हिमाचल में कांग्रेस का खेल बिगाड़ेगी AAP या BJP के डबल इंजन का तेल निकाल देगी ? जानिए
शिमला, 14 सितंबर: हिमाचल प्रदेश के पिछले तीन-साढ़े तीन दशकों के चुनावी इतिहास को देखें तो परंपरागत तौर पर विधानसभा चुनाव में इसबार कांग्रेस का पलड़ा भारी रहना चाहिए। प्रदेश की इसी स्थापित परंपरा को पलटने के लिए सत्ताधारी बीजेपी 'मिशन रिपीट' का दांव आजमा रही है। क्योंकि, यहां 1985 से ही कोई भी पार्टी लगातार चुनाव नहीं जीत पाती है। लेकिन, पंजाब में अप्रत्याशित जीत से उत्साहित आम आदमी पार्टी की जोरदार एंट्री ने उसके इस पड़ोसी राज्य के चुनावी गणित को फिलहाल थोड़ा सा अस्थिर कर रखा है। इसलिए, प्रदेश की चुनावी परंपरा के हिसाब से दो दलों के बीच में लड़ाई रहती है या फिर मुकाबला त्रिकोणीय होता है, इससे परिणाम पर काफी असर पड़ सकता है। हिमाचल में इसी साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं।

हिमाचल में कांग्रेस को विरासत और वादों पर भरोसा
जहां तक कांग्रेस की बात है तो अंदर से बुरी तरह से विभाजित पार्टी इस बार आम आदमी पार्टी की तरह ही हिमाचल प्रदेश में 'चुनावी रेवड़ियों' पर खूब यकीन कर रही है। साथ ही पार्टी विरासत की राजनीति के सहारे भी प्रदेश में सत्ता पर वापसी की परंपरा कायम रखने की उम्मीद पाल रही है। प्रदेश में पार्टी की कमान नई प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के पास है, जिन्हें अपने दिवंगत पति और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के राजनीतिक कद पर पक्का यकीन है। यही नहीं उन्होंने जो चुनावी घोषणाएं और रेवड़ियों का ऐलान किया है, उनमें 5 लाख नौकरियां, महिलाओं को 1,500 रुपए भत्ता और 300 यूनिट मुफ्त बिजली भी शामिल है। लेकिन, कांग्रेस के इन वादों का मुकाबला आम आदमी पार्टी की 'चुनावी रेवड़ियों' और भाजपा सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं और माइक्रो-मैनेजमेंट से होना है।

पंजाब की बड़ी जीत से उत्साहित है आम आदमी पार्टी
कांग्रेस हिमाचल की चुनावी परंपरा पर जितना भरोसा करना चाहती है, उससे कहीं ज्यादा वह आम आदमी पार्टी के आक्रामक तेवरों से डर रही है। क्योंकि, पंजाब का हाल उसे अभी भी याद है। आम आदमी पार्टी ने हिमाचल में भी वही दिल्ली और पंजाब वाला आजमाया हुआ कार्ड खेलना शुरू किया है और जनता के लिए 10 'गारंटी' की घोषणा कर दी है। इसमें प्रत्येक महिला को हर महीने 1000 रुपए देने, बेरोजगारी भत्ता देने और बुजुर्गों को मुफ्त में तीर्थ यात्रा करवाने जैसे लोक-लुभावन वादे किए गए हैं। पार्टी को लगता है कि इन 'रेवड़ियों' के अलावा, उसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल में वह करिश्मा है, जो कांग्रेस का भी सफाया कर सकते हैं और भाजपा के डबल इंजन का तेल भी निकाल सकते हैं।

