क्या 2024 में पसमांदा मुसलमान बीजेपी को सत्ता दिलाने में मददगार साबित होंगे ?

2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति में पसमांदा मुसलमान अहम किरदार साबित हो सकते हैं। पीएम मोदी की ओर से बार-बार इस समाज का जिक्र करना बहुत मायने रखता है। अगर बीजेपी सफल हुई तो विपक्ष की मुश्किल और बढ़ जाएगी।

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क्या भाजपा बड़ी तादाद में मुसलमानों को अगले चुनावों में उसे वोट देने के लिए तैयार कर सकती है। क्या कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली पार्टी अन्य जातियों की तरह ही, पिछड़े और गरीब मुसलमानों को भी अपने साथ जोड़ सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों ने जिस तरह से एकजुटता की बेचैनी दिखाई है, उससे इस तरह के सवाल उचित हो गए हैं। यह बात अब छिपी नहीं रह गई है कि बीजेपी में शीर्ष स्तर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि मुसलमानों में जो गरीब हैं, पिछड़े हैं, जिन्हें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ, देश के अन्य समाजों की तरह ही बिना भेदभाव के मिला है, उन्हें भी पार्टी से जोड़ा जाए। क्योंकि, बीजेपी से जुड़े कुछ मुस्लिम नेताओं की ओर से यह दावा भी किया जाता है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक साल पहले यह बखूबी हो भी चुका है।

कौन हैं पसमांदा मुसलमान ?

कौन हैं पसमांदा मुसलमान ?

पसमांदा एक फारसी शब्द है, जिसका मतलब है 'जो पीछे छूट चुका है।' राजनीतिक तौर पर पसमांदा मुस्लिम शब्द का इस्तेमाल पिछड़े तबके के मुसलमानों के लिए होता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में मुस्लिम आबादी में पसमांदा मुसलमानों की जनसंख्या 85 से 90 फीसदी तक आंकी जाती है। पसमांदा मुसलमानों को लेकर एक यह भी बात प्रचलित है कि इनमें से ज्यादातर के पूर्वज हिंदू थे। जिन्होंने, सदियों पहले मुस्लिम हमलावरों के डर से इस्लाम कबूल लिया था।

पसमांदा मुस्लिम और पिछड़ी जाति

पसमांदा मुस्लिम और पिछड़ी जाति

यह भी कहा जाता है कि 40% पसमांदा मुसलमान अन्य पिछड़े वर्ग में आते हैं, जो कि हिंदुओं में भारतीय जनता पार्टी का बहुत बड़ा वोट बैंक बन चुका है। यह वो वर्ग है, जहां सोशल इंजीनियरिंग करके बीजेपी ने एक तरह से अपनी अजेय सियासी इमारत खड़ी कर ली है। इनकी चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्याणकारी योजनाओं को लेकर खास तौर पर पसमांदा मुसलमानों का नाम लिया है।

पसमांदा मुस्लिमों के बारे में पीएम मोदी ने क्या है ?

पसमांदा मुस्लिमों के बारे में पीएम मोदी ने क्या है ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यकों में भी खासतौर पर पसमांदा मुस्लिम तक लाभ पहुंचाने का संकल्प जताया है। उन्होंने कहा, 'हमें देश के दो सौ से अधिक जिलों और 22 हजार से अधिक गांव में रहने वाले जनजातीय लोगों के बीच जल्द से जल्द विभिन्न तरह की सुविधाएं पहुंचानी पड़ेंगी। इसमें हमारे अल्पसंख्यकों में भी विशेष रूप से मुसलमानों में हमारे पास पसमांदा मुसलमान हैं।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले जनवरी में दिल्ली में आयोजित बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी इसी तरह से अपनी सरकार का इरादा साफ कर चुके हैं।

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    पसमांदा मुसलमान और भाजपा

    पसमांदा मुसलमान और भाजपा

    भाजपा ने 2022 से ही पसमांदा मुसलमानों पर खास ध्यान देना शुरू किया है। इनसे संबंधित कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर में लखनऊ में एक सम्मेलन आयोजित किया या था, जिसमें पसमांदा मुस्लिम समाज से कई प्रभावशाली लोग पहुंचे थे। पिछले साल जुलाई में जब हैदराबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी हुई थी, तब भी पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि पसमांदा मुसलमानों तक पहुंचें।

    दाऊदी बोहरा मुसलमानों के बीच भी लोकप्रिय हैं मोदी

    दाऊदी बोहरा मुसलमानों के बीच भी लोकप्रिय हैं मोदी

    मुसलमानों में सिर्फ पसमांदा मुस्लिम ही नहीं, अन्य समाज भी हैं, जिसपर भारतीय जनता पार्टी की नजर रही है। इनमें से दाऊदी बोहरा मुसलमान भी शामिल हैं। पीएम मोदी ने इसी महीने मुंबई में दाऊदी बोहरा समाज के एक कार्यक्रम का उद्घाटन भी किया था। यहां उन्होंने खुद को बोहरा समाज के परिवार के सदस्य की तरह बताया था। कुल मिलाकर बीजेपी ने मुसलमानों को रिझाने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है, अगर इसमें उसे कामयाबी मिल गई तो विपक्ष को बहुत बड़ा झटका लग सकता है।

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