कोरोना वायरस के नए वेरिएंट से क्या आएगी महामारी की तीसरी लहर? WHO की चीफ साइंटिस्ट ने दिया जवाब
त्योहारी सीजन के बीच कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के नए सबवेरिएंट 'एक्सबीबी' ने एक बार फिर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
कोरोना वायरस ओमिक्रॉन का एक्सबीबी सबवेरिएंट (XBB subvariant of Omicron Coronavirus): त्योहारी सीजन के बीच कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के नए सबवेरिएंट 'एक्सबीबी' ने एक बार फिर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पुणे में भी ओमिक्रॉन के एक सबवेरिएंट का मामला मिलने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि कोरोना वायरस का ये नया रूप कितना खतरनाक है और क्या इससे महामारी की एक और लहर आएगी? इन सारे सवालों पर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने जवाब दिया है।

कितना खतरनाक है नया सबवेरिएंट?
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, 'हो सकता है कि ओमिक्रॉन के एक्सबीबी सबवेरिएंट से कुछ देशों में महामारी की नई लहर देखने को मिले, लेकिन अभी तक किसी भी देश से ऐसा कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर कहा जा सके कि ये नया सबवेरिएंट पिछले वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक और संक्रामक है।'

'एंटीबॉडी को नुकसान पहुंचाता है ये वायरस'
सौम्या स्वामीनाथन ने आगे बताया, 'ओमिक्रॉन वेरिएंट के 300 से ज्यादा सबवेरिएंट हैं, लेकिन मेरा मानना है कि फिलहाल सभी की चिंता एक्सबीबी सबवेरिएंट को लेकर है, जोकि एक रिकॉम्बिनेंट (पुन:संयोजक) वायरस है। इससे पहले भी हम कई रिकॉम्बिनेंट वायरस देख चुके हैं। ये वायरस एंटीबॉडी को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए, हो सकता है कि कुछ देशों में महामारी की एक और लहर देखने को मिले।'

'मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग सबसे ज्यादा जरूरी'
विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट ने ज्यादा जानकारी देते हुए कहा, 'हम लोग BA.5 और BA.1 के डेरिवेटिव को भी ट्रैक कर रहे हैं, जो कहीं ज्यादा संक्रामक और रोगप्रतिरोधक क्षमता विरोधी हैं। जैसे-जैसे यह वायरस विकसित होता जाता है, और ज्यादा संक्रामक होता चला जाता है। फिलहाल कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए शुरुआती तौर पर सबसे अहम कदम हैं- मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग, जिन्हें लगातार और प्रभावी तरीके से अपनाए जाने की जरूरत है।'

'अलग अलग वेरिएंट्स को ट्रैक करना होगा'
सौम्या स्वामीनाथन ने बताया, 'हमें लगातार कोरोना वायरस की स्थिति को मॉनिटर और ट्रैक करना होगा। हम देख रहे हैं कि लगभग सभी देशों में कोरोना वायरस की टेस्टिंग में गिरावट आई है। यही नहीं, पिछले कुछ महीनों में जीनोम सर्विलांस भी कम हुई है। हमें ऐसा ना करते हुए जीनोम सर्विलांस को लेकर तय रणनीति के साथ फिलहाल कम से कम एक सैंपलिंग व्यवस्था करनी होगी, ताकि कोरोना वायरस के अलग अलग वेरिएंट्स को ट्रैक कर सकें, जैसा कि अभी तक हम करते आए हैं।'












Click it and Unblock the Notifications