OPINION: क्या विधायकों के पार्टी छोड़ने से आम आदमी पार्टी पर पड़ेगा असर?
OPINION: दिल्ली विधानसभा चुनाव से महज पांच दिन पहले आम आदमी पार्टी के सात विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफ़ा देने वालों में महरौली के विधायक नरेश यादव, त्रिलोकपुरी के रोहित कुमार, जनकपुरी के राजेश ऋषि, कस्तूरबा नगर के मदन लाल, आदर्श नगर के पवन शर्मा, बिजवासन के भूपेंदर सिंह जून और पालम की भावना गौड़ शामिल हैं। लेकिन सवाल है कि आखिर चुनाव से चंद दिनों पहले ही विधायकों ने इस्तीफा क्यों दिया?
इन सात विधायकों का टिकट काटा गया था। हालांकि, फिर भी इनके इस्तीफ़े से ये चर्चा शुरू हो गई है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस इस्तीफ़े का आम आदमी पार्टी के चुनावी रथ पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

मतदान से पहले इस्तीफा क्यों?
बता दें कि 5 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी है और 8 फ़रवरी को नतीजे आएंगे। 17 जनवरी को नामांकन का आखिरी दिन था और 20 जनवरी नाम वापस लेने की अंतिम तारीख थी।
2020 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटें जीती थीं, वहीं बीजेपी ने आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका था। इस बार AAP ने मौजूदा विधायकों का टिकट काटा था। साथ ही चार विधायक ऐसे भी थे जिनकी जगह उनके परिवार के सदस्य को टिकट दिया गया था। सवाल ये है कि इन सात विधायकों ने इस्तीफ़ा देने के लिए ये समय क्यों चुना, जब चुनाव सामने है?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो, ऐसे मौके पर इस्तीफा देने का मतलब सीधे तौर पर पार्टी पर दबाव डालना है। एक संभावना ये भी है कि विपक्षी दलों द्वारा इन विधायकों को प्रोत्साहन भी मिला हो। अमूमन नेता टिकट कटने के साथ ही इस्तीफे का ऐलान कर देते हैं।
क्या जीत हार पर पड़ेगा प्रभाव?
सात विधायकों के इस्तीफा देने के बावजूद कई वर्तमान विधायकों ने वीडियो जारी कर कहा कि वे आम आदमी पार्टी में हैं और आगे भी रहेंगे। वीडियो जारी करने वालों में पार्टी का जाना-माना चेहरा दिलीप कुमार पांडे भी हैं, जो तिमारपुर से विधायक हैं और पार्टी ने उनका भी टिकट काटा है। उन्होंने अपने वीडियों संदेश में कहा, Aam Aadmi Party की कुल राजनीति का एक छोटा सा हिस्सा है चुनाव लड़ना और लड़वाना। एक टिकट, एक चुनाव से कहीं बढ़ कर है शम्मा-ए-वतन बने रहना। लड़ेंगे, जीतेंगे।
उनके अलावा किराड़ी के विधायक ऋतुराज गोबिंद ने भी ऐसा ही वीडियो जारी करते हुए कहा है कि बीते कुछ सप्ताह में उनसे कई दफे अलग अलग लोगों ने संपर्क किया था।
कई सियासी पंडिय मानते हैं, चुनावी मौसम में नेताओं का इस्तीफा देना आम बात है। इस्तीफ़े से कोई चुनाव जीतता-हारता नहीं है। चुनाव काफी कुछ परसेप्शन पर भी लड़ा जाता है। चुनाव 5 तारीख को है ऐसे में तीन तारीख तक जो गतिविधियां होती हैं, वो सब परसेप्शन बनाने की ही कोशिश है। वोटर्स पहले से ही अपना मन बना चुके होते हैं। मगर पार्टियां जरूर खुशी मनाती हैं।












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