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Sitaram Yechury Net worth: अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गए हैं सीताराम येचुरी? कौन होगा उनका वारिस

Sitaram Yechury Net worth: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी का निधन हो गया है। 72 साल की उम्र में उन्होंने 12 सितंबर की दोपहर दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली। सीताराम येचुरी पिछले काफी वक्त से बीमार थे। उन्हें उम्र संबंधी कई बीमारियां थीं।

सीताराम येचुरी के निधन से भारतीय राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। येचुरी की राजनीतिक यात्रा उनके छात्र जीवन के दौरान ही शुरू हो गई थी। अपने पूरे करियर के दौरान, येचुरी ने सीपीआई(एम) में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने 2015 से 2022 तक पार्टी के महासचिव के रूप में कार्य किया। सीताराम येचुरी साल 2005 से 2017 तक राज्यसभा सांसद भी रहे।

Sitaram Yechury Net worth

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सीताराम येचुरी के निधन के बाद से उनके परिवार और संपत्ति को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। सीताराम येचुरी अपने पीछे लाखों की संपत्ति छोड़ गए हैं। सीताराम येचुरी के परिवार के बारे में भी लोग जानना चाहते थे। आइए जानें सीताराम येचुरी के परिवार और उनकी सपंत्ति के बारे में?

Sitaram Yechury Property: सीताराम येचुरी की संपत्ति?

  • सीताराम येचुरी के राज्यसभा में दिए घोषणा पत्र के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 82 लाख 71 हजार रुपये है।
  • सीताराम येचुरी के बैंक अकाउंट में 34 लाख रुपये से ज्यादा थे। सीताराम येचुरी ने कई कंपनियों में बांड, डिबेंचर और शेयर पर साढ़े तीन लाख से ज्यादा रुपये निवेश किए थे।
  • सीताराम येचुरी के पास 20 लाख रुपये की एलआईसी पॉलिसी और अन्य बीमा पॉलिसी थी।
  • सीताराम येचुरी के पास अधिकारिक तौर पर कोई गाड़ी नहीं थी। सीताराम येचुरी के पास 5 लाख रुपये के गहने थे।
  • सीताराम येचुरी के नाम पर 19 लाख 75 हजार रुपये की एक लैंड प्रोपर्टी भी थी। सीताराम येचुरी ने अपने नाम पर कोई भी कर्ज नहीं ले रखा था।
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Sitaram Yechury Family: सीताराम येचुरी का परिवार, कौन होगा उनका वारिस

सीताराम येचुरी ने दो शादी की थीं। उनकी पहली पत्नी का नाम इंद्राणी मजूमदार था। सीताराम येचुरी और इंद्राणी मजूमदार के दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी थे। सीताराम येचुरी की पहली पत्नी प्रसिद्ध वामपंथी कार्यकर्ता वीना मजूमदार की बेटी थीं।

सीताराम येचुरी की दूसरी शादी पत्रकार सीमा चिश्ती से हुई थी। वह द वायर की संपादक हैं और पहले बीबीसी हिंदी की दिल्ली संपादक थीं।सीमा चिश्ती येचुरी से सीताराम येचुरी का एक बेटा है। उनके बेटे आशीष येचुरी का 35 साल की उम्र में कोरोना के रहते 2021 में निधन हो गया था। उनकी बेटी अखिला येचुरी इतिहास की प्रोफेसर हैं और सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं और वह एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में लेक्चरर थीं।

सीताराम येचुरी के परिवार में अब उनकी पत्नी सीमा चिश्ती और उनकी बेटी अखिला और बेटा दानिश है। कानून तौर पर सीताराम येचुरी के वारिस उनकी पत्नी और बच्चे होंगे।

Sitaram Yechury Bio: सीताराम येचुरी के बारे में जानिए?

सीताराम येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को तमिलनाडु के मद्रास (अब चेन्नई) में एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता सर्वेश्वर सोमयाजुला येचुरी आंध्र प्रदेश राज्य सड़क निगम में इंजीनियर थे और उनकी मां कल्पकम येचुरी एक सरकारी अधिकारी थीं। सीताराम येचुरी का बचपन हैदराबाद में बीता।

सीताराम येचुरी पहली बार 2005 में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। सीताराम येचुरी एक प्रसिद्ध लेखक और स्तंभकार हैं। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं।

Sitaram Yechury Education: सीताराम येचुरी ने हैदराबाद के ऑल सेंट्स हाई स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई की। 1969 के तेलंगाना आंदोलन के बाद वे दिल्ली आ गए और प्रेसिडेंट्स एस्टेट स्कूल में दाखिला ले लिया। अपनी असाधारण शैक्षणिक कुशलता के कारण येचुरी ने 1970 में सीबीएसई उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला लिया और वहीं से अर्थशास्त्र में बी.ए. (ऑनर्स) किया। सीताराम येचुरी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री ली थी।

Sitaram Yechury Net worth

Sitaram Yechury Political Career: सीताराम येचुरी का राजनीतिक सफर

सीताराम येचुरी ने JNU से छात्र राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल हुए। सीताराम येचुरी ने 1974 में भारतीय राजनीति में कदम रखा, जब वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सदस्य बने। वे 1975 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी - मार्क्सवादी में शामिल हुए, जब वे दिल्ली में जवाहरलाल विश्वविद्यालय में छात्र थे।

येचुरी उन कई लोगों में से थे जिन्हें 1975 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया गया था। 1977 में आपातकाल हटने के बाद जेल से रिहा होने के बाद सीताराम येचुरी एक साल में तीन बार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए।

सीताराम येचुरी और सीपीआई-एम के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने जेएनयू को वामपंथी गढ़ बना दिया। येचुरी को एसएफआई का महासचिव चुना गया और बाद में 1978 में उन्हें इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया। येचुरी 1984 में सीपीआई-एम केंद्रीय समिति के सदस्य बने। दो साल बाद, उन्होंने एसएफआई से अपने रास्ते अलग कर लिए।

1992 में सीपीआई-एम की 14वीं कांग्रेस में सीताराम येचुरी को पार्टी पोलित ब्यूरो के रूप में चुना गया। येचुरी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के साथ मिलकर 1996 में संयुक्त मोर्चा सरकार के लिए 'न्यूनतम साझा कार्यक्रम' का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने 2004 में यूपीए सरकार का हिस्सा बनने के लिए गठबंधन प्रक्रिया बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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