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क्‍यों गलत नहीं है वक्‍फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों की रखना? जगदम्बिका पाल ने बताया, बोले 'गलती निकली तो'

Waqf Amendment Bill: केंद्र सरकार द्वारा वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधनों के खिलाफ कई अपीलों दायर की गई हैं। जिस पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है और विपक्षी पार्टियों की आपत्ति वाले मुद्दों की जांच कर रहा है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वक्‍फ बोर्ड संशोधन विधेयक में शामिल किए गए कुछ नियमों पर सवाल उठाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के न्‍यायाधीशों ने सुनवाई के दौरान पूछा है कि वक्‍फ बोर्ड के प्रशासन में गैर-मुसलमानों को शामिल किए जाने के पीछे तर्क क्‍या है? क्‍योंकि हिंदू धार्मिक बंदोबस्‍ती पर ऐसा प्रवाधान नहीं है। जिस पर वक्‍फ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के प्रमुख जगदंबिका पाल ने जवाब दिया है।

Jagdambika Pal

जेसपी अध्‍यक्ष बोले- अगर वक्‍फ संशोधन कानून में कोई कमी मिलती है तो...

वक्फ अधिनियम से जुड़ी चिंताओं की निगरानी करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के प्रमुख जगदंबिका पाल ने इसके साथ ही बड़ा साहसिक बयान दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर कानून में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो वे सांसद (एमपी) पद से इस्तीफा दे देंगे।

SC के सॉलिसिटर जनरल ने पूछा था ये सवाल?

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने वक्‍फ बोर्ड से संसोधन बिल को चुनौती देने वाले मामले में सुनवाई की और दोनों सॉलिसिटर जनरल ने तुषार मेहता से कहा क्‍या आप सुझाव दे रहे हैं कि मुसलमान अब हिंदू बंदोबस्‍ती बोर्ड का हिस्‍सा भी हो सकते हैं।

पाल ने बताया- क्‍यों गलत नहीं है वक्‍फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों की रखना?

इसके बाद आज तक को दिए इंटरव्‍यू में जगदंबिका पाल ने इस मुद्दे पर राजनीतिक चालबाजी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की उन्‍होंने कहा वक्‍फ बोर्ड एक विधि निकाय यानी कानूनी संस्‍था है और इसमें मुसलमानों को रखा जाना बिलकुल सही है।

वक्‍फ अधिनियम के खिलाफ सारे आरोप निराधार

भाजपा सांसद जगदंपिका पाल ने वक्फ अधिनियम संशोधनों के राजनीतिक दोहन की आलोचना की, मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपना पक्ष रखने के लिए कुछ दलों द्वारा अपनाई गई रणनीतियों की निंदा की और उन्हें अनुचित बताया। पाल ने अधिनियम के खिलाफ आरोपों को निराधार बताया और कुछ राजनीतिक गुटों पर अपने फायदे के लिए जनता की भावनाओं से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया।

वक्‍फ बोर्ड में हिंदुओं की भागीदारी पर आपत्ति

गौरतलब है कि वक्फ अधिनियम संशोधनों से जुड़े विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गए है। इन याचिकाओं में एक महत्वपूर्ण मुद्दा वक्फ बोर्ड में एक हिंदू व्यक्ति को शामिल करना है, एक ऐसा मुद्दा जिसने न केवल जनता का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी पूछा है कि इसके पीछे तर्क क्‍या है?

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश

इसके अलावा चूंकि कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी है इसलिए उसने सात दिनों की अस्थायी रोक लागू की है, जिसके दौरान बोर्ड में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी, न ही किसी संपत्ति का पंजीकरण रद्द किया जाएगा।

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