पुराने प्लांट्स का विस्तार भी तेज होगा। इससे सरकार पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।
- निजी संस्थाओं के प्रवेश से इस क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी इनोवेशन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) जैसी आधुनिक तकनीकें भारत में तेजी से विकसित और लागू की जा सकेंगी। एसएमआर तकनीक को सुरक्षित, कम जगह में स्थापित होने वाली और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
डीकार्बोनाइजेशन के मिशन को मजबूती
भारत सरकार ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। परमाणु ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने से कोयला जैसी जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी और स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बढ़ेगा। यह कदम औद्योगिक क्षेत्रों और भारी बिजली उपयोग वाले सेक्टर्स को भी स्वच्छ विकल्प उपलब्ध कराएगा।
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विधेयक के लागू होने पर सरकारी एकाधिकार में होगा बदलाव
विधेयक 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन लाएगा, जिससे यूरेनियम खनन, आयात, प्रसंस्करण और प्लांट निर्माण पर दशकों पुराना सरकारी एकाधिकार समाप्त हो जाएगा। हालांकि, ऑपरेशन, गुणवत्ता नियंत्रण और संवेदनशील सुरक्षा कार्य अब भी सरकारी कंपनियों, जैसे कि एनपीसीआईएल के हाथ में ही रहेंगे। निजी कंपनियां भूमि, पूंजी, निर्माण और प्रौद्योगिकी विकास में अहम भूमिका निभाएंगी।
Winter Session में पेश होंगे अहम बिल
विंटर सेशन में कई अहम विधेयक पेश किए जाएंगे। इसमें परमाणु उर्जा विधेयक के अलावा, उच्च शिक्षा संशोधन विधेयक समेत कुल 10 बिल पेश किए जाएंगे। सरकार की कोशिश रहेगी कि सदन का कामकाज ठीक तरीके से चले और ज्यादा से ज्यादा बिल पास कराए जा सकें। दूसरी ओर विपक्षी दल भी सरकार को घेरने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ेगी।
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