'मिशन रिपीट' का नारा बुलंद कर रही है भाजपा
भाजपा केंद्र और प्रदेश दोनों जगह पर सत्ता में है। इसलिए उसके सामने चुनौतियां भी हैं, लेकिन उसका दावा है कि वह अपना 2017 जैसा ही प्रदर्शन कायम रख पाएगी। पार्टी ने माइक्रो-लेवल पर खुद को चुनावों के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'मिशन रिपीट' का नारा बुलंद कर रही है। पीएम मोदी 24 सितंबर को राज्य में एक रैली को भी संबोधित करने वाले हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप के मुताबिक इस चुनाव के लिए बीजेपी अपने विजन डॉक्यूमेंट (घोषणा पत्र) के लिए कम से कम 50,000 लोगों से सुझाव मांगेगी। पिछले चुनाव में 7,000 लोगों ने उसे राय दिए थे। पार्टी समाज के सभी वर्गों को चिट्ठी लिखकर भी उनसे सुझाव मांग रही है। मतलब, पार्टी अभी से माइक्रो-मैनेजमेंट के काम में जुट चुकी है।

पिछले चुनाव में भाजपा का वोट शेयर काफी बढ़ा था
2017 के हिमाचल विधानसभा चुनाव भाजपा को 68 में से 44 सीटें मिली थीं और उसका वोट शेयर 2012 के 38.47% से बढ़कर 48.8% हो गया था। पार्टी यहां 1982 से चुनाव लड़ रही है और पिछला चुनाव उसके लिए शानदार रहा था। हालांकि, सीटों के मामले में पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1990 में हुआ था, जब उसने 46 सीटें जीती थी। कांग्रेस को 2017 में यहां 21 सीटें मिली थीं और 2012 के 42.81% वोट शेयर से घटकर 41.7% रह गया था। पिछले चुनाव में राज्य में रिकॉर्ड 74.61% वोट पड़े थे। इससे पहले पहले 2003 में सबसे ज्यादा 74.51% मतदान हुआ था।

आम आदमी पार्टी को बीजेपी की 'बी टीम' कह रही है कांग्रेस
प्रदेश के मौजूदा चुनावी समीकरण को देखते हुए कांग्रेस ने एक बार फिर से आम आदमी पार्टी को 'बीजेपी की बी टीम' कहना शुरू कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी हिमाचल प्रदेश में भी झूठे वादे करके जनता को गुमराह कर रही है। मंगलवार को चंडीगढ़ में कांग्रेस प्रवक्ता अल्का लांबा ने दावा किया कि राज्य में इस साल होने वाले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल उपचुनावों से साबित हो चुका है कि सिर्फ कांग्रेस ही बीजेपी के डबल इंजन सरकार को हराने की स्थिति में है। उनका कहना है कि पार्टी यह चुनाव बेरोजगारी, महंगाई, सेब के बागवानों और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर लड़ेगी।पिछले साल अक्टूबर में हुए उपचुनावों बीजेपी मंडी लोकसभा सीट और फतेहपुर, अर्की और जुब्बल कोटखाई विधानसभाओं का चुनाव कांग्रेस से हार गई थी।

कांग्रेस के निशाने पर आम आदमी पार्टी और बीजेपी
आम आदमी पार्टी को भाजपा की बी टीम बताने के आरोपों की पुष्टि के लिए लांबा ने कहा कि उत्तराखंड और गोवा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस में सीधा मुकाबला था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने बीजेपी की जीत 'सुनिश्चित' करने के लिए चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी भाजपा की बी टीम है, उसका सबूत ये भी है कि उत्तराखंड में पार्टी के सीएम उम्मीदवार चुनावों में जमानत जब्त करवाने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे। लांबा ने एक और उदाहरण ये भी दिया कि हिमाचल प्रदेश में आम आदमी की पूरी यूनिट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में उसमें शामिल हो गए थे।

आम आदमी पार्टी का क्या किरदार ?
जबकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि प्रदेश की जय राम ठाकुर की अगुवाई वाली सरकार की ओर से शुरू की गई विभिन्न तरह की योजनाओं का लाभ राज्य में 20 लाख से ज्यादा लोगों को मिला है। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने जितने भी पहल शुरू किए हैं, उनमें से अधिकतर वही हैं जो विजन डॉक्यूमेंट के संकल्पों में शामिल किए गए थे। इन चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रदेश की दो दलीय व्यवस्था को देखते हुए आम आदमी पार्टी के लिए यहां बहुत ज्यादा प्रभाव दिखा पाना बहुत आसान नहीं होगा। (इनपुट-पीटीआई)












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