भाजपा को समर्थन क्यों देना चाहते हैं शरद पवार?

नई दिल्ली। राजनीति की गोटियां बिछाने में शरद पवार का कोई सानी नहीं है। वे शायद एकमात्र इस तरह के नेता हैं,जो कांग्रेस या किसी भी दल से अपना जुगाड़ कर ही लें हैं। वे पुरानी पीढ़ी के उन नेताओं में हैं,जो संबंध बनाने और निभाने में माहिर हैं। इस तरह के नेता मुश्किल दौर में कड़े फैसले लेना जानते हैं।

sharad pawar

महाराष्ट्र के हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों से आप शरद पवार की शख्सियत को समझ सकते हैं। मतगणना से एक दिन पहले उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन देने की घोषणा कर दी। पर क्या इसका मतलब यह समझा जाए कि वे भाजपा के आगे झुक गए हैं ? इस सवाल का जवाब ना में है। तो फिर उन्होंने भाजपा को मतगणा से पहले ही समर्थन देने की घोषणा क्यों की ? वे तो भाजपा को साम्प्रदायिक पार्टी कहते रहे हैं।

दरअसल उनकी पार्टी ने उक्त कदम उठाकर एक तीरे से कई शिकार कर दिए। पहली बात तो उन्हें मालूम है कि उनके नेता के रूप में अब दिन बचे-खुचे हैं। वे चाहते हैं कि उनका कोई खासमखास पार्टी को संभाल लें।

वे चाहते हैं कि उनकी पुत्री सुप्रिया सुले पार्टी को देखें। वे अपने भतीजे अजित पवार के कारनामों से नाखुश हैं। अजित पवार के ऊपर सिंचाई घोटाले के आरोप भी हैं। मराठा नेता पवार को यह मंजूर है कि भाजपा सरकार उनके भतीजे के खिलाफ एक्शन ले। अजित पवार पर एक्शन सुप्रिया के राजनीति करियर के लिए वरदान साबित हो सकता है।

दूसरी बात यह है कि इससे एनसीपी की इमेज निखरेगी। कायदे से देखा जाए तो शरद पवार अब कांग्रेस से दूरियां बनाना चाहते हैं। क्योंकि कांग्रेस तो काल के गर्त में समा रही है।

तीसरी और अंतिम बिन्दु पर गौर करने की जरूरत है। हालिया विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे धूल में मिल गए। वे मानते हैं कि एनसीपी तब ही आगे बढ़ सकती है,बशर्तें कि शिव सेना को रोका जाए। अगर भाजपा महाराष्ट्र में विकास करने में सफल होती है,तो उसका लाभ एनसीपी को भी होगा। क्योंकि एनसीपी सरकार को बाहर से समर्थन जो दे रही है।

शरद पवार मानते हैं कि अगर एनसीपी का भाजपा सरकार को समर्थन मिल जाता है तो सरकार अपना काम खुलकर कर सकेगी। उधर, शिव सेना नेता उद्व ठाकरे के सामने भी कठिन समय है। वे किसी भी हालत में पवार की राजनीति की समझ की बराबरी नहीं कर सकते। आने वाला दौर महाराष्ट्र की सियासत के लिए खास होने वाला है। देखिए शरद पवार अगली चाल किस तरह से चलते हैं।

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