मायावती के भतीजे आकाश आनंद फूंक पाएंगे बसपा की राजनीति में जान?

Mayawati ka bhatija Akash Anand: बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को ऐसे समय में अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है, जब पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। मायावती ने यह कदम 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले उठाया है।

आकाश आनंद बसपा की राजनीति में तब से चर्चा में आए, जब 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। तभी मीडिया को आकाश आनंद की झलक मिली और उन्हें बहनजी का संभावित उत्तराधिकारी कहा जाने लगा।

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विधानसभा चुनावों में नहीं मिली कामयाबी
लेकिन, मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को सबसे बड़ी सियासी जिम्मेदारी हाल में संपन्न हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा चुनावों में सौंपी थी। इनको लेकर पार्टी के नेताओं में काफी उम्मीदें थीं।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह ने चुनावों से पहले उन्हें 'यंग ब्लड' बताते हुए कहा था, 'उनको लेकर युवाओं में बहुत क्रेज है....बहनजी के परिवार के सदस्य और उनके भतीजे हैं....लोगों को लगता है कि ये बहुजन मूवमेंट को आगे बढ़ा पाएंगे।'

चारों राज्यों में खराब हुआ बीएसपी का प्रदर्शन
लेकिन, अगर इन चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों को देखें तो मायावती ने ऐसे युवा नेता पर अपना सबसे बड़ा राजनीतिक दांव लगाया है, जो पहली ही परीक्षा में 'फेल' नजर आ रहे हैं।

क्योंकि, राजस्थान विधानसभा चुनावों में बीएसपी को पिछली बार 6 सीटें मिली थीं और 4% से ज्यादा वोट हासिल हुए थे। पार्टी के सारे एमएलए बाद में कांग्रेस के साथ चले गए थे। मायावती ने इसे बहुत ही गंभीरता से लेते हुए भतीजे के युवा खून के दम पर अबकी बार काफी उम्मीद लगाई थी।

लेकिन, राजस्थान में न सिर्फ बीएसपी की 4 सीटें कम होकर मात्र 2 रह गई हैं, बल्कि वोट शेयर भी 1.82% रह गया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी पार्टी की लुटिया डूबी है।

पार्टी को इस बार छत्तीसगढ़ में 2.09% से ज्यादा, एमपी में 3.32% और तेलंगाना में 1.38% वोट मिले हैं। पार्टी को पहले दो राज्यों में पिछली बार क्रमश: 3.87% और 5.01% वोट मिले थे।

तब छत्तीसगढ-मध्य प्रदेश में पार्टी दो-दो सीटें भी जीती थी। तेलंगाना में पिछली बार बसपा ने 106 सीटें लड़ी थीं और 2.06% वोट पाया था। सीटें तब भी नहीं मिली थी।

यूपी में भी बहुत कमजोर हो चुकी है बसपा
बहुजन समाज पार्टी और उसकी चीफ मायावती के लिए उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। मायावाती चार-चार बार राज्य की मुख्यमंत्री बन चुकी हैं। लेकिन, आज की तारीख में यूपी में पार्टी की स्थिति बहुत ही कमजोर है।

2017 (22.23%) से 2022 (12.88%) के विधानसभा चुनावों के बीच पार्टी का करीब 10% वोट बैंक खिसक चुका है और सीटें 19 से भी घटकर सिर्फ 1 रह चुकी है।

राज्य में पिछली बार बीएसपी 10 लोकसभा सीटें तब जीती थी, जब सारे मतभेदों को ताक पर रखकर सपा के साथ गठबंधन किया था। नहीं तो 2014 में तो एक भी सीट नहीं मिली थी।

यूपी की सीनियर जर्नलिस्ट सुमन गुप्ता ने कुछ महीने पहले बीबीसी से कहा था, 'बहनजी की आप चाहे जितनी भी आलोचना कर लीजिए, लेकिन वो एक संघर्षशील महिला तो रही हैं...... उनका अपना जीवन संघर्षपूर्ण रहा है...उन्होंने अपने जीवन में बहुत सारे उतार चढ़ाव देखे हैं...... लेकिन अभी तक आकाश के साथ ऐसा कुछ नहीं दिखा है....'

बदल सकता है राजनीति करने का बसपा वाला अंदाज
वैसे आकाश आनंद को नई जिम्मेदारी मिलने से बीएसपी में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। जैसे उनके भाषणों में अंग्रेजी के शब्द बखूबी इस्तेमाल होते हैं।

वह भाषणों के दौरा अत्याधुनिक तकनीकों जैसे कि टेली-प्रॉम्पटर की भी मदद लेने से परहेज नहीं करते। वह अपनी बुआ के सियासी हुनर भी सीखने की कोशिश करते दिखते हैं।

मायावती की बीएसपी के लिए अगला लोकसभा चुनाव बहुत ही अहम है। अभी पार्टी सुप्रीमो की नीति एकला चलो की है। कांग्रेस की ओर से उसके साथ गठबंधन के संकेत बीच-बीच में दिए जा रहे हैं।

लेकिन, इससे बसपा को अपना रहा-सहा जनाधार खिसकने का भी डर बना हुआ है। इन सब चुनौतियों से निपटना उनके भतीजे और पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।

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