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ग्रीन कार्ड की कतार में लगे भारतीयों के लिए जो बाइडेन क्यों हैं फायदेमंद

नई दिल्ली- अपने चुनाव अभियान के एजेंडे में अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने उनके देश में रोजगार की चाहत रखने वाले अप्रवासियों के लिए ग्रीन कार्ड देने का जो एजेंडा रखा था, अगर व्हाइट पहुंचने के बाद भी अपने उसी वादे पर कायम रहे तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भारतीयों को मिल सकता है। क्योंकि, अमेरिका की मौजूदा नीति की सबसे बड़ी मार भारतीयों पर पड़ रही है, जिसके चलते हर साल ग्रीन कार्ड पाने की चाह रखने वाले भारतीयों की कतार लगातार लंबी होती चली जा रही है। अब वहां सत्ता बदल रही है तो संभावना है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीयों को हर साल अमेरिका में नौकरी करने के लिए ग्रीन कार्ड मिल सकता है।

Why Joe Biden is beneficial for Indians in the line of green cards

अमेरिका में अभी जो नियम है उसके मुताबिक वह हर साल प्रति देश के हिसाब से 1,40,000 रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड जारी करता है। भारत की जनसंख्या और उसके मुताबिक ग्रीन कार्ड की चाहत रखने वाले भारतीयों की संख्या स्वाभाविक तौर पर इससे कहीं ज्यादा होती है। बाइडेन ने इसी देश आधारित कोटा को खत्म करने का वादा किया हुआ है। इमिग्रेशन डॉट कॉम के मैनेजिंग अटॉर्नी राजीव एस खन्ना का कहना है, 'ग्रीन कार्ड के मामले में मिस्टर बाइडेन ने खुलकर कहा था कि वह चाहते हैं कि पूर्व निर्धारित देश का कोटा खत्म कर दें। यह बदलाव बहुत जल्द देखा जा सकता है और साल भर के अंदर इसका फायदा नजर आ सकता है।'

अगर अमेरिका के फॉरेन लेबर सर्टिफिकेशन के आंकड़ों को देखें तो 2020 के वित्त वर्ष के पहले तीन तिमाही (अक्टूबर,19-जून,20) परमानेंट एम्पलॉयमेंट प्रोग्राम के लिए आवेदन देने वालों में आधे तो भारतीय ही थे। दूसरे स्थान पर चीन था, लेकिन सिर्फ 13 फीसदी आवेदकों के साथ काफी पीछे। इन आवेदकों में से करीब 67 फीसदी के पास अभी H-1B वीजा है। जिन 10 बड़ी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए 2019 के वित्त वर्ष में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन दिया था, उनमें से 8 अमेरिकी कंपनियां थीं। जाहिर है कि देशों के आधार पर मौजूदा ग्रीन कार्ड कोटा सिस्टम खत्म किए जाने पर अमेरिका में ज्यादा सक्षम कामगारों के पहुंचने की भी संभावना बढ़ेगी और वह अमेरिका जाना चाहेंगे।

अमेरिका के इमिग्रेशन लॉयर और सिस्काइंड ससर के फाउंडिंग पार्टनर ग्रेग सिस्काइंड का कहना है कि, 'बाइडेन के अप्रवासी योजना में कंट्री कैप खत्म करना है और सभी तरह के कुशल कामगारों के लिए ग्रीन कार्ड की उपलब्धता बढ़ानी है। अगर वह कानून पास नहीं करवा पाए तो भी वह एग्जिक्यूटिव पावर का इस्तेमाल करके राहत दे सकते हैं........' अमेरिका की नीतियों पर नजर रखने वालों का कहना है कि जहां डोनाल्ड ट्रंप ऐसे पहले मॉडर्न प्रेसिडेंट थे, जो अवैध और वैध दोनों तरह के अप्रवासियों को अमेरिका के लिए नकारात्मक समझते थे, जबकि बाइडेन के पास अप्रवासियों के हित वाला इतिहास की सबसे विस्तृत योजना तैयार है। हालांकि, वीजा नियमों में बदलाव के लिए उन्हें अमेरिकी कांग्रेस की मदद की भी दरकार हो सकती है, वैसे एक्सपर्ट मानते हैं इसे कांग्रेस से पास करवाना बहुत ज्यादा मुश्किल भी नहीं है।

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