Winter Session: संसद का शीतकालीन कब से कब तक? कितनी होगी बैठकें क्या-क्या होंगे मुद्दे, हर डिटेल
Parliament Winter Session: संसद का शीतकालीन सत्र (Winter Session 2025) इस बार 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक आयोजित होगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी दी।
यह सत्र 19 दिनों का होगा, जिसमें कुल 15 बैठकें तय हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह सत्र न केवल विधायी कामकाज बल्कि राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

पहले मानसून सत्र में हंगामा, अब सर्दी में गरमाएंगे मुद्दे
पिछले मानसून सत्र में संसद की कार्यवाही हंगामों की भेंट चढ़ गई थी। उस वक्त राज्यसभा के तत्कालीन उपसभापति जगदीप धनखड़ ने सत्र के पहले दिन ही इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पूरा सत्र बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) विवाद को लेकर विपक्षी दलों के शोर-शराबे में गुजर गया।
लोकसभा में 120 घंटे चर्चा के लिए तय थे, लेकिन सिर्फ 37 घंटे काम हो सका, जबकि राज्यसभा में महज 41 घंटे की चर्चा चली। इसके बावजूद संसद ने 27 विधेयक पारित किए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहा गिरफ्तार PM और CM को पद से हटाने वाला संविधान संशोधन बिल, जिसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव पारित हुआ।
इस बार विपक्ष का मूड टकराव वाला
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद शीतकालीन सत्र में विपक्ष का तेवर और तीखा रहने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष सरकार को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) पर घेरने की तैयारी कर चुका है। देश के कई राज्यों में मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोप लगने के बाद यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी गर्म रह सकता है।
सरकार लाएगी बड़े बिल, कानून सुधार पर फोकस
सरकार इस सत्र में कई अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें संविधान के 129वें और 130वें संशोधन बिल, जन विश्वास विधेयक और इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बिल प्रमुख हैं। ये बिल देश की कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।
संसदीय सूत्रों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता होगी कि इन विधेयकों को जल्द से जल्द पारित कराया जाए ताकि विकास से जुड़े प्रावधानों को गति दी जा सके।
लोकतांत्रिक बहस की उम्मीद, लेकिन टकराव भी तय
सरकार की ओर से उम्मीद जताई जा रही है कि सत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप सार्थक बहस होगी। लेकिन विपक्ष के तीखे तेवरों को देखते हुए माना जा रहा है कि हर बड़े मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस होगी।
किरेन रिजिजू ने कहा कि, "यह सत्र जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का अवसर होगा, और हमें रचनात्मक चर्चा की उम्मीद है।" हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि SIR और चुनावी रणनीतियों पर बहस इस सत्र का पूरा माहौल तय करेगी।
अंतिम सत्र, अगली राजनीति की दिशा भी तय करेगा
यह संसद का इस साल का अंतिम सत्र होगा, इसलिए यह कई दृष्टि से निर्णायक साबित हो सकता है। सरकार चाहेगी कि विकास और विधायी सुधार के एजेंडे पर काम आगे बढ़े, जबकि विपक्ष जनहित और पारदर्शिता के मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
संक्षेप में कहा जाए तो दिसंबर का यह सत्र ठंड में भी सियासत को गर्म रखने वाला है, जहां हर बहस 2025 की राजनीति की अगली दिशा तय करेगी।












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