UP: जूता मारने वाले सांसद त्रिपाठी समेत 8 सीटों पर क्यों फंसा है पेंच?
नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश में 70 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नामों के ऐलान के बाद बाकी 8 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर बीजेपी पूरी तरह से ठिठकी हुई नजर आ रही है। यूपी की कुल 80 में से 2 सीटें पार्टी ने सहयोगी अपना दल के लिए छोड़ी हैं। लेकिन, शायद अंदरूनी घमासान और उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण पार्टी को बाकी सीटों पर फैसला लेने में दिक्कत हो रही है। कुछ सीटों पर तो सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श और दबाव की राजनीति भी चल रही है, जिसके चलते ऐसे लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवारों के नामों को लेकर पेंच फंसा हुआ है।

इन 8 सीटों पर है सस्पेंस
सीटों की तालमेल के तहत बीजेपी ने इसबार यूपी में मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज की सीट अपना दल को दे दी है। जबकि, प्रतापगढ़ की सीट बीजेपी के खाते में आ गई है। प्रतापगढ़ के अलावा भाजपा की ओर से जिन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम के ऐलान का इंतजार है, उनमें अंबेडकर नगर, संत कबीरनगर, जौनपुर, भदोही, गोरखपुर, देवरिया और घोसी। जानकारी के मुताबिक प्रतापगढ़ में पार्टी को अभी भी एक अदद उम्मीदवार की तलाश है, जबकि देवरिया सीट पर कलराज मिश्र के कद का कोई प्रत्याशी शायद अभी तक चुनाव समिति की नजर में नहीं आया है। प्रतापगढ़ में एक दिक्कत ये है कि वहां रघुराज प्रताप सिंह या 'राजा भैया' ने अक्षय प्रताप सिंह को मैदान में उतार दिया है। ये वही 'राजा भैया' हैं, जो विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवारों को जीत दिलाने में सहयोग कर चुके हैं। इसीलिए पार्टी को वहां उम्मीदवार घोषित करने से पहले इस बात की भी चिंता करना पड़ रही है।

'जूतेबाज' सांसद का टेंशन
संत कबीरनगर लोकसभा क्षेत्र अपने विधायक को जूता मारने वाले भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी के कारण चर्चित हो चुका है। लेकिन, उनकी यही हरकत अब पार्टी के लिए मुसीबत बनी हुई है। बीजेपी नेतृत्व यह तय नहीं कर पा रहा है कि त्रिपाठी को दोबारा टिकट दिया जाय भी या नहीं। चर्चा ये भी है कि उनकी सीट भी बदलने पर विचार चल रहा है। ऐसे में उनके विकल्प की तलाश के कारण भी अड़चनें पैदा हो सकती हैं और उन्हें जो नई सीट दी जाएगी, वहां की अपनी दिक्कतें होंगी।

सहयोगियों से मंथन
भाजपा ने हाल ही में गोरखपुर से सांसद प्रवीण निषाद को पार्टी में शामिल करा लिया है। लेकिन, अबतक गोरखपुर से उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। अगर पार्टी ने उन्हें गोरखपुर की जगह कोई दूसरी सीट दी, तो गोरखपुर के लिए भी एक नए चेहरा सामने लाना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इस सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा जुड़ी रही है। चर्चा है कि निषाद वोट बैंक को देखते हुए पार्टी दो सीटें अपने नए सहयोगी के लिए छोड़ सकती है। इसको लेकर भदोही, अंबेडकर नगर और जौनपुर की चर्चा हो रही है। इसी तरह घोसी सीट भी किसी सहयोगी दल को देने पर मंथन चलने की बात है। गौरतलब है कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओमप्रकाश राजभर भी लगातार बीजेपी से अपनी पार्टी के लिए सीट छोड़ने का दबाव बनाए हुए हैं और वो भाजपा नेतृत्व को बार-बार धमकी भी दे रहे हैं।












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