Winter Session: शीतकालीन सत्र में 10 नए बिल, पिछले सत्र के इन दो बिलों पर भी होगी चर्चा, कुल 14 विधेयक लिस्टेड
Winter Session: संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। इस सत्र में कुल 14 बिल पेश होंगे। 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में 15 बैठकें होंगी। इस सेशन में 10 अहम विधेयक पारित किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, पिछले सत्र के दो बिल भी इस बार विचार और पारित होने के लिए सूचीबद्ध हैं। साथ ही, वित्त वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा। इस तरह से कुल 14 बिल पेश होंगे।
बिहार चुनाव नतीजों से उत्साहित एनडीए भी विपक्ष के हर वार को नाकाम करने की पूरी तैयारी के साथ आएगी। मानसून सत्र में सदन के कामकाज का ज्यादातर वक्त विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया था। सरकार की कोशिश रहेगी कि इस बार सदन सुचारू रूप से चल सके।

Winter Session: सड़कों, कंपनियों और बाजार से जुड़े अहम बिल
- इस सत्र में सरकार कुछ पुराने कानूनों को भी आसान और आधुनिक बनाने के लिए अहम कदम उठा सकती है। इसमें कई अहम बिल शामिल हैं:
1. नेशनल हाईवेज (संशोधन) बिल: राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए जमीन अधिग्रहण को तेज, पारदर्शी और सरल बनाने का लक्ष्य।
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2. कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2025: कंपनी अधिनियम 2013 और एलएलपी एक्ट 2008 में बदलाव के जरिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना सरकार का उद्देश्य है।
3. सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड (एसएमसी) बिल, 2025: सेबी अधिनियम, डिपॉजिटरी अधिनियम और प्रतिभूति अनुबंध विनियमन अधिनियम ये तीन कानून अभी लागू हैं। इन तीन पुराने कानूनों को मिलाकर 'सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड' बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
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Winter Session में कई और बिल भी होंगे पारित
संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में भी बदलाव लाने पर विचार कर रही है। एक समिति को इसकी समीक्षा का काम दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी और सेक्शन 34 में संशोधन की जरूरत की बात कही जा रही थी। इसे देखते हुए नया प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
इसके अलावा, 'परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025' भी महत्वपूर्ण बिल है। इस बिल के कानून बनने पर नागरिक परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का रास्ता बन जाएगा। अब तक यह क्षेत्र पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहा है।
उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव का प्रस्ताव
इसके अलावा, सत्र के एजेंडे में हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल भी शामिल है। इस बिल के जरिए ऐसे आयोग की स्थापना का सुझाव है, जिससे विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों को ज्यादा स्वायत्तता दी जा सकेगी।
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