सीताराम येचुरी की बॉडी परिवार ने क्यों AIIMS को की दान? जानिए अब उनके पार्थिव शरीर का क्या होगा?
Sitaram Yechury Death: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। सीताराम येचुरी ने दिल्ली के एम्स में 12 सितंबर की दोपहर 3 बजे के आसपास अंतिम सांस ली। वह अगस्त से उम्र संबंधी बीमारियों की वजह से दिल्ली एम्स में भर्ती थे।
सीताराम येचुरी के परिवार ने आज उनके निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को दान कर दिया है। सीताराम येचुरी की बॉडी परिवार ने एम्स को रिसर्च और टीचिंग के लिए दान दी है।

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सीताराम येचुरी के निधन पर एम्स ने क्या कहा?
एम्स ने अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि 72 वर्षीय सीताराम येचुरी को निमोनिया की वजह से 19 अगस्त 2024 को एम्स में भर्ती कराया गया था।
12 सितंबर 2024 को दोपहर 3:05 बजे उनका निधन हो गया। उनके परिवार ने बॉडी को शिक्षण और अनुसंधान उद्देश्यों के लिए एम्स दिल्ली को डोनेट कर दिया है। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक सीताराम येचुरी का निधन फेफड़ों में संक्रमण और मल्टी ऑर्गन फेलियोर की वजह से हुआ है।
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बॉडी डोनेट करना कैसे मेडिकल और रिसर्च में मदद करता है?
शरीर दान (बॉडी डोनेट) एक निस्वार्थ कार्य है जो स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा प्रगति के भविष्य को लाभ पहुंचाता है। जबकि मेडिकल छात्र और पेशेवर मानव शरीर रचना का विस्तार से अध्ययन करने के लिए दान किए गए शरीर का उपयोग करते हैं।
सर्जन और चिकित्सा व्यवसायी नई तकनीकों का अभ्यास करने, मौजूदा प्रक्रियाओं को परिष्कृत करने और सुरक्षित शल्य चिकित्सा पद्धतियों को विकसित करने के लिए दान किए गए शरीर का उपयोग करते हैं।
वैज्ञानिक और शोधकर्ता दान किए गए शरीर का उपयोग बीमारियों का पता लगाने, विभिन्न अंगों पर चिकित्सा स्थितियों के प्रभावों का अध्ययन करने और नए उपचार या दवाएं विकसित करने के लिए करते हैं।
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