40 साल बाद आये लोकपाल बिल का असली हीरो कौन अन्ना, राहुल या केजरीवाल?

Why Lok Sabha passes historic Lokpal Bill and Anna Hazare is Happy?
[अंकुर शर्मा] 18 दिसंबर की तारीख शायद आज भारतीय राजनीति में इतिहास लिख गयी है क्योंकि आज संसद में उस विधेयक पर मोहर लगी है जिसका नाम है 'लोकपाल बिल'। जिसको बनाने के लिए आवाजें पिछले काफी समय से उठ रही थीं लेकिन किसी भी सरकार के सिर पर जूं नहीं रेंगी। लेकिन आज से दो साल पहले जब लोकपाल की मांग करते लोग सड़कों पर उतर आये तो संसद की दीवारें भी हिल गयीं।

लेकिन फिर भी सरकार ने सुध नही ली और आंदोलन करने वालों को कानून का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि सड़कों पर शोर मचाने से कानून नहीं बन जाता। लोकपाल को जनलोकपाल बनाने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे ने रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर अनशन किया, जेल गये लेकिन फिर भी केन्द्र सरकार की ओर से, कभी भी लोकपाल बिल पर या यूं कहे कि वह लोकपाल बिल जिसकी मांग अन्ना हजारे कर रहे थे और जिसे मीडिया ने जनलोकपाल बिल का नाम दिया था, के बारे में कोई सुध नहीं ली गयी। अन्ना ने जमकर कांग्रेस सरकार और राहुल गांधी को कोसा और खुलेआम कहा कि सोनिया-राहुल चाहते नहीं ही नहीं है कि लोकपाल बिल बनें और देश से भ्रष्टाचार दूर हो।

लेकिन बीते दो सालों में हालात काफी बदल गये, जो लोग अन्ना हजारे के साथ दो साल पहले साथ खड़े थे उन्होंने सिस्टम को बदलने के लिए अपना ही दल बदल लिया और अपनी एक नयी पार्टी बना ली जिसका नाम है 'आम आदमी पार्टी'। टीम अन्ना के अहम सदस्य रहे और अन्ना के अर्जुन कहलाने वाले अरविंद केजरीवाल ने लोकपाल बिल के नाम पर ही लोगों से वोट मांगे और विजयी हुए। केजरीवाल की यह बयान बाजी खुद उनके गुरू अन्ना हजारे को रास नहीं आयी और उन्होंने खुद को उनसे अलग बताते हुए कहा कि अन्ना का लोकपाल बिल नहीं बल्कि देश का लोकपाल बिल है जिसे हर हालत में सरकार को बनाना होगा।

लेकिन कहते हैं ना हर कहानी में ट्विस्ट होता है उसी तरह से लोकपाल आंदोलन में भी ट्विस्ट आ गया। एक बार फिर से अन्ना हजारे ने अनशन किया लोकपाल बिल को लेकर, लेकिन इस बार दिल्ली की जगह उन्होंने रालेगढ़ सिद्धि को चुना। इस बार उनके बगल में अरविंद केजरीवाल की जगह नये चेहरे नजर आये। लेकिन लोगों को अचरज तब हुआ जब अन्ना ने अपने अनशन मंच पर राहुल गांधी की तारीफ की और वही कहा जो कि पिछले काफी समय से राहुल गांधी और उनकी टीम बोलती नजर आ रही है कि अन्ना जिस लोकपाल बिल की मांग कर रहे हैं वही लोकपाल बिल सरकार भी लाना चाहती है।

कल तक जो राहुल गांधी अन्ना की नजर में नकारे थे, आज वह हीरो हो गयें। कल तक अन्ना कहते थे कि लोकपाल बिल बनने से देश से सौ प्रतिशत भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा, आज वही कह रहे हैं कि 45 प्रतिशत भ्रष्टाचार का खात्मा लोकपाल करेगा। आखिर क्या वजहें रहीं कि अन्ना के सुर बदल गये?

सबको मालूम है कि चार राज्यों की विधानसभा चुनावों की करारी हार से घबरायी कांग्रेस की मजबूरी थी लोकपाल बिल लाने की। ऐसे में अगर उसने लोकपाल बिल पास कराया तो कोई अचरज नहीं है क्योंकि सब जानते हैं कि लोकपाल बिल के नाम पर ही अब कांग्रेस और राहुल गांधी लोकसभा चुनाव की लड़ाई लड़ेंगे लेकिन अन्ना हजारे, का यूं राहुल और कांग्रेस का प्रशंसा करना, यह समझ के परे हैं।

क्या अन्ना को लगने लगा कि अगर वह सरकारी लोकपाल बिल को सहमति नहीं देंगे तो पिछले 29 सालों से उनकी तपस्या बेकार चली जायेगी क्योंकि क्रेडिट कोई और ले जायेगा, या फिर अन्ना को लगने लगा कि केजरीवाल अगर सत्ता में आते हैं औऱ जनलोकपाल बिल के हीरो वह बन जायेंगे, फिर अन्ना और अन्ना का त्याग किसी को याद ही नहीं आयेगा। शायद इसलिए उन्होंने कुछ ना सही से थोड़ा ही सही ...वाली पद्धति पर कायम रहते हुए सरकारी लोकपाल बिल को हरी झंड़ी दी और राहुल गांधी की तारीफ की।

इसे बारे में आप सबकी क्या राय है? क्या कारण रहे जिसकी वजह से पिछले चालीस सालों से अटका लोकपाल बिल आज संसद में मात्र 32 मिनट में पास हो गया। अपनी राय नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें।

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